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नमामि गंगे योजना को सफल बनाने के लिए उमा भारती को मंत्री पद से हटाने की मांग

सुमेरूमठ काशी के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि वे नमामि गंगे योजना को सफल बनाने के लिए उमा भारती के जगह किसी और योग्य व्यक्ति को मंत्री बनाए जो धरातल पर गंगा की...
Author हरिद्वार | December 12, 2015 01:30 am

सुमेरूमठ काशी के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि वे नमामि गंगे योजना को सफल बनाने के लिए उमा भारती के जगह किसी और योग्य व्यक्ति को मंत्री बनाए जो धरातल पर गंगा की स्वच्छता का कार्य कर सके। वे आज हरिद्वार में पत्रकारों से बात कर रहे थे। वे काशी से हरिद्वार एक धार्मिक समारोह में भाग लेने आए थे।
समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि नमामि गंगे योजना का काम धरातल पर नहीं हो रहा है। अखबारों और चैनलों पर भले ही इसका बहुत कुछ प्रचार दिखता हो परंतु मौके पर कुछ काम नहीं दिखाई दे रहा है। उमा भारती केवल योजनाएं बना रही हैं, दौरा कर रही हैं। जिस सक्रियता के साथ नमामि गंगे योजना के लिए एक महीना या छह महीने में योजना बननी चाहिए थी, कुछ धरातल पर दिखना चाहिए था। वैसा नहीं हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि वे नमामि गंगे योजना के काम काज की समीक्षा करें। और अगर इस काम में वे उमा भारती को अक्षम पाते हैं तो किसी योग्य और प्रतिभावान व्यक्ति को नमामि गंगे योजना का काम धरातल पर करने के लिए इस विभाग का मंत्री बनाए। उमा भारती पर तंज कसते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उमा भारती कहती हैं कि वे गंगा के लिए अपनी जान दे देंगी। शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें जान देने की कोई जरूरत नहीं है। वे फैक्ट्रियों और सीवर का गंदा पानी गंगा में गिरने से तत्काल रोकें।
शंकराचार्य ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा गोमुख से हरिद्वार तक पॉलीथीन पर पाबंदी लगाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि एनजीटी का यह कदम अभी पर्याप्त नहीं है। गोमुख से गंगा सागर तक का गंगा का क्षेत्र पॉलीथीन मुक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पॉलीथीन से पहले यह जरूरी है कि फैक्ट्रियों और सीवर का गंदा पानी गंगा में जाने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि केवल पॉलीथीन पर पाबंदी लगाने वाला एनजीटी का कदम लोगों का ध्यान बंटाने के लिए है। सबसे जरूरी कदम गंगा में सीवर को रोकने का है।
सरस्वती ने ज्योतिष और शारदापीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को फर्जी शंकराचार्य बताते हुए कहा कि यदि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आठवीं की डिग्री भी दिखा दें तो सुमेरूपीठ उन्हें एक लाख रुपए का ईनाम देगी। उन्होंने कहा कि स्वरूपानंद सरस्वती कायदे से दंड धारण करने के अधिकारी ही नहीं हैं और न ही वे शंकराचार्य हो सकते हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि एक आचार्य दो पीठों पर नहीं बैठ सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अनुसार ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ पर बैठने वाले शंकराचार्य अपने नाम के आगे गिरि नामा लगाते हैं और जो शारदापीठ पर शंकराचार्य बैठते हैं वे अपने नाम के आगे आश्रम या तीर्थ नामा लगाते हैं। परंतु स्वामी स्वरूपानंद तो अपने नाम के आगे सरस्वती लगाते हैं। इसलिए वे दोनों पीठों के शंकराचार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की पीठ पर जो बैठते हैं वे आचार्य होने चाहिए और शारीरिक रूप से विकलांग नहीं होने चाहिए। परंतु स्वरूपानंद सरस्वती तो न आचार्य हैं और न ही शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। वे विकलांग हैं। ऐसे में वे कैसे शंकराचार्य बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कुंभ जैसे महापर्व को विवाद का अखाड़ा बनाकर भारत की छवि खराब करने का काम कर रहे हैं। ऐसे ही उन्होंने हरिद्वार के 2010 के कुंभ मेला में किया था। तब भी मैंने उनकों शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद योग्यता का पद है, आरक्षण का पद नहीं है।

 

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