Bengal News: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान में टाटा नैनो का प्रोजेक्ट अहम फैक्टर साबित हुआ था। अब 18 साल बाद एक बार फिर बंगाल में टाटा का जिक्र होने लगा है। राज्य की नई बीजेपी सरकार के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता टाटा समूह को बंगाल में निवेश करने के लिए राजी करना है।
ममता बनर्जी की पार्टी के विरोध प्रदर्शन ने TATA को बंगाल के सिंगूर में अपनी नैनो परियोजना छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलनों का राजनीतिक लाभ उठाया और 2011 में बंगाल में सत्ता में आई।
उद्योग मंत्री बताया अपना लक्ष्य
ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर करने के लिए जो चुनावी अभियान चलाया था, उसमें राज्य में औद्योगीकरण की कमी एक अहम मुद्दा था। अब बीजेपी के सत्ता में आने के एक महीने बाद और अपना नया कार्यभार संभालने के कुछ ही घंटों बाद बंगाल के मंत्री ने औद्योगीकरण पर राज्य सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है।
तापस रॉय ने कहा, “बड़े उद्योगों को लाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए जो भी आवश्यक है, हमें वह करना होगा। पिछली सरकार के कार्यकाल में उद्योग और व्यवसाय बंगाल छोड़कर चले गए थे। उद्योग से बंगाल में रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।”
टाटा समूह को वापस लाना प्राथमिकता
तापस रॉय ने कहा, “हमारी प्राथमिकता टाटा समूह को वापस लाना है। देखिए सिंगूर का क्या हाल हुआ। जरूरत पड़ने पर मैं खुद जाकर उनसे मुलाकात करूंगा। हम उन्हें बंगाल लौटने के लिए मनाने की कोशिश करेंगे।” तापस रॉय पहले कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस में रह चुके हैं और ममता बनर्जी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने 2024 में बीजेपी ज्वाइन की थी।
टाटा से जुड़ा क्या है विवाद?
2006 के विधानसभा चुनाव में अपनी जीत के तुरंत बाद वाम मोर्चा सरकार ने घोषणा की कि टाटा मोटर्स सिंगूर में नैनो के निर्माण के लिए एक इकाई स्थापित करेगी। इसे उस समय 1 लाख रुपये की कार के रूप में प्रदर्शित किया गया था और इसके लिए लगभग 1,000 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी।
भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन राज्य सरकार अपने रुख पर अड़ी रही और टाटा समूह ने संयंत्र का निर्माण शुरू कर दिया। 2006 के अंत में ममता बनर्जी ने तत्कालीन बुद्धदेव भट्टाचार्य सरकार के खिलाफ उपजाऊ कृषि भूमि को बचाने के लिए एक अभियान शुरू किया। उन्होंने 26 दिनों का अनशन रखा जिसे समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला।
कुछ महीनों बाद मार्च 2007 में सिंगूर से लगभग 150 किलोमीटर दूर घटी घटनाओं की एक श्रृंखला ने नैनो संयंत्र का भविष्य तय कर दिया। 14 मार्च 2007 को नंदीग्राम में जहां एक रासायनिक केंद्र स्थापित होना था, भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए और पुलिस कार्रवाई में 14 लोगों की मौत हो गई। इस हिंसा ने ममता बनर्जी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन को गति दी और वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ माहौल को बदल दिया।
2008 में बंद हुआ था नैनो का प्रोजेक्ट
2008 में टाटा समूह ने सिंगूर में नैनो परियोजना को बंद कर दिया। तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए टाटा समूह को सानंद में अपना संयंत्र स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। अगले वर्ष पहली टाटा नैनो गुजरात संयंत्र से बनकर निकली।
टाटा समूह के बाहर निकलने के तीन साल बाद तृणमूल कांग्रेस ने 2011 के बंगाल चुनावों में शानदार जीत हासिल की, जिससे कम्युनिस्टों के तीन दशक के शासन का अंत हुआ और सिंगूर-नंदीग्राम का नारा इस जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तृणमूल कांग्रेस के आलोचकों का कहना है कि टाटा समूह के चले जाने से बंगाल की छवि पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ा और उद्योग वहां से दूर रहे।
2016 में सर्वोच्च न्यायालय ने अधिग्रहण प्रक्रिया को अवैध करार दिया और भूमि वापस कर दी गई, लेकिन बड़े भू-भाग अभी भी खेती योग्य नहीं हैं। ममता बनर्जी सरकार ने अनिच्छुक किसानों के रूप में वर्गीकृत 3,611 परिवारों को 2,000 रुपये और 16 किलो चावल प्रदान किए।
यह भी पढ़ें: ‘ये वाला दीजिए…’, NDA की बैठक में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पीएम मोदी को खिलाई झालमुड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में एनडीए की बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तरफ से परोसी गई झालमुड़ी खाई। एनडीए के शीर्ष नेता मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए। पढ़िए पूरी खबर…
