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स्वदेशी जागरण मंच ने 2017 को घोषित किया है ‘चीन विरोधी वर्ष’, सह-संयोजक ने कहा- भारत और चीन के बीच दीवार बने तो खुशी होगी

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉक्टर अश्विनी महाजन ने कहा, "सच ये है कि ग्लोबलाइजेशन का फायदा केवल कुछ अमेरिकी कंपनियों को हुआ है।"

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (बाएं) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (फोटो-AP)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने साल 2017 को “चीन विरोधी वर्ष” घोषित कर रखा है। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉक्टर अश्विनी महाजन ने रेडिफ डॉट काम को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर भारत और चीन के बीच दीवार बन जाए तो उन्हें खुशी होगी। डॉक्टर अश्विनी महाजन ग्लोबलाइजेशन (वैश्विकरण) से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे। डॉक्टर महाजन के अनुसार ग्लोबलाइजेशन से केवल कुछ अमेरिका कंपनियों को फायदा हुआ है, भारत को नहीं।

जब डॉक्टर महाजन से रेडिफ डॉट ने  पूछा कि क्या ग्लोबलाइजेशन से भारत और चीन को फायदा नहीं हुआ है? इस पर वो बोले, “अगर चीन में हर किसी को नौकरी मिल रही है तो इसकी वजह ये है कि वो अपना सामान बेचने में कामयाब हो रहे हैं लेकिन औसत अमेरिकी, ब्रिटिश और यूरोपीय घाटे में हैं।” महाजन ने आगे कहा, “सच ये है कि ग्लोबालइजेशन का फायदा केवल कुछ अमेरिकी कंपनियों को हुआ है।”  महाजन ने दावा किया कि आम तौर पर अमेरिका और यूरोप में भी ग्लोबालइजेशन की वजह से बेरोजगारी बढ़ी है।

महाजन के अनुसार ग्लोबलाइजेशन से आम भारतीय को फायाद नहीं हुआ है। महाजन ने कहा, “सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 199 में 78 प्रतिशत वैल्यु एडिशन भारतीय कामगारों के पास जाता था लेकिन आज केवल 41 प्रतिशत जाता है।” महाजन ने आगे कहा, “अगर विभिन्न देशों के बीच दीवार बना दी जाए मसलन भारत और चीन के बीच।” महाजन ने बताया कि स्वदेश जागरण मंच ने 2017 को “चीन विरोधी वर्ष” घोषित किया है।

स्वदेशी जागरण मंच खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की इजाजत देने के भी खिलाफ है। महाजन का मानना है कि खाद्य प्रसंस्करण में एफडीआई की आड़ में बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय कृषि और सब्जी उत्पादन क्षेत्र में घुसना चाहती हैं। महाजन रिटेल (खुदरा बिक्री) में भी एफडीआई के विरोधी हैं। महाजन कहते हैं कि रिटेल में एफडीआई से मैनुफैक्चरिंग चीन के पास जाएगी, स्वामित्व अमेरिका के पास और भारतीय युवक-युवतियां केवल सेल्स-गर्ल और सेल्स-ब्वॉय बनकर रह जाएंगे।

स्वदेशी जागरण मंच भारत में बने सामान को बढ़ावा देने के मकसद पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान चला रहा है। स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना आरएसएस से जुड़े मजदूर नेता दत्तोपंत ठेंगड़ी ने 1991 में की थी। इसका उद्देश्य भारत में स्वदेश में निर्मित सामग्री के प्रचलन को बढ़ाना और विदेशी सामान का विरोध करना था।

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