हेलिकॉप्टर हादसाः जाने कौन थे पायलट पृथ्वी सिंह चौहान, अकेले पड़ गए 75 साल के पिता

विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान को एक साल की विशेष ट्रेनिंग के लिए सूडान भी भेजा गया था। सूडान से ट्रेनिंग लेने के बाद उनकी गिनती वायुसेना के जांबाज पायलट में होती थी।

आगरा के रहने वाले विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान साल 2000 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे। (फोटो: ट्विटर/ OmveerYadavINC)

तमिलनाडु के कुन्नूर में वायुसेना के हेलिकॉप्टर MI-17 क्रैश होने की वजह से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत कुल 13 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में उत्तरप्रदेश के आगरा के रहने वाले विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान भी शामिल हैं। पृथ्वी सिंह चौहान ही एमआई-17 को उड़ा रहे थे।

आगरा के रहने वाले विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान बचपन से ही आसमान की ऊंचाइयों को छूना चाहते थे। विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सैनिक स्कूल से पढ़ाई की। वहीं से वे एनडीए के लिए चुने गए और बाद मे 2000 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए। वर्तमान में वे तमिलनाडु के कोयंबटूर में भारतीय वायु सेना स्टेशन पर तैनात थे। एयरफोर्स ज्‍वाइन करने के बाद विंग कमांडर पृथ्‍वी सिंह चौहान की पहली पोस्टिंग हैदराबाद में हुई थी। इसके बाद वे गोरखपुर, गुवाहाटी, ऊधमसिंह नगर, जामनगर, अंडमान निकोबार सहित अन्‍य एयरफोर्स स्टेशन पर भी तैनात रहे।

विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान को एक साल की विशेष ट्रेनिंग के लिए सूडान भी भेजा गया था। सूडान से ट्रेनिंग लेने के बाद उनकी गिनती वायुसेना के जांबाज पायलट में होती थी। पृथ्‍वी सिंह चौहान का विवाह वृंदावन निवासी कामिनी सिंह से 2007 में हुआ था। उनकी 12 वर्षीय बेटी आराध्‍या और नौ वर्षीय बेटा अविराज है। पृथ्वी सिंह चौहान पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे।

हेलिकॉप्टर क्रैश में विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान की मौत खबर आने के बाद से आसपास पड़ोस के लोग और रिश्तेदार उनके परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। विंग कमांडर की मौत से उनके 75 वर्षीय पिता अकेले पड़ गए हैं। विंग कमांडर चौहान का परिवार 2006 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर से आगरा आ गया था और उनके पिता सुरेंद्र सिंह ने यहां बेकरी का काम शुरू किया।

सुरेंद्र सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि हमें हमारे बेटे की मौत की सूचना समाचार चैनलों से मिली। उनकी सबसे बड़ी बेटी ने टीवी पर हेलिकॉप्टर क्रैश की खबर देखी तो अपने भाई पृथ्वी के नंबर पर कॉल किया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। उसके बाद उसने पृथ्वी की पत्नी कामिनी सिंह को फोन किया तो उन्होंने उनके शहीद होने की जानकारी दी।

सुरेंद्र सिंह ने अपने बेटे को याद करते हुए कहा कि वह हमेशा हमारा कुशल क्षेम लिया करता था। उसने सालों बाद अपनी तीन बहनों के साथ पिछले साल रक्षाबंधन मनाया था, लेकिन उसकी बड़ी बहन रक्षाबंधन पर नहीं आ पाई थी क्योंकि वह मुंबई में रहती है। उन्होंने कहा कि मैंने पृथ्वी से तीन-चार दिन पहले बात की थी। उसकी मां की नजर कमजोर हो गई है और पृथ्वी ने अपनी मां की सेना के अस्पताल में जांच के लिए समय लिया था। अपने बेटे के निधन से मां सुशीला देवी का हाल बुरा है। सुशीला देवी की चीत्कार सुनकर वहां मौजूद लोगों का भी कलेजा फट जा रहा है।

हेलिकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी शहीदों का पार्थिव शरीर गुरुवार की शाम तक एयरफ़ोर्स के प्लेन से दिल्ली लाया जाएगा। शुक्रवार को सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी का अंतिम संस्कार किया जाएगा। साथ ही शहीद हुए सभी जवानों का अंतिम संस्कार भी सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा।

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