बीते 10 से 12 सालों में कई ऐसे राज्यों में बीजेपी ने सफलता हासिल की, जहां उसका सफर काफी मुश्किलों भरा रहा। हालांकि तमिलनाडु अभी भी एक ऐसा राज्य है, जहां पर बीजेपी अपना विस्तार नहीं कर पा रही है। कुछ दिन पहले ही भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने पार्टी छोड़ दी। अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने के बाद से ही बीजेपी के भविष्य को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।

2026 में कैसा रहा बीजेपी प्रदर्शन?

जब से केंद्र में मोदी सरकार सत्ता में आई है, उसके बाद से ही बीजेपी तमिलनाडु में विस्तार की खूब कोशिश कर रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु में जनता ने द्रविड़ पार्टियों को सत्ता से बाहर किया और एक नई पार्टी टीवीके को सत्ता में लाया। 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एआईएडीएमके, तमिल मनिला कांग्रेस और तमिलगा मक्कल मुन्नेत्र कषगम के साथ मिलकर लड़ा। बीजेपी ने कुल 33 सीटों पर चुनाव लड़ा। बीजेपी को 2.97% वोट मिले और उसे सिर्फ एक सीट पर जीत मिली।

पहली बार 1996 में मिली थी सफलता

बीजेपी 1980 से चुनाव लड़ रही है। हालांकि उसे पहली बार तमिलनाडु में सफलता 1996 के विधानसभा चुनाव में मिली। 1996 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बिना किसी बड़ी पार्टियों से गठबंधन किए एक विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। सी. वेलायुथन पार्टी के पहले विधायक बने थे। उन्होंने उस डीएमके की लहर के बावजूद 4,540 वोटों से जीत दर्ज की थी। वहीं पार्टी ने कन्याकुमारी जिले की नागरकोइल, कोलाचेल और किल्लूर की सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी।

कन्याकुमारी क्षेत्र बीजेपी का मजबूत क्षेत्र माना जाता है। पार्टी यहां पर अच्छा वोट प्रतिशत हासिल करती है। इसके बाद बीजेपी ने गठबंधन की राजनीति का सहारा लिया। उसने एआईएडीएमके और डीएमके के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा। 1998 के लोकसभा चुनाव में वह एआईएडीएमके जबकि 1999 में डीएमके के साथ चुनाव मैदान में उतरी।

2001 में बीजेपी के जीते 4 विधायक

साल 2001 में बीजेपी ने डीएमके के साथ मिलकर तमिलनाडु में 21 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 3.19% वोट हासिल हुए थे। विधानसभा चुनाव में पार्टी के चार उम्मीदवार जीत कर तमिलनाडु विधानसभा में पहुंचे। यह बीजेपी की विधानसभा के हिसाब से अब तक की सबसे बड़ी जीत थी।

इसके बाद साल 2006 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अकेले तमिलनाडु के मैदान में उतरी और उसने 225 सीटों पर चुनाव लड़ा। हालांकि पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, उसे एक भी सीट पर जीत नहीं मिली और 221 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई। 2011 और 2016 के चुनाव में भी उसने अकेले चुनाव लड़ा और अपना खाता भी नहीं खोल सकी।

2021 में 10 साल बाद खुला खाता

2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर से गठबंधन का सहारा लिया और एआईएडीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। उसने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और इस बार फिर से उसके चार विधायक जीते। इनमे तिरुनेलवेली से बीजेपी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन, नागरकोइल से एम.आर. गांधी, कोयंबटूर सेवनथी श्रीनिवासन और मोदकुरिची से सी. सरस्वती ने जीत दर्ज की। बीजेपी को 2.62% वोट मिले थे।

1999 में 4 लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने दर्ज की थी जीत

अगर हम लोकसभा चुनाव की बात करें तब उस हिसाब से बीजेपी का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1999 के चुनाव में रहा था। तब पार्टी डीएमके साथ गठबंधन में थी और उसने चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने एआईएडीएमके के साथ गठबंधन किया था और तीन सीटें जीती थी। इसके बाद 2004 और 2009 में पार्टी को सफलता नहीं मिली। हालांकि 2014 के चुनाव में बीजेपी ने छोटे दलों के साथ गठबंधन कर कन्याकुमारी लोकसभा सीट पर जीत हासिल की थी।

2019 का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने एआईएडीएमके और छोटे दलों के साथ गठबंधन में लड़ा था। इस चुनाव में बीजेपी 5 सीटों पर लड़ी लेकिन उसे एक भी सीट पर सफलता नहीं मिल पाई। पार्टी अपना गढ़ कन्याकुमारी लोकसभा सीट भी हार गई।

2024 में क्या हुआ?

2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी तमिलनाडु में छोटे दलों के साथ गठबंधन में लड़ती है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई थे और उनके कहने पर ही पार्टी ने किसी के साथ गठबंधन नहीं किया। बीजेपी को इस चुनाव में सीटों के लिहाज से लोकसभा चुनाव में कुछ खास सफलता नहीं मिल पाई लेकिन पार्टी ने अब तक का अपना सबसे अधिक वोट शेयर हासिल किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 11.4 फ़ीसदी वोट हासिल हुए थे। हालांकि पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। कोयंबटूर जहां से अन्नामलाई ने खुद चुनाव लड़ा था, वह सीट भी बीजेपी हार गई थी।

हालांकि लोकसभा चुनाव में सीट न मिलने के बावजूद भी माना गया की पार्टी ने अच्छा वोट शेयर हासिल किया है और आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका फायदा मिलेगा। हालांकि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने रणनीति बदली और एआईएडीएमके साथ गठबंधन में चुनाव में गई। इससे अन्नामलाई नाराज भी हो गए। माना जाता है कि अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने का एक बड़ा कारण एआईएडीएमके के साथ गठबंधन था।

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तमिलनाडु में भाजपा का दामन छोड़ खुद की पार्टी बनाने में जुटे अन्नामलाई की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती हुई नजर आ रही है। अन्नामलाई के राजनीतिक आंदोलन में महज 10 घंटे के भीतर 10 लाख लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। पढ़ें पूरी खबर