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‘Swachh Bharat’ के 4 साल बाद भी 38% सरकारी अस्पतालों में स्टाफ टॉयलेट नहीं, पर केंद्र बता रहा सबसे सफल योजना

आलम यह है कि तब से लेकर अब तक लगभग 38% सरकारी हॉस्पिटल्स में एक भी सफाई कर्मचारी नहीं है। मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार इसके बाद भी इसे सबसे सफल योजना बता रही है।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: December 4, 2019 7:15 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महात्वाकांक्षी Swachh Bharat Mission (स्वच्छ भारत मिशन) के करीब चार साल पूरे हो चुके हैं, पर सरकारी अस्पतालों का हाल फिलहाल बेहाल ही है। आलम यह है कि तब से लेकर अब तक लगभग 38% सरकारी हॉस्पिटल्स में कर्मचारियों के लिए एक भी टॉयलेट नहीं है। फिर भी पीएम मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार इसे अपनी सबसे सफल योजना बता रही है। चूंकि, इस अभियान के तहत साफ-सफाई के अलावा पीएम ने टॉयलेट बनाने पर भी खासा जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि ग्रामीण भारत में अभी भी 60 फीसदी लोग खुले में शौच को मजबूर हैं। उन्हें इसे ‘धब्बा’ करार देते हुए था कि भारत को इसे खुद ही साफ करना चाहिए।

केंद्र का दावा है कि देश भर में उसने 2014 के बाद लगभग 9.5 करोड़ टॉयलेट्स बनाए, पर हाल ही में जब ‘indiatoday’ ने ताजा ग्रामीण स्वास्थ्य आधारभूत संरचना (Rural Health Infrastructure) से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया, तो पता चला कि ग्रामीण भारत के 38 प्रतिशत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में उसके कर्मचारियों के लिए टॉयलेट नहीं हैं।

केंद्र की ‘Rural Health Statistics 2018’ रिपोर्ट के आधार पर 22 नवंबर को लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के लिखित जवाब में इससे जुड़ी जानकारी दी गई थी। जानकारी के मुताबिक, 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण इलाकों में 50 फीसदी से अधिक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ टॉयलेट नहीं हैं। इनमें तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सरीखे बड़े राज्य शामिल हैं। तेलंगाना का हाल इन सब राज्यों में सबसे खराब है, जहां के 86 फीसदी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ टॉयलेट्स नहीं हैं।

इन स्वास्थ्य केंद्रों में सब-सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) हैं, जो कि देश की जन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किसी रीढ़ की हड्डी से कम नहीं माने जाते हैं। कुछ हिस्सों में या फिर टुकड़ों में सरकारी आंकड़ों पर नजर मारें तो पता चलता है कि पूरे भारत में 31 मार्च 2018 तक कम से कम 60 फीसदी सब सेंटर, 18 प्रतिशत PHC और 12% CHC में स्टाफ को टॉयलेट नहीं मय्यसर था।

हालांकि, आंध्र प्रदेश की स्थिति तेलंगाना से बिल्कुल उलट कही जा सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि वहां 7458 सब सेंटर्स में स्टाफ टॉयलेट हैं। यही नहीं, आंध्र के PHC और CHC में भी शौचायल हैं। आंध्र प्रदेश के अलावा प्रमुख राज्यों में इकलौता हिमाचल प्रदेश भी ऐसा सूबा है, जहां सभी सरकारी अस्पतालों में कर्मचारियों के लिए टॉयलेट हैं।

वहीं, आंकड़े बताते हैं कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य यानी कि उत्तर प्रदेश में महज नौ फीसदी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (ग्रामीण इलाकों में) बगैर स्टॉफ टॉयलेट के हैं। दूसरी ओर, राजस्थान और गुजरात में क्रमशः 85 फीसदी व 73 प्रतिशत सब-सेंटर्स पर स्टाफ टॉयलेट नहीं हैं।

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