तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का विरोध किया जाएगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में शनिवार को हुई राज्य के राजनीतिक दलों की बैठक में यह फैसला लिया गया।

सीएम विजय के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन भी बैठक में शामिल हुए। बैठक से बड़ी संख्या में सांसद गैर हाजिर भी रहे।

तमिलनाडु में राज्यसभा और लोकसभा के कुल 57 सांसदों में से 37 सांसद इस बैठक में नहीं आए। बैठक में भाग लेने वाले 20 सांसदों में से कांग्रेस के 12 जबकि वीसीके, सीपीआई और सीपीआई (एम) के दो-दो सांसद और एमडीएमके और आईयूएमएल के एक-एक सांसद की मौजूदगी रही।

द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने किया बैठक का बहिष्कार

तमिलनाडु के मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अन्नाद्रमुक ने बैठक का बहिष्कार किया। द्रमुक ने बैठक की कार्यवाही को तमाशा बताया जबकि अन्नाद्रमुक ने इसे जल्दबाजी में किया गया नाटक बताया।

विधानसभा में प्रस्ताव पारित करेगी सरकार

बैठक के बाद विजय सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सांसदों ने मांग की कि लोकसभा और राज्यसभा के बीच सीटों का 2.2:1 का अनुपात बरकरार रखा जाना चाहिए। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि इस मुद्दे पर तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए राज्य की विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने सभी सांसदों और राजनीतिक दलों से तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र को प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को वापस लेना चाहिए क्योंकि इससे तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व और महत्व पर असर पड़ेगा।

तमिलनाडु की लोकसभा सीट में न हो बदलाव

बैठक के बाद कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि बैठक में परिसीमन कवायद का विरोध करने का फैसला किया गया है क्योंकि निर्वाचित निकायों में सांसदों की संख्या या संरचना में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ”लोकसभा में 543 सदस्यों की संख्या में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। इसी तरह, तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीट में भी किसी बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है।”

कानून मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार चुनाव में आसानी से जीत हासिल करने और चुनावी गणित को ध्यान में रखकर परिसीमन की पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को परिसीमन की कोई जरूरत नहीं है।

वीसीके ने भी कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाना चाहिए और लोकसभा सीटों की मौजूदा कुल संख्या 543 ही रहनी चाहिए। वीसीके ने कहा कि राज्यों के लिए सीटों का बंटवारा भी वैसा ही रहना चाहिए जैसा अभी है। इसका मतलब है कि अगर तमिलनाडु में 39 सांसद हैं, तो यह संख्या बनी रहनी चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि बड़ी संसद से लोकतंत्र की गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा। चिदंबरम ने कहा, ”हमारा रुख बिल्कुल साफ है कि लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 पर ही स्थिर रहनी चाहिए। यह संख्या स्थिर रहनी चाहिए और राज्यों के बीच सीट का बंटवारा भी उसी अनुपात में होना चाहिए जैसा अभी है।”

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