चुनाव आयोग देशभर के कई राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया करवा रहा है। इसके तहत ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में टीचर्स की ड्यूटी लगाई गई है।
मुंबई में टीचर्स ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान उनके पर्सनल फोन नंबर को सार्वजनिक कर दिया गया है और इस वजह से उन्हें लगातार फोन आ रहे हैं।
टीचर्स की शिकायत है कि कई आम लोग और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता उन्हें लगातार फोन कॉल करते रहते हैं। उनकी चिंता यह भी है कि उनका फोन नंबर सभी लोगों के पास पहुंच गया है।
टीचर्स का कहना है कि पढ़ाने के साथ ही उन्हें चुनावी ड्यूटी करनी पड़ती है और अब उन्हें कई लोगों के फोन भी उठाने पड़ते हैं। इस वजह से उन्हें बेवजह का तनाव झेलना पड़ रहा है।
बिना पूछे शेयर कर दिया नंबर
टीचर्स ने आरोप लगाया कि उनके नंबर्स को बिना उनसे पूछे शेयर कर दिया गया और उन्हें एसआईआर की ड्यूटी के बाद भी लोगों के सवालों के जवाब देने पड़ते हैं।
एक टीचर ने कहा, “फोन दिन में कभी भी आ जाते हैं, स्कूल की ड्यूटी करने के बाद हमारे पास एसआईआर के काम के लिए कुछ घंटे होते हैं, इन फोन कॉल का जवाब देना भी एक बड़ा सिर दर्द है।”
टीचर्स का कहना है कि जैसे-जैसे एसआईआर की प्रक्रिया के काम में राजनीतिक दल जुट रहे हैं, कई इलाकों में बीएलओ के नाम के रूप में उनके नंबरों को बांट दिया गया है जिससे आम लोग उनसे संपर्क कर सकें।
आधी रात तक आते रहते हैं फोन
एक टीचर ने कहा, “फोन आने की कोई लिमिट नहीं है। मुझे सुबह 7 बजे से लेकर आधी रात तक फोन कॉल आती रहती हैं। लोग अपने खाली वक्त में कॉल करते हैं, वे यह भी नहीं समझते कि हम स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। यहां तक कि आधे दिन की छुट्टी में भी हमें बीएलओ का काम करने से पहले पढ़ाना होता है।”
कुछ टीचर्स ने कहा कि इन लगातार आने वाले फोन कॉल की वजह से उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे वह कॉल सेंटर के कर्मचारी हों। उन्होंने बताया कि किसी फोन कॉल का जवाब न देने पर उन्हें शिकायत करने की धमकी दी जाती है और ऐसा विशेष कर लोकल लेवल के नेता करते हैं।
शिक्षकों के संगठन शिक्षक सेना के कार्यकारी अध्यक्ष जलिंदर सरोडे कहते हैं कि एसआईआर की प्रक्रिया की वजह से टीचर्स पर बहुत ज्यादा दबाव डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया के साथ टीचर्स को पढ़ाने की जिम्मेदारी के अलावा एक और काम सौंपा गया है और यह बहुत तनाव देने वाला है।
सरोडे कहते हैं, टीचर्स की इजाजत के बिना ही उनके पर्सनल फोन नंबर फॉर्म पर छाप दिए गए, इससे 90% महिलाओं को सुबह से लेकर देर रात तक फोन कॉल आ रहे हैं। नेता और अन्य लोग लगातार पूछताछ करते हैं और इससे टीचर का मानसिक तनाव काफी बढ़ गया है और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा हुई है।
सरोडे ने चुनाव आयोग से मांग की है कि बीएलओ के रूप में काम करने वाले टीचर्स के निजी मोबाइल फोन नंबर देने के बजाय चुनाव आयोग को एक हेल्पलाइन शुरू करनी चाहिए।
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