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स्‍वच्‍छ भारत अभियान: देश में शौचालय बहुत, मगर इस्‍तेमाल करने के लिए पानी नहीं

स्‍वच्‍छ भारत अभियान शुरू होने के बाद से शौचालयों का कितना उपयोग बढ़ा है, इसपर अभी तक कोई व्यापक आंकड़ा सरकार की तरफ से जारी नहीं किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ 42.5 प्रतिशत ग्राामीण घरों में ही ‘शौचालय इस्‍तेमाल करने के लिए पानी’ मौजूद है। (EXPRESS ARCHIVE)

केन्‍द्र सरकार ने स्‍वच्‍छ भारत अभियान के तहत देश भर में अक्‍टूबर 2014 से 9,093 करोड़ रुपए खर्च कर एक करोड़ 80 लाख्‍ा शौचालय बनवाए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अभियान को प्राथमिकता के तहत चलाने को कहा था, लेकिन नेशनल सैम्‍पल सर्वे ऑर्गनाइजेशन के आंकड़ों (NSSO) ने अभियान की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्‍वच्‍छ भारत अभियान शुरू होने के बाद से शौचालयों का कितना उपयोग बढ़ा है, इसपर अभी तक कोई व्यापक आंकड़ा सरकार की तरफ से जारी नहीं किया गया है। NSSO ने इस साल की शुरुआत में ‘स्‍वच्‍छता स्‍टेटस रिपोर्ट’ जारी की थी। इस रिपोर्ट में, शौचालयों के बनने और उसके इस्‍तेमाल में बढ़ोत्‍तरी पर एक नजर डाली गई है।

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NSSO की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ 42.5 प्रतिशत ग्राामीण घरों में ही ‘शौचालय इस्‍तेमाल करने के लिए पानी’ मौजूद है। दशकों से शौचालय बनवा रहे नीति-निर्माताओं को यही समझाया है कि बिना पर्याप्‍त पानी का इंतजाम किए शौचालय बनवाना पैसे की बर्बादी है। साथ ही शौचालय की जलनिकासी का इंतजाम भी किया जाना जरूरी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब 45 प्रतिशत गांवों में शौचालय से निकलने वाली गंदगी को निस्‍तारित करने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है। हालांकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि फिलहाल गांवों में इसके लिए क्‍या प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

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रिपोर्ट के अनुसार, बाकी के 55.6 प्रतिशत गांवों में 36.7 प्रतिशत में पक्‍की नालियां बनी हुई हैं। जबकि 19 प्रतिशत गांवों में कच्‍ची नालियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि शौचालय से निकलने वाली 16 प्रतिशत गंदगी स्‍थानीय तालाबों में गिरती है, जबकि 24 प्रतिशत स्‍थानीय नाले में। शहरों में स्थिति और बदतर है। हालांकि 56.4 प्रतिशत शहरी घर सीवर नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, लेकिन ज्‍यादातर सीवेज सीधे नदियों में गिरते हैं।

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