ताज़ा खबर
 

चेन्नई में मात्र 0.19 फीसदी बचा पानी, आपका भी शहर जल संकट से ज्यादा दूर नहीं, इन समस्याओं पर नहीं किसी का ध्यान

मार्च-अप्रैल में कई मीडिया रिपोर्ट्स आई थीं, जिनमें सरकार द्वारा जलाशयों की सफाई कराने के निर्देश दिए गए थे, पर असल में हालात जस के तस ही रहे।

Author नई दिल्ली | June 21, 2019 5:12 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः नरेंद्र कुमार)

देश में जल संकट दिनों-दिन गहराता जा रहा है। ताजा और आंखें खोलने वाला नमूना तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई का है। वहां महज 0.19 फीसदी पानी बचा है। यही वजह है कि वहां पिछले 30 सालों में अब तक सबसे भीषण पानी की किल्लत देखने को मिली है। जलाशय गंदे हैं और उनमें जल स्तर भारी मात्रा में गिरा है। झीलें भी सूख रही हैं। नतीजतन शहर में भी पानी को लेकर हाहाकार मचना शुरू हो गई हैं। कई कंपनियों तक ने अपने कर्मचारियों को पानी न होने के चलते दफ्तर के बजाय घर से काम करने की सलाह दे डाली। वहीं, स्कूलों में भी बच्चों को घर से पानी लेकर जाना पड़ रहा है। ऊपर से करीब 200 दिनों से लगातार पानी की एक बूंद भी न गिरी थी। हालांकि, गुरुवार (20 जून, 2019) को बारिश हुई, पर वह नाकाफी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (21 जून, 2019) को चेन्नई के चार जलाशयों में महज 0.19 फीसदी पानी बचा, जबकि इस साल की भीषण गर्मी के दौरान जलस्तर लगभग 300 फुट कम हो गया। इसी बीच, मांग बढ़ने की वजह से बोरवेल इंस्टॉल कराने का खर्च भी महंगा हुआ, जिसमें तकरीबन 150 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

चेन्नई मेट्रोपॉलिटन वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (सीएमडब्ल्यूएसएसबी) से जुड़े सूत्रों ने बताया कि शहर के मुख्य जलाशय की लगभग 10 साल से सफाई (काई और गाद हटाने का काम) नहीं हुई है। वहीं, दिसंबर 2018 में सूचना के अधिकार (आरटीआई) से पता लगा कि जलाशय की सफाई से सतही जल के स्तर में करीब दो हजार मिलियन क्यूबिक फुट बढ़ोतरी की संभावना जताई गई थी। साथ ही यह भी मालूम चला कि जलाशय में नीचे जमी काई, गाद और कीचड़ के कारण जलस्तर और उसकी गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ा था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जलाशयों की सफाई से बाढ़ की घटनाओं में कमी आती है व पानी के जल निकायों की क्षमता में इजाफा होता है। सीएमडब्ल्यूएसएसबी में वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आखिरी बार जलाशयों की सफाई 2008 में हुई थी और तब चार में से केवल दो ही जलाशय साफ कराए गए थे। जलाशय की सफाई आमतौर पर उनके सूखने पर होती है। मोटा-मोटी ये काम तीन से चार साल के अंतराल पर होता है, पर इसे निरंतर किया जाना चाहिए।

वैसे, मार्च-अप्रैल में कई मीडिया रिपोर्ट्स आई थीं, जिनमें सरकार द्वारा जलाशयों की सफाई कराने के निर्देश दिए गए थे, पर असल में हालात जस के तस ही रहे। लोक निर्माण विभाग के सूत्र के हवाले से कहा गया कि जलाशय की सफाई पूरी कराने में तीन और महीने लगेंगे।

चेन्नई के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी शहरों में पानी की किल्लत बढ़ रही है। कुछ जगहों पर तो पानी न होने के चलते लोगों को पीने के साथ नहाने और कपड़े धोने के लिए भी बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है, जबकि जहां पानी है, वहां उसकी गुणवत्ता को लेकर समस्या बनी हुई है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App