तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सियासी भूचाल आने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा कि एआईएडीएमके के कई विधायक अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे सकते हैं। साथ ही वे टीवीके में शामिल हो सकते हैं। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी TVK गुप्त तरीके से हुई एक कवायद और तेज हो गई है। विजय की पार्टी के अंदरूनी लोग इस कवायद को अनौपचारिक रूप से “ऑपरेशन L” कह रहे हैं।

टीवीके नेताओं और बागी एआईएडीएमके विधायकों के बीच चल रही बातचीत से जुड़े कई सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी पार्टी के करीब 10 विधायक 15 अगस्त से पहले अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे सकते हैं।

स्वतंत्रता दिवस से पहले पार्टी में शामिल होंगे विधायक

बातचीत में शामिल एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह प्रक्रिया काफी हद तक स्वतंत्रता दिवस से पहले पूरी हो जाएगी। इसका मकसद उपचुनावों का कार्यक्रम शुरू होने से पहले राजनीतिक मकसद उपचुनावों का कार्यक्रम शुरू होने से पहले राजनीतिक बदलाव की प्रक्रिया को पूरा करना है।”

पिछले कुछ हफ्तों में लगातार इस्तीफे हुए हैं और यह उसी सिलसिले का नया दौर है। मई में पार्टी के व्हिप को न मानते हुए सरकार बनाने की विजय की कोशिश का समर्थन करने वाले एआईएडीएमके के 25 विधायकों में से करीब आधे या तो टीवीके में शामिल हो चुके हैं या शायद आने वाले दिनों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।

जानकारी दे दें कि 234 विधानसभा सीट के मद्देनजर राज्य में भी सात सीटें खाली हैं, जिससे इसकी संख्या घटकर 227 रह गई है। टीवीके की मौजूदा संख्या 107 है।

हाल में ये मंत्री टीवीके से जुड़े

एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर और एम.आर. विजयभास्कर ने हाल ही में विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद टीवीके ज्वाइन किया। साथ ही पूर्व मंत्री एम.एस.एम आनंदन, एस. वलारमथी और कई पूर्व विधायक व जिला स्तरीय पदाधिकारी भी शामिल हुए।

इससे पहले, एआईएडीएमके के चार विधायकों ने इस्तीफा देकर टीवीके का दामन थामा था। इससे विपक्ष की संख्या बल कम हुआ, जबकि सत्ताधारी पार्टी बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंची और अलग-अलग जिलों में उसका संगठन भी मजबूत हुआ।

अगस्त की शुरुआत तक होंगे टीवीके में शामिल

इस पर वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अगले दौर में एआईएडीएमके के असरदार नेताओं जैसे एसपी वेलुमनी और सी वे शनमुगम से जुड़े विधायक शामिल हो सकते हैं। दोनों नेताओं को पार्टी का सबसे मजबूत क्षेत्रीय पावर सेंटर माना जाता है। टीवीके व एआईएडीएमके के सूत्रों के मुताबिक, उम्मीद है कि ये दोनों नेता खुद भी जुलाई के आखिर या अगस्त की शुरुआत में टीवीके में शामिल हो जाएंगे।

सूत्रों ने बताया कि बातचीत सिर्फ पार्टी बदलने तक ही सीमित नहीं है। जो विधायक अपनी विधानसभा सीट छोड़ना चाहते हैं, उन्हें टीवीके के टिकट पर होने वाले उपचुनावों में दोबारा चुनाव लड़ने का मौका देने का भरोसा दिलाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ नेताओं से वादा किया गया है कि दोबारा चुने जाने पर उन्हें कैबिनेट में जगह दी जाएगी, जबकि दूसरों को टीवीके में जिला सचिव और पदाधिकारी बनाया जा सकता है।

एआईएडीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह पार्टी छोड़ने का सिलसिला अचानक पैदा हुए राजनीतिक मौके का फायदा उठाने की कोशिश नहीं बल्कि सालों की निराशा का नतीजा है। नेता ने कहा, “एडप्पादी पलानीस्वामी की इच्छा थी कि वे आखिरी दिन तक जनरल सेक्रेटरी बने रहें। हममें से कई लोगों ने जिला सचिव का पद छिनने के बाद भी इंतजार किया। संकट को सुलझाने की कोई सार्थक कोशिश नहीं की गई है।” इस नेता के बारे में कहा जा रहा कि वह पाला बदलने की तैयारी में हैं।

एआईएडीएमके के पास कितने विधायक अभी?

AIADMK के कई नेताओं ने कहा कि बड़े नेताओं, खासकर वेलुमनी के वफादार जिला सचिवों को हटाए जाने से पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ गया। लगातार इस्तीफों के बाद AIADMK के पास अब सिर्फ 41 विधायक बचे हैं और TVK लगातार अपनी ताकत बढ़ा रही है, इसलिए कई विधायकों को डर है कि अगर वे कमज़ोर होती AIADMK में बने रहे, तो उनके चुनावी भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा सकते हैं।

फिर भी, राजनीतिक गणित कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है। विपक्ष के नेताओं ने बार-बार आरोप लगाया है कि पार्टी बदलने के इस सिलसिले के साथ भारी-भरकम आर्थिक प्रलोभन भी जुड़े हैं। कुछ पूर्व मंत्रियों के लिए, TVK में शामिल होने से भ्रष्टाचार के लंबित मामलों की जांच से जुड़े राजनीतिक हालात भी बदल सकते हैं। TVK ने नेताओं की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) के आरोपों को खारिज किया है।

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तमिलनाडु की राजनीति में गुरुवार (2 जुलाई 2026) को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) के चार पूर्व मंत्री, कई पूर्व विधायक और हजारों कार्यकर्ता सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) में शामिल हो गए। इसे 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद का सबसे बड़ा राजनीतिक दल-बदल माना जा रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें