कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के द्वारा ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकाले जाने को लेकर स्वामी नरेंद्राचार्य जी महाराज ने तंज कसा है।
स्वामी नरेंद्राचार्य जी महाराज ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिग्विजय सिंह 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीति कर रहे हैं जबकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की दाल गलने वाली नहीं है।
दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का उल्लेख करते हुए दावा किया था कि इस मामले में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी तथा चढ़ावे के पैसे से निजी संपत्तियां और वाहन खरीदे जाने के मामले सामने आए हैं।
स्वामी नरेंद्राचार्य जी महाराज ने ANI से कहा, “संत समाज इसे बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि यह एक राजनीतिक मुद्दा है। अगर यह यात्रा राम जन्मभूमि के उद्घाटन के सिलसिले में आयोजित की जाती तो अयोध्या के सभी निवासी इसका स्वागत करते… लेकिन दान में चोरी के मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा बनाने का सनातन धर्म के अनुयायी स्वागत नहीं करेंगे। वे 2027 के चुनावों को ध्यान में रखकर राजनीति कर रहे हैं… राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए दिग्विजय सिंह आ रहे हैं… उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की दाल गलने वाली नहीं है।”
क्या करेंगे दिग्विजय सिंह?
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को ऐलान किया था कि वह उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि यह किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं होगी, बल्कि पारदर्शिता, सत्य और आस्था की रक्षा तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए निकाली जाएगी। दिग्विजय सिंह ने कहा था कि यह यात्रा 20 अक्टूबर से शुरू होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि यात्रा उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से शुरू होकर अयोध्या पहुंचेगी। दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इस मामले में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी तथा चढ़ावे के पैसे से निजी संपत्तियां और वाहन खरीदे जाने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों सनातनियों की आस्था और स्वाभिमान के प्रतीक हैं।
चढ़ावे में हुई लूट- दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने कहा, ”हमारी आस्था और हमारे चढ़ावे की लूट हुई है और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए गठित न्यास से संबद्ध लोग चढ़ावे की कथित लूट में शामिल हैं और पूरी सरकार चंपत राय को बचाने में लगी रही। राय ने हाल में राम मंदिर न्यास के महासचिव पद से इस्तीफा दिया था।
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डॉ. निर्मला यादव को 2 सितंबर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से व्हाट्सएप मैसेज मिला। इसमें उनसे बहुत ही कम समय में यह पुष्टि करने के लिए कहा गया कि क्या वह राम मंदिर ट्रस्ट के न्यासी का पद स्वीकार करेंगी। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
