Tamil Nadu Elections: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर 23 अप्रैल को मतदान होना है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन और एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच है। अभिनेता विजय की टीवीके पार्टी भी चुनाव मैदान में उतर चुकी है, जिससे इस बार मुकाबला काफी कड़ा हो गया है। एक अहम बात यह भी है कि इस बार सत्ताधारी डीएमके और मुख्य विपक्षी दल AIADMK और गठबंधन की साथी BJP तक ने किसी भी ब्राह्मण उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है।
तमिलनाडु की कुल जनसंख्या में ब्राह्मणों की संख्या लगभग 3% है। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता एक ब्राह्मण थीं। उनके निधन के लगभग 10 वर्षों में, एआईएडीएमके ने 2021 के चुनाव में ब्राह्मण समुदाय से केवल एक उम्मीदवार, सेवानिवृत्त डीजीपी आर नटराज को मैदान में उतारा था लेकिन इस बार न तो बीजेपी और न ही AIADMK ने किसी ब्राह्मण नेता को टिकट दिया है।
TVK ने उतारे दो ब्राह्मण प्रत्याशी
इसके विपरीत अभिनेता विजय की टीवीके ने दो ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि तमिल राष्ट्रवादी सीमान की एनटीके ने छह उम्मीदवार उतारे हैं। इन दोनों पार्टियों ने मायलापुर और श्रीरंगम जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में ब्राह्मण नेताओं को टिकट दिया है, जहां ब्राह्मणों की संख्या काफी ज्यादा है। आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़ दें तो राज्य की प्रमुख पार्टियों द्वारा मैदान में उतारे गए अधिकांश उम्मीदवार ओबीसी समुदाय से हैं।
कभी AIADMK को मिलता था ब्राह्मणों का पूरा समर्थन
बता दें कि तमिलनाडु की राजनीति में एआईएडीएमके को दशकों तक ब्राह्मणों का समर्थन प्राप्त था। इसकी वजह यह भी थी कि 6 बार की मुख्यमंत्री रहीं जे जयललिता ब्राह्मण समाज से ही आती थीं।
जयललिता की मृत्यु के बाद, ब्राह्मण मतदाता बीजेपी की ओर चले गए हैं। इसी के चलते संभावना है कि एआईएडीएमके को अब ब्राह्मण उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में चुनावी लाभ नहीं दिख रहा है।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कई मायनों में अहम होने वाला है। बंगाल चुनाव टीएमसी के अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम वोटबैंक का भी लिटमस टेस्ट है। वहीं मुर्शिदाबाद जिला चर्चा में है। यहां की तीन विधानसभा सीटें 2026 के चुनावी मुकाबले का सबसे बड़ा अखाड़ा बन गई हैं। रेजिनगर में बाबरी नाम से मस्जिद बनने से माहौल गर्म है। हालांकि इससे टीएमसी का वोटबैंक भी खतरे में है। पढ़िए पूरी खबर…
