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पीएम मोदी को मनमोहन सिंह की कड़ी चिट्ठी- नेहरू से जुड़ी विरासत से ना करें छेड़छाड़

मनमोहन सिंह ने अपने पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भी जिक्र किया है और लिखा है कि करीब छह साल से ज्यादा वक्त तक वाजपेयी प्रधानमंत्री रहे लेकिन उन्होंने कभी भी तीन मूर्ति मेमोरियल के साथ छेड़छाड़ करने की नहीं सोची लेकिन दुख की बात है कि मौजूदा सरकार के एजेंडे में यह छेड़छाड़ शामिल है।

Author August 27, 2018 3:19 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह। (एक्सप्रेस फोटो)

पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से जुड़ी विरासत से छेड़छाड़ ना करने का अनुरोध किया है। पिछले हफ्ते लिखी गई चिट्ठी में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार नेहरू से जुड़ी विरासत से छेड़छाड़ करना चाहती है। उन्होंने लिखा है कि तीन मूर्ति स्थित नेहरू मेमेरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (एनएमएमएल) की प्रकृति एवं स्वरूप को केंद्र सरकार बदलना चाहती है, यह सरकार के एजेंडे में शामिल है। पूर्व पीएम ने लिखा है कि जवाहर लाल नेहरू सिर्फ कांग्रेस से संबंध नहीं रखते थे बल्कि वो पूरे देश के नेता थे। उन्होंने लिखा है कि तीन मूर्ति कॉम्प्लेक्स के साथ छेड़छाड़ न किया जाय।

मनमोहन सिंह ने अपने पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भी जिक्र किया है और लिखा है कि करीब छह साल से ज्यादा वक्त तक वाजपेयी प्रधानमंत्री रहे लेकिन उन्होंने कभी भी तीन मूर्ति मेमोरियल के साथ छेड़छाड़ करने की नहीं सोची लेकिन दुख की बात है कि मौजूदा सरकार के एजेंडे में यह छेड़छाड़ शामिल है। बता दें कि मनमोहन सिंह ने यह पत्र तब लिखा जब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा छिड़ी कि केंद्र सरकार नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में ही देश की सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए म्यूजियम बनवाना चाहती है। कांग्रेस का आरोप है कि यह नेहरू की विरासत से छेड़छाड़ और उसे कमतर करने की कोशिश है।

दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संसद में भाषण का जिक्र करते हुए मनमोहन सिंह ने लिखा है कि नेहरू के निधन पर वाजपेयी जे ने कहा था, “इस तरह के निवासी फिर कभी तीन मूर्ति की शोभा नहीं बढ़ा सकते हैं। वह जीवंत व्यक्तित्व, विपक्ष को भी साथ लेने का दृष्टिकोण, सज्जनता और वह महान थे जिन्हें निकट भविष्य में फिर से नहीं देखा जा सकता है। विचारों के अंतर के बावजूद हमारे पास उनके महान आदर्शों, उनकी ईमानदारी, देश के लिए उनके प्यार और उनके अतुलनीय साहस के प्रति सम्मान है।” पूर्व पीएम ने लिखा है, “हर हाल में एनएमएमएल का मौजूदा स्वरूप बरकरार रहना चाहिए। संग्रहालय को जवाहरलाल नेहरू और स्वतंत्रता आंदोलन पर अपना प्राथमिक ध्यान भी बरकरार रखना चाहिए, क्योंकि साल 1920 के दशक और साल 1940 के दशक के मध्य में वो लगभग दस साल जेल में रहे और अपनी अहम भूमिका अदा की। कोई भी संशोधन उस भूमिका और उनके योगदान को समाप्त नहीं कर सकता।”

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