टीसीएस के नासिक स्थित बीपीओ ऑफिस से जुड़े विवाद में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण कराने तथा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के प्रयास मामले में दो महिलाओं ने अपनी शिकायत पर केस दर्ज होने से कुछ ही दिन (हफ्ते से भी कम) पहले नौकरी छोड़ दी थी। यह जानकारी अब पूरे मामले को समझने में एक अहम कड़ी मानी जा रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों महिला कर्मचारियों ने अपने आरोपों के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज होने से कुछ दिन पहले इस्तीफा दिया था। इसके बाद उनकी शिकायतों पर रिपोर्ट दर्ज की गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या ऑफिस में ऐसा माहौल बन गया था, जिसकी वजह से उन्हें नौकरी छोड़ने का फैसला करना पड़ा। हालांकि, कंपनी ने इस पर सीधे तौर पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है और कहा है कि मामला जांच के अधीन है।
कंपनी की प्रतिक्रिया और जांच
टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन (K Krithivasan) ने पहले कहा था कि कंपनी को अपने एथिक्स या POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) सिस्टम के जरिए कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी। इस्तीफों के मुद्दे पर पूछे जाने पर कंपनी ने दोहराया कि वह पहले दिए गए बयान पर कायम है और जांच पूरी होने तक कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं करेगी।
कंपनी ने इस मामले की आंतरिक जांच के लिए डेलॉयट (Deloitte) और ट्राईलीगल (Trilegal) को स्वतंत्र सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है। यह जांच सीओओ आरती सुब्रमण्यम (Aarthi Subramanian) के नेतृत्व में चल रही है, जबकि एक निगरानी समिति भी बनाई गई है जिसकी अध्यक्षता केकी मिस्त्री (Keki Mistry) कर रहे हैं।
मामला कैसे शुरू हुआ
यह पूरा विवाद फरवरी में सामने आया, जब नासिक में एक युवती के माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करायी कि उनकी बेटी के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिख रहे हैं और वह तनाव में रहती है। युवती और उसके माता-पिता ने यौन उत्पीड़न, धर्मांतरण का प्रयास और धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और ऑफिस के अंदर की स्थिति समझने के लिए कुछ पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में तैनात किया गया।
रिपोर्ट और आरोप
मामले में पहली रिपोर्ट 26 मार्च को दर्ज की गई। इसमें एक कर्मचारी पर आरोप लगाया गया कि उसने शादी का झूठा वादा करके महिला के साथ संबंध बनाए और यह छुपाया कि वह पहले से शादीशुदा है। इसके बाद 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल 9 एफआईआर दर्ज की गईं और 8 लोगों को आरोपी बनाया गया। अभी तक आठ महिलाएँ और एक पुरुष मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। आरोपों में यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे मामले शामिल हैं। ज्यादातर आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस्तीफे का असर और पीड़ितों की स्थिति
जो महिलाएं इस मामले में शिकायतकर्ता हैं, उनके परिवार और परिचितों के अनुसार वे अवसाद, चिंता और सामाजिक अलगाव का सामना कर रही हैं। कुछ महिलाओं ने नौकरी छोड़ दी है और अब वे अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। इस्तीफों का यह पहलू जांच के दौरान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि शिकायत दर्ज होने से पहले कार्यस्थल का माहौल कैसा था। महिलाओं के इस्तीफे ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इन इस्तीफों के पीछे असली कारण क्या थे और क्या ऑफिस में किसी तरह का दबाव या उत्पीड़न का माहौल था, यह पुलिस और कंपनी की आंतरिक जांच के बाद ही साफ होगा।
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नासिक की एक कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले में टीसीएस के कर्मचारी दानिश एजाज शेख की अंतरिम अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge) वी.वी. कथारे ने मंगलवार को शेख की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के संबंध में अग्रिम जमानत की मांग की गई थी। न्यायाधीश ने पाया कि एफआईआर से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए जानबूझकर कृत्यों का संकेत मिलता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
