TATA संस के बोर्ड के एक्सचेंज पर कंपनी को लिस्ट करने के रिजर्व बैंक ऑफ इंडियान (RBI) के निर्देश को मानने का फैसला करने के 11 दिन बाद टाटा ट्रस्ट ने लिस्टिंग से बचने का तरीका निकाला है। टाटा ट्रस्ट ने अब एक स्टैटेजिक रीऑर्गनाइजेशन (रणनीतिक पुनर्गठन) का प्रस्ताव रखा है, इसका उद्देश्य यह है कि रीस्ट्रक्चर की गई कंपनी न तो NBFC हो और न ही कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC)।

टाटा संस बोर्ड को भेजे गए प्रस्ताव में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड (TSPL) के साथ विलय शामिल है। अगर इस कदम को मंजूरी मिलती है और इसे लागू किया जाता है तो इससे टाटा संस का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। साथ ही कंपनी उस रेगुलेटरी दायरे से भी बाहर आ सकेगी, जिसकी वजह से RBI ने उसे लिस्टिंग का निर्देश जारी किया था।

स्टैटेजिक रीऑर्गनाइजेशन नहीं बात नहीं- टाटा

टाटा ट्रस्ट्स के अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि TSPL के कारोबार और कामकाज में प्रस्तावित रणनीतिक पुनर्गठन कोई नई बात नहीं है। TSPL के 100 साल के अस्तित्व में से लगभग 80 सालों तक उसका अपना ऑपरेटिंग बिजनेस और ऑपरेटिंग रेवेन्यू रहा है, जिससे उसे अपने दूसरे, नए बिजनेस वेंचर्स के लिए फंड जुटाने में मदद मिली है।

टाटा संस से विचार करने को कहा

ट्रस्ट ने टाटा संस बोर्ड से कहा है कि वे इस प्रस्ताव पर विचार करें और इसे अपनी मंजूरी दें। साथ ही, प्रस्तावित मर्जर और री-ऑर्गनाइजेशन के लिए जरूरी ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) पाने के लिए RBI से संपर्क करने समेत सभी जरूरी कदम उठाएं। यह प्रस्ताव टाटा संस के लिए एक अहम मोड़ पर आया है। RBI ने कंपनी की उस अर्जी को ठुकरा दिया था जिसमें उसने ‘अपर-लेयर NBFC’ के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की थी; इस वजह से कंपनी के लिस्टिंग से जुड़ी रेगुलेटरी जरूरत बनी हुई है।

आरबीआई की मंजूरी भी होगी जरूरी

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की कुल 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा अब कंपनी को मौजूदा रूप में ही लिस्ट कराने के बजाय उसके मूल ढांचे में परिवर्तन करना चाहते हैं। प्रस्तावित मर्जर से दो ऑपरेटिंग बिजनेस सीधे टाटा संस के तहत आ जाएंगे, जिससे उसका ऑपरेटिंग-बिज़नेस वाला स्वरूप मजबूत होगा और पुनर्गठित इकाई का रेगुलेटरी कैटेगरी बदल जाएगा।

यह प्रस्ताव अब टाटा संस बोर्ड और अंततः RBI के पास है; प्रस्तावित पुनर्गठन के लिए RBI की मंजूरी जरूरी होगी।

एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाया गया

जानकारी दे दें कि 17 सितंबर को, एक बड़ा बदलाव करते हुए टाटा संस के बोर्ड ने एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पाँच साल और बढ़ाने को मंजूरी दी। साथ ही, RBI के नियमों का पालन करने के लिए पब्लिक लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने का अहम फैसला भी लिया।

हाल ही में 2004 तक, ग्रुप की टेक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) एक अलग सब्सिडियरी के तौर पर अलग होने से पहले TSPL का ही एक बिज़नेस डिवीज़न थी। TSPL के दूसरे ऑपरेटिंग बिजनेस के साथ भी ऐसा ही था। उन्होंने कहा, “इसके अनुसार, प्रस्तावित रीऑर्गनाइजेशन से TSPL अपने पुराने ऑपरेटिंग मॉडल पर वापस आ जाएगी, जिसमें टाटा ग्रुप के लिए होल्डिंग कंपनी होने के साथ-साथ उसके अपने ऑपरेशन्स और रेवेन्यू भी होंगे।”

यह RBI द्वारा TSPL को नॉन-बैंकिंग, नॉन-फाइनेंशियल कंपनी के तौर पर पहले (2004 के बाद) किए गए कैटेगरी के भी हिसाब से होगा। TESS और TCE के TSPL के साथ मर्जर से बनी नई कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 105043 करोड़ रुपये होगा, जो फाइनेंशियल एसेट्स से होने वाली उसकी इनकम (₹40,072 करोड़) से कहीं अधिक है; यह नई कंपनी की कुल इनकम का 64.3 प्रतिशत है।

रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर करना होगा

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि यह NBFC के मुख्य बिजनेस क्राइटेरिया (मुख्य बिजनेस की शर्तों) को पूरा नहीं करेगा और न ही यह CIC (कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी) पर लागू होने वाली शर्तों को पूरा करेगा (कुल एसेट्स 200,158 करोड़ रुपये, जिसमें से ग्रुप कंपनियों में इन्वेस्टमेंट 177,120 करोड़ रुपये होगा, जो बनने वाली एंटिटी के कुल नेट एसेट्स का 90 फीसदी से कम है)।

ट्रस्ट्स ने कहा कि असली ऑपरेटिंग, नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों (जैसे TESS और TCE) का NBFC (जैसे TSPL) के साथ विलय RBI (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज- वॉलंटरी अमलगमेशन) डायरेक्शंस, 2025 के नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए, जिसमें RBI से पहले ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) लेना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित रीऑर्गनाइजेशन (पुनर्गठन) पूरा होने पर TSPL एक CIC नहीं रहेगी, इसलिए उसे अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर करना होगा।

रेगुलेटरी नियमों के अनुसार और मान्य

टाटा ट्रस्ट्स के अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित रीऑर्गनाइजेशन और नियमों के पालन के लिए एक्शन प्लान टाटा ग्रुप और उसके स्टेकहोल्डर्स के हित में होगा, साथ ही यह CIC के रीऑर्गनाइजेशन का एक ऐसा तरीका होगा जो रेगुलेटरी नियमों के अनुसार और मान्य है।”

उन्होंने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स, TSPL के साथ मिलकर, प्रस्तावित रीऑर्गनाइजेशन के सभी पहलुओं पर RBI के साथ बातचीत करेगा। प्रस्तावित विलय और उसके बाद उठाए जाने वाले कदम रेगुलेटरी नियमों और जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के बोर्ड द्वारा सर्वसम्मति से पास किए गए प्रस्तावों के अनुरूप हैं, जिनमें यह तय किया गया था कि TSPL का अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी का स्टेटस बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश की जानी चाहिए।

बोर्ड के फैसले से टकराव की स्थिति

टाटा संस बोर्ड के फैसले से टकराव की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे एक तरफ टाटा संस बोर्ड और दूसरी तरफ टाटा ट्रस्ट्स और उसके चेयरमैन नोएल टाटा के बीच जबरदस्त कानूनी और कॉर्पोरेट लड़ाई शुरू हो गई है। नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया था और बोर्ड के वोट को कानूनी रूप से अमान्य घोषित कर दिया था। एक अलग बयान में, टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि चूंकि ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया था, इसलिए यह कानूनी रूप से अमान्य और बिना किसी आधार के हो गया।

कुल छह डायरेक्टरों में से चार ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के पक्ष में वोट दिया। नोएल टाटा अकेले ऐसे डायरेक्टर थे जिन्होंने इस फैसले का विरोध किया, जबकि चंद्रशेखरन ने वोट नहीं दिया।

इस मतभेद ने होल्डिंग कंपनी के कॉर्पोरेट मैनेजमेंट- बोर्ड और चेयरमैन और उसकी कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर, टाटा ट्रस्ट्स (जिसके पास टाटा संस में 66 प्रतिशत की निर्णायक हिस्सेदारी है) के बीच बढ़ती दरार को उजागर कर दिया है। टाटा ग्रुप के अंदरूनी लोग नोएल टाटा और टाटा संस बोर्ड के बीच बिगड़ते सत्ता संघर्ष की वजह से ग्रुप के परफॉर्मेंस पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि टाटा संस ही कैपिटल एलोकेशन और नए प्रोजेक्ट के प्रस्तावों को मंजूरी देती है।

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एन. चंद्रशेखरन को तीसरी बार टाटा संस के चेयरमैन बनाए जाने के बाद से टाटा संस बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद के बीच एक नया मामला सामने निकलकर आया है। दरअसल, एन. चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता चंद्रशेखरन और बेटे प्रणव से जुड़ी कंपनी Hanno One Warehousing का TVS Motor के साथ कारोबारी संबंध सामने आया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें