तमिलनाडु में सोमवार को विधानसभा में नव-नियुक्त विधायकों को शपथ दिलाई गई। इस दौरान AIADMK विधायक दो अलग गुटों में बैठे दिखाई दिए। इससे AIADMK के भीतर अंदरूनी कलह को लेकर एक बार फिर से अटकलों का दौर शुरू हो गया।
न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि AIADMK महासचिव पलानीस्वामी के समर्थक विधायक और सी.वी. षणमुगम के समर्थक विधयक शपथ समारोह के दौरान अलग-अलग गुटों में बैठे नजर आए।
इससे पहले जब टीवीके सरकार बनाने की कोशिश कर रही थी, तब AIADMK के 28 विधायकों को पुडुचेरी में एक प्राइवेट रिजॉर्ट में ठहराया गया था। तब ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि AIADMK का एक गुट विजय की पार्टी टीवीके के साथ मिलकर सरकार बनाने के पक्ष में है।
हालांकि AIADMK ने टीवीके से हाथ नहीं मिलाया। बाद में विजय ने कांग्रेस के अलावा वीसेके, लेफ्ट और IUML के साथ मिलकर सरकार बनाई।
जोसेफ विजय ने भी ली शपथ
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने भी सोमवार को तमिलनाडु विधायनसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। उन्हें विधानसभा के कार्यवाहक अध्यक्ष एम.वी. करुपैया ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने विधायक के रूप में सबसे पहले शपथ ली और इसके बाद एन. आनंद तथा आधव अर्जुन सहित नौ मंत्रियों ने विधायक पद की शपथ ग्रहण की।
मंत्री कीर्तना नहीं ले सकीं शपथ
तमिलनाडु की सरकार में मंत्री एस कीर्तना सोमवार को विधायक के रूप में शपथ नहीं ले सकीं। न्यूज एजेंसी पीटीआई को एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि शपथ ग्रहण के लिए अनिवार्य ‘निर्वाचन प्रमाणपत्र’ पेश न कर पाने की वजह से वो विधानसभा सदस्य के तौर पर शपथ नहीं ले पाईं।
पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा की कार्यवाही के सीधे प्रसारण में देखा गया कि जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं।
विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक प्रोटेम स्पीकर की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाणपत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाणपत्र पेश नहीं कर सकीं।
श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है। पूरे घटनाक्रम पर पीटीआई-भाषा से बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि उनके पास उस समय निर्वाचन प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था। प्रमाणपत्र जमा नहीं कर पाने के कारण, वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें शपथ लेने की अनुमति देने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया। अब वह निर्वाचन प्रमाणपत्र जमा करने के बाद किसी भी समय शपथ ले सकती हैं।” (इनपुट- ANI / PTI)
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RBI के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति आदर्श नहीं मानी जा सकती। वित्त वर्ष 2025 के आखिर तक राज्य की कुल बकाया देनदारियां 9.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थीं जो देश के किसी भी राज्य से सबसे अधिक हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
