केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नक्सल मुक्त भारत चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने 31 मार्च 2026 आखिरी डेड लाइन भी दी है। नक्सलियों के खिलाफ सरकार ऑपरेशन भी चला रही है। सैकड़ो की तादाद में नक्सली मारे गए हैं, तो वहीं हजारों की तादाद में वह घर भी लौट रहे हैं। आमतौर पर यह देखा जाता है कि वरिष्ठ नक्सली लीडर का घर लौटना काफी मुश्किल होता है। बैन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) के टॉप लीडर थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी करीब 44 साल से अंडरग्राउंड थे।
देवूजी ने किया है सरेंडर
देवजी ने मंगलवार को तेलंगाना पुलिस के सामने तीन और नक्सलियों (सीनियर माओवादी लीडर मल्ला राजी रेड्डी, बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर, और नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना) के साथ सरेंडर कर दिया। इसके बाद देवजी का परिवार उनसे मिलने तेलंगाना के जगतियाल ज़िले के कोरुतला शहर से हैदराबाद गया। 62 वर्षीय देवूजी से मिलना उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा अनुभव था।
देवजी के सबसे छोटे भाई थिप्पिरी गंगाधर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मैं उन्हें 43 साल बाद देख रहा हूं। जब मैंने मंगलवार को न्यूज चैनलों पर उन्हें ज़िंदा देखा तो मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ।” गंगाधर अपनी पत्नी के साथ हैदराबाद गए थे। मैं पूरे दिन टीवी से चिपका रहा। जब टीवी पर विज़ुअल्स बंद हो गए, तो मैंने उन्हें अपने मोबाइल फ़ोन पर दोबारा देखा।”
आंखों में सिर्फ खुशी के आंसू और गले मिले- परिवार
देवजी की बहन और उनका परिवार भी रीयूनियन में था। इसके बारे में गंगाधर ने कहा कि सिर्फ़ खुशी के आंसू और गले मिलना था और ज़्यादा बात नहीं हुई। उन्होंने कहा, ” बात करने के लिए बहुत कुछ है, पूछने के लिए बहुत सारे सवाल हैं। जानने के लिए बहुत कुछ है कि उन्होंने इतने सालों में क्या किया और क्या उन्हें हमारी याद आई और उन्होंने हमें मिस किया। लेकिन यह सब बाद में होगा। आज हम सब इतने परेशान थे कि ज़्यादा बात नहीं कर पाए। उनके भाई ने अपने होमटाउन कोरुतला में बसने की इच्छा जताई है।”
सीनियर माओवादी लीडर मल्ला राजी रेड्डी की बेटी स्नेहलता रेड्डी भी लगभग 40 साल बाद अपने 70 साल के पिता से मिलीं। तेलंगाना पुलिस ने सरेंडर में मदद की। पुलिस ने परिवार वालों से मिलने का इंतज़ाम किया। राज्य की सरेंडर पॉलिसी के तहत देवजी और राजी रेड्डी को 25-25 लाख रुपये के चेक दिए गए, जबकि राव और नरसिम्हा रेड्डी को 20-20 लाख रुपये दिए गए।
एंटी-इंसर्जेंसी ऑपरेशन तेज
सुरक्षाबल नक्सलियों के सरेंडर करने के डेडलाइन से पहले एंटी-इंसर्जेंसी ऑपरेशन तेज कर रहे हैं, ताकि बगावत खत्म हो सके। माओवादियों के लिए ये सरेंडर उस आंदोलन के लिए एक और झटका है जो पहले से ही कई हत्याओं और सरेंडर की वजह से कमज़ोर हो चुका है। ऑपरेशन में नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू और माडवी हिडमा जैसे बड़े नक्सलियों की एनकाउंटर में मौत हो चुकी है जबकि मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू और बरसा देवा उर्फ बरसा सुक्का जैसे नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है।
तेलंगाना के डीजीपी बी शिवधर रेड्डी ने कहा, “माओवादी आंदोलन अब बिना लीडर और बिना दिशा का है। एक बार फिर मैं तेलंगाना के उन 11 माओवादी नेताओं से अपील करता हूं जो अभी भी अंडरग्राउंड हैं कि वे सरेंडर कर दें।” इन 11 नेताओं में मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति और उनकी पत्नी जोडे रत्ना बाई शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि हालांकि वे एक्टिव नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया है। तेलंगाना पुलिस अब उनके सरेंडर के लिए दबाव बना रही है। सूत्रों का दावा है कि फरार 11 में से कुछ ने उनसे संपर्क कर लिया है। पढ़ें डीजीपी शिवधर रेड्डी बोले- तेलंगाना में नक्सली आंदोलन अपने अंत की ओर
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वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों की एक नई समीक्षा के बाद देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या आठ से घटकर सात रह गई है। यह बदलाव केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की घोषणा के अनुरूप है। पढ़ें पूरी खबर
