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गृह मंत्रालय ने माना- जवानों के पास नहीं है नक्सलियों की बारूदी सुरंगों का पता लगाने की तकनीक

गृह मंत्रालय ने संसदीय पैनल को बताया है कि सुरक्षा बल के पास जो मौजूदा तकनीक है, उससे वे वामपंथी चरमपंथ से जूझ रहे इलाकों में गहरी बारूदी सुरंगों का पता नहीं लगा सके।
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है। (Photo Source: PTI)

गृह मंत्रालय ने संसदीय पैनल को बताया है कि सुरक्षा बल के पास जो मौजूदा तकनीक है, उससे वे वामपंथी चरमपंथ से जूझ रहे इलाकों में गहरी बारूदी सुरंगों का पता नहीं लगा सके। द हिन्दू की खबर के मुताबिक 13 मार्च को छत्तीसगढ़ के सुकमा में 9 सीआरपीएफ जवानों की उस समय मौत हो गई थी जब उनकी गाड़ी ऐसी ही बारूदी सुरंग के धमाके की चपेट में आ गई। इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) को सड़क में गहराई से खोदकर लगाया गया था, जिसे सुरक्षा बल अपनी सर्च डिवाइस की मदद से भी नहीं खोज सके। वरिष्ठ बीजेपी नेता मरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली अनुमान समिति ने सोमवार (19 मार्च) को संसद में ”केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां- मूल्यांकन और प्रतिक्रिया तंत्र” की एक रिपोर्ट रखी।

गृहमंत्रालय के एक प्रतिनिधि ने वामपंथ के चरमपंथ की चपेट वाले इलाकों में हिंसा को लेकर अनुमान समिति सामने साक्ष्य पेश रखते हुए कहा- ”वर्तमान में हम तकनीकी के द्वारा गहरी बारूदी सुरंगों का पता लगाने में सक्षम नहीं हैं। वे (उग्रवादी) अपने काम करने का ढंग भी बदलते रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद खुफिया और तकनीकी सहायता के साथ सोचा जाने योग्य बचाव किया जा पा रहा है।”

गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि ने आगे कहा- ”हमने सैन्य अधिकारियों को ट्रेनिंग और ऑपरेशन दोनों के लिए रखा है। लेकिन मुख्य बात यह है कि अगर हम इस महीने विचार करते हैं तो केवल तीन बम धमाके हुए। ऐसे दो मामलों में हम खोजी कुत्तों का इस्तेमाल कर रहे थे। पहले यह होता था कि धमाका करने के लिए बटन दबाया जाता था। आदमी जब माइन पर पैर रखता था तब धमाका होता था। आज यह हो रहा है कि अगर गुजरते समय हमारा कपड़ा भी फंस जाता है तो बारूदी सुरंग सक्रिय हो जाती है और धमाका हो जाता है।

वे बड़ी तेजी से अपने काम करन का ढंग बदलते रहते हैं और हम उनसे एक कदम आगे रहने की कोशिश कर रहे हैं।” समिति चाहती है कि मामले पर डीआरडीओ इस समस्या का हल निकालने के लिए नजर दौड़ाए।

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