मदुरै की अदालत ने सोमवार को 2020 में सथानकुलम में पिता-पुत्र जयराज और बेनिक्स की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दोषी पाए गए सभी नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई। जज जी मुथुकुमारन ने कहा कि यह एक दुर्लभ मामला है जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाध्य पुलिस अधिकारियों ने खुद कानून का उल्लंघन किया और पिता-पुत्र पर बेरहमी से हमला किया। इसके अलावा कोर्ट ने अधिकारियों को मृतक के परिवार को कुल 1.40 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
पीड़ित के परिवार के सदस्यों ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। एक सदस्य ने कहा, “अदालत ने हमारे मामले में न्याय दिलाया है। हमने अदालत पर पूरा भरोसा किया था। अब से किसी और परिवार को हमारी तरह पीड़ा न सहनी पड़े। हमने इतना लंबा संघर्ष सिर्फ इसलिए किया है ताकि कोई और परिवार इस तरह के दर्द से न गुजरे। हम आशा करते हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा कभी नहीं होंगी।”
घटना वाले दिन क्या हुआ था?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 जून 2020 को जयराज को कथित तौर पर कोविड-19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बताया जाता है कि 18 जून, 2020 की रात को, जब पास की एक दुकान में कुछ मजदूर अपनी मजदूरी का इंतजार कर रहे थे, तब पुलिस ने उनके साथ गाली-गलौज की और वहां से चले जाने को कहा। जयराज ने मजदूरों से इस गाली-गलौज के बारे में सुना और उनसे कुछ मिनट और रुकने को कहा। यह जानकारी एक पुलिस कांस्टेबल ने अपने साथियों को दी।
अगले दिन शाम को पुलिस जयराज को दुकान से ले गई। यह देखकर बेनिक्स सथानकुलम पुलिस स्टेशन पहुंचे और पुलिस से अपने पिता को रिहा करने की अपील की। थाने में पुलिसकर्मियों ने जयराज के साथ बुरा बर्ताव किया। बेनिक्स ने इसका विरोध किया। बाद में, पुलिसकर्मियों ने उन दोनों को पूरी रात थाने में प्रताड़ित किया। उन्हें गंभीर चोटें आईं।
उन्हें पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया। परिवार को बताया गया कि पिता और पुत्र को अगली सुबह छोड़ दिया जाएगा। परिवार को नए कपड़े लाने के लिए कहा गया। हालांकि, 20 जून 2020 को दोनों को मेडिकल के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया। उनके खून से सने कपड़े बदले गए। इसके बाद, उन्हें सथानकुलम न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्हें कोविलपट्टी की जेल में रखा गया।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा होने के बाद पिता और पुत्र को कोविलपट्टी सरकारी अस्पताल ले जाया गया। 22 जून 2020 को बेनिक्स की ब्लीडिंग कंट्रोल से बाहर हो गई और वे बेहोश हो गए। अस्पताल में उनकी मौत हो गई। 23 जून 2020 को, जयराज ने सीने में दर्द की शिकायत की। उनकी भी अस्पताल में मौत हो गई। व्यापारियों की मृत्यु के कारण बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।
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मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के निर्देश
24 जून 2020 को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस पी एन प्रकाश (अब रिटायर्ड) और बी. पुगलेंधी की बेंच ने हिरासत में यातना और मौत के मामले में संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की। न्यायालय ने कहा कि वह मामले की निगरानी करेगा और जनता से शांति बनाए रखने का आग्रह किया। कोर्ट ने न्यायिक जांच का आदेश दिया।
हाई कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू करने के बावजूद, तत्कालीन सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। न्यायालय ने सीबीआई द्वारा औपचारिक रूप से जांच अपने हाथ में लिए जाने तक सीबीआई-सीआईडी को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया।
कोविलपट्टी के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक रिपोर्ट में हाई कोर्ट को बताया कि सथानकुलम पुलिस ने जांच में सहयोग नहीं किया और डराने-धमकाने वाला माहौल बनाने की कोशिश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में कदम रखते ही पुलिस अधिकारियों ने मजिस्ट्रेट की उपस्थिति को नजरअंदाज कर दिया और उदासीन रवैया दिखाया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सीसीटीवी सिस्टम में पर्याप्त स्टोरेज स्पेस होने के बावजूद घटना वाले दिन का कोई फुटेज उपलब्ध नहीं था। हालांकि, एक महिला पुलिस कांस्टेबल ने खुलासा किया कि व्यापारियों को पूरी रात प्रताड़ित किया गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने थूथुकुडी कलेक्टर को राजस्व अधिकारियों को पुलिस स्टेशन का कंट्रोल लेने और संबंधित सामग्री को सुरक्षित करने के लिए नियुक्त करने का निर्देश दिया। फोरेंसिक टीम को भी सबूत इकट्ठा करने का निर्देश दिया गया ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके और सीबीआई को सौंपा जा सके।
हाई कोर्ट ने कोविलपट्टी न्यायिक मजिस्ट्रेट के साथ जांच के दौरान सहयोग न करने के लिए तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की। पुलिसकर्मियों द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के बाद अवमानना की कार्यवाही बाद में बंद कर दी गई।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने हेड कांस्टेबल एस. रेवती से भी बात की, जिन्होंने हिरासत में हुई यातनाओं का खुलासा किया। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें सुरक्षा भी दी जाए। अदालत ने महिला हेड कांस्टेबल के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और न्यायिक मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए, हिरासत में हुई मौतों में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने के लिए सबूत पाए।
सीबीआई की चार्जशीट में क्या खुलासा हुआ?
सीबीआई ने 25 सितंबर, 2020 को आरोप पत्र और 12 अगस्त, 2022 को मदुरै के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पूरक आरोप पत्र पेश किया। सीबीआई ने तत्कालीन इंस्पेक्टर एस. श्रीधर; सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन; हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन और ए. सामीदुरई और कांस्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस और एस. वेलुमुथु के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। इस मामले में आरोपी स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई की कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद मौत हो गई।
सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में कहा है कि जयराज और बेनिक्स को पुलिसकर्मियों द्वारा बेरहमी से प्रताड़ित किया गया था। जांच के दौरान यह पता चला कि व्यापारियों ने कोविड-19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन नहीं किया था, जिसके आरोप में उन्हें हिरासत में लिया गया था।
सीबीआई ने कहा कि जांच में पता चला है कि जयराज को 19 जून, 2020 को शाम 7.30 बजे कामराज प्रतिमा के पास स्थित उनकी दुकान से उठाया गया और आरोपियों द्वारा रची गई आपराधिक साजिश के तहत सथानकुलम पुलिस स्टेशन में रखा गया। सूचना मिलते ही बेनिक्स अपने पिता की गिरफ्तारी के बारे में पूछताछ करने के लिए थाने पहुंचा। उसने अपने पिता की पिटाई का विरोध किया। कहासुनी के बाद, दोनों को गलत तरीके से पुलिस स्टेशन में बंद कर दिया गया और पुलिस के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, यह सबक सिखाने के लिए उनकी जमकर पिटाई की गई। यह यातना रात भर कई घंटों तक जारी रही।
जयराज और बेनिक्स को अपने घावों से खून साफ करने के लिए मजबूर किया गया। अगली सुबह, सबूत मिटाने के लिए सथानकुलम पुलिस स्टेशन के एक सफाईकर्मी से फर्श पर फैला खून साफ करवाया गया। सीबीआई ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने दोनों के खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया था।
खून से सने कपड़े सरकारी अस्पताल के कूड़ेदान में फेंक दिए गए। जयराज और बेनिक्स को जब मेडिकल ऑफिसर के समक्ष पेश किया गया तो वे लंगड़ा रहे थे और ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे थे। बाद में उन्हें हिरासत के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। कोविलपट्टी जेल में दोनों की तबीयत बिगड़ गई और बाद में कोविलपट्टी सरकारी अस्पताल में चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।
मुकदमे की सुनवाई पूरी करने के लिए कई बार समय सीमा क्यों बढ़ाई गई?
जयराज की पत्नी और बेनिक्स की मां जे. सेल्वाराणी की तरफ से दायर याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने मार्च 2021 में निचली अदालत को छह महीने के भीतर मुकदमे को पूरा करने का निर्देश दिया। हालांकि, कई मौकों पर हाई कोर्ट ने निचली अदालत को मुकदमे की सुनवाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया।
जून 2025 में मुख्य आरोपी द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को सूचित किया गया कि आरोपी ने खुद मुकदमे में भाग लिया था और कई सुनवाईयों के दौरान गवाहों से लंबी जिरह की थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट से 16 अक्टूबर 2023 से 2 फरवरी 2024 तक 26 सुनवाईयों में जिरह की गई और जांच अधिकारी से 27 मार्च, 2024 से 26 सितंबर, 2024 तक 21 सुनवाईयों में जिरह की गई। हाई कोर्ट को बताया गया कि इसका उद्देश्य कार्यवाही में देरी करना और निचली अदालत को मामले का निपटारा करने से रोकना था।
आरोपियों की तरफ से दायर की गईं कई जमानत याचिकाएं हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थीं। आरोपी मदुरै सेंट्रल जेल में बंद हैं। मुख्य आरोपी श्रीधर ने भी ट्रायल कोर्ट में सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन दायर किया था। यह आवेदन खारिज कर दिया गया। सेल्वाराणी ने आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मुकदमे में देरी करना है।
सीबीआई ने भी याचिका का विरोध करते हुए कहा कि श्रीधर मुख्य षड्यंत्रकारी और प्रमुख आरोपी था। आरोप है कि जब वह सथानकुलम पुलिस स्टेशन का स्टेशन हाउस ऑफिसर था, तब श्रीधर के इशारे पर जयराज और बेनिक्स को प्रताड़ित किया गया था।
निचली अदालत ने क्या कहा है?
मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (First Additional District and Sessions Court) ने 23 मार्च, 2026 को इस मामले में आरोपी सभी नौ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया। न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने पुलिसकर्मियों को हत्या और आईपीसी के तहत अन्य अपराधों का दोषी पाया। न्यायाधीश ने पुलिसकर्मियों की स्वास्थ्य स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। मदुरै सेंट्रल जेल के सुपरिटेंडेंट को आरोपियों को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया। फिर ट्रायल कोर्ट ने 6 अप्रैल को सभी नौ दोषी पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई।
ऑलिव रिडले कछुओं की बढ़ती मौतों पर NGT चिंतित
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने तमिलनाडु तट पर ओलिव रिडले कछुओं (Olive Ridley Turtles) की मौत की बढ़ती संख्या को लेकर संज्ञान लिया है। एनजीटी ने इसको लेकर राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य उपायों को सख्ती से लागू करने को कहा है। पढ़ें पूरी खबर…
