पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को राज्य में औद्योगिक विकास और कानून-व्यवस्था को लेकर कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में वापस लाएगी और निवेश आकर्षित कर रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
एक संवाददाता सम्मेलन में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने उद्योगों के नाम पर जबरन जमीन अधिग्रहण किया और ‘फोटो सेशन’ और झूठे दावों के जरिए औद्योगिक पुनरुद्धार का भ्रम पैदा किया। उन्होंने कहा, ‘हम टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में वापस लाएंगे।’
उन्होंने टाटा समूह की उस छोटी कार परियोजना का जिक्र करते हुए यह बात कही। बता दें कि लंबे समय तक चले भूमि अधिग्रहण विवाद के बाद टाटा के नैनौ कार प्रोजेक्ट को 2008 में हुगली जिले के सिंगूर से गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया था। शुभेंदु ने विपक्षी तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने कई वर्षों तक औद्योगिक पुनरुद्धार के दावे तो किए लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं दिया।
जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुभेंदु
उन्होंने कहा, ”हम पिछली सरकार की तरह उद्योगों को आकर्षित करने के लिए झूठ का सहारा नहीं लेना चाहते और न ही ‘फोटो सेशन’ आयोजित करना चाहते हैं।”
शुभेंदु ने भूमि अधिग्रहण के विवादास्पद मुद्दे पर कहा कि सरकार नीति की रूपरेखा तैयार कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसानों के अधिकारों से समझौता किए बिना उद्योगों को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा, ”सरकार अपनी भूमि अधिग्रहण नीति पर काम कर रही है। हम उस जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हैं, जैसा पूर्ववर्ती वाम मोर्चा शासन के दौरान सिंगूर और नंदीग्राम में हुआ था। इसके साथ ही हम तृणमूल कांग्रेस की उस नीति के भी खिलाफ हैं जिसमें उद्योग लाने के नाम पर केवल फोटो खिंचवाए गए, झूठ फैलाया गया और हकीकत में कुछ नहीं किया गया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार औद्योगिक विकास और लोगों की सहमति, दोनों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाएगी। सिंगूर में टाटा मोटर्स की छोटी कार परियोजना पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक रही है। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन ने 2011 में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसी के साथ वाम मोर्चा के 34 साल के शासन का अंत हुआ था।
‘बंगाल में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता’
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सरकार की नीति अशांति, गुंडागर्दी और असामाजिक गतिविधियों के प्रति ‘कतई बर्दाश्त ना करने’ की है। उन्होंने कहा कि जो लोग कानून अपने हाथ में लेंगे, उनके खिलाफ सबसे कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए सरकार किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रदेश भाजपा द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ”सत्ता में आने के बाद कुछ घटनाएं हुई हैं और हमने उनसे सख्ती से निपटा है। हमने स्पष्ट संदेश दिया है कि हमारी नीति अशांति, गुंडागर्दी और असामाजिक गतिविधियों को ”कतई बर्दाश्त न करने” की है। हम ऐसी चीजों को जारी नहीं रहने देंगे।” उन्होंने कहा कि वह ऐसी घटनाओं के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
अधिकारी ने कहा, ”तोड़फोड़ करने वालों और कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सबसे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के लिए शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। उन्होंने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार से तुलना करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार असामाजिक तत्वों को जनजीवन बाधित करने की अनुमति नहीं देगी।
समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ
