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तबरेज लिंचिंग केस: आरोपियों पर लगा मर्डर का केस हटाने पर सवाल, मोदी सरकार के मंत्री बोले- मुझे पता नहीं

फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक यह कोई सुनियोजित मर्डर नहीं था। पुलिस ने इस मामले में पिछले महीने ही धारा 304 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

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झारखंड के तबरेज लिंचिंग केस में आरोपियों पर लगे मर्डर के आरोपों को हटा दिया गया है। झारखंड पुलिस ने ‘फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट’ आने के बाद यह फैसला लिया है। इसके साथ ही पोस्टरमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह को ‘कार्डियक अरेस्ट’ बताई गई है। इस पूरे मामले पर जब अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से पूछा गया तो वह बिल्कुल अनजान नजर आए। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में कुछ नहीं जानते।

दरअसल एक पत्रकार ने नकवी से सवाल किया कि ‘झारखंड से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसमें तबरेज खान के आरोपियों से मर्डर के चार्ज हटा दिए गए हैं।’ पत्रकार का सवाल सुनते ही नकवी ने कहा ‘मैंने इस बारे में अभी कुछ देखा नहीं। मैंने अभी तक देखा नहीं है। मैं पहले देखूंगा और उसके बाद कुछ बताऊंगा।’

बता दें कि फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक यह कोई सुनियोजित मर्डर नहीं था। पुलिस ने इस मामले में पिछले महीने ही धारा 304 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। अंसारी की करीब चार महीने पहले मौत हो गई थी। पुलिस ने इससे पहले अंसारी की पत्नी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में हत्या का आरोप लगाया था।

झारखंड में कथित तौर पर उन्मादी भीड़ ने 24 वर्षीय तबरेज अंसारी की इतनी पिटाई की थी कि उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। बचपन में ही माता-पिता को खोने के बाद आठ साल पहले तबरेज पुणे चला गया था। अप्रैल महीने में वह शादी के लिए घर लौटा था। 27 मई को तबरेज की शादी 19 वर्षीय शाहिस्ता परवीन से हुई थी। कुछ ही दिनों बाद दोनों पुणे जाने वाले थे।

कन्हैया कुमार ने उठाए सवाल: कथित भीड़ द्वारा मौत के घाट उतार दिए गए अंसारी के आरोपियों को राहत देने पर सीपीआई नेता और पूर्व जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने फेसबुक पोस्ट पर कहा कि भीड़ द्वारा मागे गए किसी शख्स की मौत को प्राकृतिक और स्वाभाविक बताना गलत है। याद रहे भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध को भी नहीं छोड़ा था।

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