जब अनंतन अय्यासामी ने अमेरिका में अपनी अच्छी-खासी ज़िंदगी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया, तो उन्होंने ऐसा जरूरत की वजह से नहीं किया था। उनका यह एक बहुत ही निजी फ़ैसला था जो अपनी मिट्टी के प्रति भरोसे, त्याग और फर्ज़ की भावना से जुड़ा था। अय्यासामी अमेरिका में इंटेल में इंजीनियरिंग डायरेक्टर रह चुके हैं और उसके बाद टेक्नोलॉजी और रियल एस्टेट में एक सफल एंटरप्रेन्योर रह चुके हैं। मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले अय्यासामी के पास वह सब कुछ था जिसकी कई लोग ख्वाहिश रखते हैं। उनके पास प्रोफ़ेशनल सफलता, फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी और विदेश में एक आरामदायक ज़िंदगी थी।

अय्यासामी क्यों लौटे तमिलनाडु?

फिर भी अय्यासामी ने इन सब चीज़ों से दूर जाने का फ़ैसला किया। लेकिन सबसे मुश्किल पल पैसा, रुतबा या आसान भविष्य का वादा पीछे छोड़ना नहीं था, बल्कि अपनी 12 साल की बेटी के सामने बैठकर उसे यह बताना था कि उसके पिता जा रहे हैं। अय्यासामी ने बेटी से कहा कि वह भारत लौट रहे हैं ताकि खुद को सार्वजनिक जीवन और राजनीति में लगा सकें, आम लोगों के लिए काम कर सकें, युवा भारतीयों के लिए मौके बना सकें, और तमिलनाडु के तेनकासी ज़िले को ग्रोथ, इनोवेशन और उम्मीद का सेंटर बनाने में मदद कर सकें।

बेटी को समझाना था बड़ा चैलेंज

12 साल की उम्र में अय्यासामी की बेटी पूरी तरह समझ नहीं पाई थी कि उस चॉइस का क्या मतलब है। वह बस इतना जानती थी कि उसके पिता बहुत दूर जा रहे हैं। सालों बाद बेटी को आखिरकार उस फैसले का मतलब समझ आया। अय्यासामी बीजेपी में शामिल हो गए और उन्हें तेनकासी का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अगले चार सालों तक उन्होंने खुद को पूरी तरह से पूरे जिले में जमीनी काम में लगा दिया। उन्होंने बस शेल्टर बनाने, 100 एकड़ के तालाब को ठीक करने, पानी के बांधों को मज़बूत करने, खराब पेड़ों को हटाने और हज़ारों ताड़ के पौधे लगाने में मदद की। अय्यासामी ने मेडिकल कैंप लगाए, छात्रों को सपोर्ट किया, करियर वर्कशॉप आयोजित कीं, युवाओं के बीच खेल को बढ़ावा दिया, कम्युनिटी शेड बनाए और शेल्टर में खाना दान किया।

अय्यासामी का विज़न (जैसा कि उनकी वेबसाइट पर बताया गया है) बड़ा है। वह 2032 तक तेनकासी में एक लाख हाई-टेक जॉब्स बनाना और इस इलाके को स्किल्स, इनोवेशन और सस्टेनेबल ग्रोथ का सेंटर बनाना चाहते हैं। लेकिन इन कोशिशों की उन्हें अपनी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने एक बहुत इमोशनल सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “इसमें मेहनत की कमाई के कई लाख रुपये सिर्फ़ इस गांव के लिए खर्च हुए। लेकिन पैसे से ज़्यादा, इसमें समय, परिवार के पल और दूर से अपनी बेटी को बड़ा होते देखने के कीमती साल लगे।” अय्यासामी को उम्मीद थी कि उनकी सालों की सेवा से उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से मदद मिलेगी। लेकिन जब चुनाव के नतीजे आए, तो बीजेपी और एनडीए गठबंधन तेनकासी ज़िले में कोई भी विधानसभा सीट जीतने में नाकाम रहा।

अय्यासामी ने लिखा, “आखिर में चुनाव के समय के एक हफ़्ते के पैसे ने चार साल की सच्ची सेवा को हरा दिया।” 4 मई को घोषित हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में डीएमके के कलाई कथिरावन तेनकासी में AIADMK उम्मीदवार एस सेल्वा मोहनदास पांडियन को 10,299 वोटों से हराकर जीते। फिर वह पल आया जिसने उन्हें तोड़ दिया। चुनाव के बाद उनकी बेटी ने उन्हें वीडियो कॉल किया और धीरे से पूछा, ” अप्पा क्या अब आप मुझे बता सकते हैं कि राजनीति असल में क्या है?” उन्होंने लिखा, “ज़िंदगी में पहली बार, मेरे पास मेरे चेलापोन्नू (तमिल में लड़कियों के लिए इस्तेमाल होने वाला प्यार भरा शब्द) का कोई जवाब नहीं था।” फिर भी दिल टूटने के बावजूद, अय्यासामी का बड़ा सपना वैसा ही है। लेकिन, अभी के लिए अपनी बेटी के सवाल के बाद एक पिता की चुप्पी किसी भी चुनावी भाषण से ज़्यादा राजनीति के बारे में बताती है।

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