तमिलनाडु में पिछले 7 साल से कांग्रेस और डीएमके के बीच गठबंधन है लेकिन अब इसकी परीक्षा का समय आ गया है। कांग्रेस सांसद बी मणिकम टैगोर ने मदुरै जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) की बैठक में डीएमके पर तीखा हमला किया। ऐसे में अब गठबंधन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बैठक में सत्ता में हिस्सेदारी की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया गया। हालांकि स्टालिन ने कुछ दिन पहले ही सार्वजनिक रूप से सत्ता में हिस्सेदारी देने से इनकार कर दिया था।
मणिकम टैगोर ने क्या कहा था?
मणिकम टैगोर ने यूपीए की 2014 की हार का जिक्र करते हुए कहा, “जब डीएमके के जिला सचिव अपमानजनक ढंग से पूछते हैं कि क्या कांग्रेस के पास बूथों को संभालने के लिए पर्याप्त कार्यकर्ता हैं, तो यह एक समस्या बन जाती है। हमने आपकी गलतियों का बोझ उठाया और जवाब दिया। हमारे नेता राहुल गांधी मुख्यमंत्री एम के स्टालिन को अपना ‘बड़ा भाई’ कहते हैं। वे आम कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी यही सम्मान चाहते हैं।”
कांग्रेस के कई सूत्रों का कहना है कि यह तनाव राष्ट्रीय नेतृत्व के भीतर चल रही खटपट के कारण है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के प्रमुख के. सेल्वपेरुंथगई को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का करीबी माना जाता है। वहीं मणिकम टैगोर को कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल का करीबी माना जाता है।
क्या बना रहेगा गठबंधन?
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि सीटों की संख्या पर बातचीत अभी जारी है, लेकिन डीएमके सांसद कनिमोझी की राहुल गांधी से मुलाकात के बाद व्यापक गठबंधन का फैसला लगभग तय हो चुका था। हालांकि असहमति जारी रही। डीएमके के भीतर भी बेचैनी कई स्तरों पर है। नेताओं को याद है कि जब के चंद्रशेखर राव, ममता बनर्जी और नीतीश कुमार जैसे क्षेत्रीय नेताओं ने तीसरे मोर्चे की शुरुआत की, तब डीएमके कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ी रही। 2019 में स्टालिन ने सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तावित किया था। 2024 में गठबंधन के तहत कांग्रेस के अपेक्षाकृत नए चेहरों को मैदान में उतारा गया और उन्होंने बड़े अंतर से जीत हासिल की। एक डीएमके मंत्री ने बताया, “राष्ट्रीय पार्टी के लिए डीएमके गठबंधन में सफलता दर सबसे अधिक थी।”
इतिहास भी यही कहता है। तमिलनाडु में आखिरी बार कांग्रेस ने साल 2014 में अकेले चुनाव लड़ा था। उस समय उसका वोट शेयर लगभग 4.3 प्रतिशत था। यही कारण है कि कांग्रेस के भीतर मणिकम टैगोर के आलोचक उनकी रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं। डीएमके में नेता कहते हैं कि वे कोई फूट नहीं डालना चाहते। वे मानते हैं कि कांग्रेस के बाहर निकलने से उनके मूल मतदाता आधार में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। लेकिन धारणा मायने रखती है।
कांग्रेस नेताओं के एक समूह ने घटनाक्रम पर अपनी निराशा व्यक्त की। प्रदेश के एक नेता ने कहा, “हालात बेकाबू हो गए हैं। चुनाव अधिसूचना से कुछ ही सप्ताह पहले हम सहयोगी दल पर हमला नहीं कर सकते।” सूत्रों के अनुसार डीएमके ने कुछ कांग्रेस नेताओं को बता दिया है कि जब तक दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से यह स्पष्टीकरण नहीं मिलता कि मणिकम टैगोर की टिप्पणियों को राहुल गांधी की मंजूरी मिली थी या नहीं, तब तक वह सीट बंटवारे पर चर्चा के लिए बैठक नहीं करेगी। वहीं मणिकम टैगोर ने कहा कि वह डीएमके के कुछ मंत्रियों के सार्वजनिक बयानों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे और कांग्रेस चाहती है कि इंडिया गठबंधन बना रहे। उन्होंने इस बात को भी खारिज कर दिया कि उनके बयानों को राहुल गांधी की सहमति मिली थी। पढ़ें कांग्रेस-डीएमके के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर तनातनी
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