झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में आई टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) का विवाद नया नहीं है। उत्तर प्रदेश में भी कंपनी पर भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और ‘भाई-भतीजावाद’ के आरोप लग चुके हैं। लखनऊ में कंपनी का कार्यालय सील मिलने और उसके निदेशकों के खिलाफ पुराने भर्ती मामले में कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आने के बाद टीडीपीएल की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठ रहे हैं।

टीडीपीएल वही परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी है, जिसके खिलाफ कथित अनियमितताओं का रिकॉर्ड सामने आया है और जिसके चलते झारखंड सरकार ने राज्य चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षाएं रद्द करने का फैसला किया। कंपनी का यह संदिग्ध रिकॉर्ड पड़ोसी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक फैला हुआ है, जहां उस पर कथित अनियमितताओं और ‘भाई-भतीजावाद’ के आरोप लगे थे।

2021-22 में टीडीपीएल उन तीन कंपनियों में से एक थी, जिन्हें उत्तर प्रदेश विधान सभा और विधान परिषद के सचिवालयों में प्रशासनिक पदों की 186 रिक्तियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करने का काम मिला था। नवंबर 2024 में द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में सामने आया कि इन नौकरियों में से पांचवां हिस्सा उन वीवीआईपी और अधिकारियों के रिश्तेदारों को मिला, जिनकी निगरानी में ये परीक्षाएं आयोजित की गई थीं – इनमें टीडीपीएल के निदेशकों राम बीर सिंह और सत्य पाल सिंह के कम से कम पांच रिश्तेदार भी शामिल थे।

पिछले महीने राम बीर और टीडीपीएल के प्रमुख कर्मचारियों को सरकारी भर्तियों के लिए आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही झारखंड पुलिस की सीआईडी ने गिरफ्तार किया था। सूत्रों ने बताया कि सत्य पाल के ठिकाने का पता नहीं है। टीडीपीएल ने मंगलवार को ईमेल के जरिए भेजे गए टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।

हाई कोर्ट ने टीडीपीएल अनियमितताओं को “चौंकाने वाला” बताया था

उत्तर प्रदेश के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने टीडीपीएल से जुड़ी अनियमितताओं को “चौंकाने वाला” बताया था और “ईमानदारी” तथा “भाई-भतीजावाद” को लेकर सवाल उठाए थे। अदालत ने सीबीआई जांच की मांग भी की थी।

हाई कोर्ट ने परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता की कमी को भी रेखांकित किया था। परीक्षा के परिणाम कभी सार्वजनिक नहीं किए गए, चयनित उम्मीदवारों की सूची का खुलासा नहीं किया गया और आवेदकों की कुल संख्या भी अब तक अज्ञात है। बाद में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच को रद्द कर दिया था, लेकिन यह मामला अभी भी हाई कोर्ट के समक्ष लंबित है।

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा में भर्ती का ठेका ब्रॉडकास्टिंग इंजीनियरिंग एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज (बीईसीआईएल) को दिया गया था। बीईसीआईएल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन केंद्र सरकार का सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। बीईसीआईएल ने भर्ती प्रक्रिया आयोजित करने के लिए टीडीपीएल को नियुक्त किया था।

उत्तर प्रदेश प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि हाई कोर्ट द्वारा विधानसभा भर्ती मामले पर सुनवाई शुरू किए जाने के बाद से कंपनी को परीक्षाएं आयोजित करने के लिए सरकार का कोई ठेका नहीं दिया गया है।

टीडीपीएल का कार्यालय सील मिला

मंगलवार को द इंडियन एक्सप्रेस ने लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे स्थित आदर्श कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर टीडीपीएल के उस “मुख्य कार्यालय” का दौरा किया, जिसका पता कंपनी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के रिकॉर्ड में दर्ज है। वहां दो कमरों का एक कार्यालय था, लेकिन वह सील मिला।

स्थानीय मड़ियांव थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर शिवानंद से संपर्क किए जाने पर उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले झारखंड पुलिस के पांच पुलिसकर्मी लखनऊ आए थे और उन्होंने टीडीपीएल के कार्यालय में तलाशी लेने के लिए सहायता मांगी थी।

शिवानंद ने कहा, “वे तलाशी वारंट लेकर आए थे और लखनऊ पुलिस ने कार्रवाई में उनकी सहायता की। झारखंड पुलिस ने परिसर की तलाशी ली और कार्यालय को सील कर दिया। उन्होंने कई दस्तावेज भी जब्त किए। जब तलाशी ली गई, उस समय कार्यालय का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था।”

आरओसी के रिकॉर्ड के अनुसार, टीडीपीएल की स्थापना जुलाई 2010 में राम बीर और सत्य पाल ने मोहम्मद तारिक के साथ मिलकर की थी। मोहम्मद तारिक 2013 में कंपनी से अलग हो गए थे।

29 अगस्त 2025 को कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2025 को समाप्त होने के संबंध में दाखिल की गई नवीनतम घोषणा के अनुसार, राम बीर सिंह और सत्य पाल ही कंपनी के दो प्रमोटर हैं। दोनों की कंपनी में 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसमें प्रत्येक के पास 5,000 इक्विटी शेयर हैं। कंपनी ने 965 कर्मचारियों का विवरण दिया है और घोषित किया है कि ये सभी पुरुष हैं।

आरओसी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2024-25 में टीडीपीएल का कुल “परिचालन से राजस्व” 19.62 करोड़ रुपये था, जबकि 2023-24 में यह 5.23 करोड़ रुपये था। 2024-25 में कंपनी का कर कटौती के बाद कुल लाभ 48.54 लाख रुपये था। कंपनी की अधिकृत पूंजी 16 लाख रुपये थी और आरओसी के रिकॉर्ड के अनुसार उसकी पिछली बोर्ड बैठक 15 फरवरी 2025 को हुई थी। 2024-25 में राम बीर और सत्य पाल, दोनों ने 18.60-18.60 लाख रुपये का वेतन लिया।

राम बीर और सत्य पाल चार अन्य कंपनियों में भी निदेशक हैं: स्माइलिंग डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, एलकेओ फूड एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, केएसआर इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीमलॉजिक्स इन्फोटेक लिमिटेड।

इस बीच, उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि राम बीर और सत्य पाल एक अलग भर्ती मामले में जमानत पर हैं। यह मामला विशेष जांच दल द्वारा दर्ज की गई मार्च 2021 की शिकायत पर आधारित है। विशेष जांच दल 2019 में ग्राम विकास अधिकारियों की भर्ती की जांच कर रहा था। रिकॉर्ड के मुताबिक, दोनों को 7 अप्रैल 2021 को गिरफ्तार किया गया था और उनके पास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी।

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के आरोपों के बीच अभ्यर्थियों ने जो विरोध प्रदर्शन शुरू किया था, वह इस संबंध में राज्य सरकार के फैसले के बाद एक तरह से अपने निष्कर्ष पर पहुंच गया लगता है। सरकार ने टीडीपीएल के संचालन में हुई झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया। यह प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की एक प्रमुख मांग थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक