पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभालने से कुछ दिन पहले मई में शुभेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की हत्या हो गई थी। अब पता चला है कि ये हत्या छह महीने से ज़्यादा समय से चल रही एक साज़िश का नतीजा थी। द इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि CBI ने iCloud पर एक फ़ोटो समेत डिजिटल सबूतों का इस्तेमाल करके, CCTV फुटेज, रोड टोल और कई फ़ोन (जिसमें हुगली नदी के नीचे एक फ़ोन भी शामिल है) के बीच की कड़ियों को जोड़कर इस साज़िश का पर्दाफ़ाश किया।

CBI ने 7 अगस्त को बारासात में एडिशनल चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चार्जशीट फ़ाइल की। पता चला है कि जांच में कहा गया है कि जिस आदमी ने कथित तौर पर तार खींचे थे, वह चंद्रनाथ रथ का 29 साल का असिस्टेंट सागर सोनकर था।

6 मई को हुई थी चन्द्रनाथ रथ की हत्या

चंद्रनाथ रथ को 6 मई को रात करीब 10 बजे कोलकाता के मध्यमग्राम में उनकी गाड़ी के अंदर गोली मार दी गई थी। उनके साथी बुद्धदेव बेरा इस हमले में घायल हो गए थे। चार्जशीट में 12 लोगों के नाम हैं, जिनमें से कृष्ण कुमार सिंह (बिहार से) को छोड़कर सभी को पकड़ लिया गया है। गिरफ्तार लोगों में सागर और उसका भाई साहेब सोनकर (दोनों कोलकाता से), उत्तर प्रदेश का रहने वाले विकास मिश्रा, विनय राय, संजय राय, ज्ञानेंद्र सिंह, राज कुमार सिंह, गोलू सिंह और नवीन कुमार सिंह और बिहार के मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य शामिल है।

गवाहों के तौर पर 585 लोगों के नाम लिस्ट में हैं। सागर और 20 साल के साहेब को 31 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। CBI द्वारा चार कथित शार्पशूटरों समेत 11 लोगों को हिरासत में लेने के दो महीने से ज़्यादा समय बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। दोनों भाइयों के माता-पिता ने पहले द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि उन्हें पुलिस के आरोपों पर यकीन नहीं है, क्योंकि दोनों ने न सिर्फ़ चंद्रनाथ रथ बल्कि अधिकारी के साथ उनके पर्सनल ऑफिस में भी मिलकर काम किया था और चुनाव के दौरान अधिकारी की भवानीपुर विधानसभा सीट पर सक्रिय भूमिका निभाई थी।

एक रिश्तेदार ने कहा, “सागर चंद्रनाथ की परछाई की तरह था। वह फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन देखता था, पेमेंट भी संभालता था। बाद में वह साहेब को भी साथ ले गया और उसे भी चंद्रनाथ ने नौकरी पर रख लिया।

चंद्रनाथ रथ के सहयोगी ने ही करवाई हत्या- सीबीआई की चार्जशीट

CBI जांच के मुताबिक सागर कथित तौर पर चंद्रनाथ रथ से नाराज़ हो गया था क्योंकि वह खुद को उसके बराबर समझता था और मानता था कि उसे रास्ते से हटाना ही शुभेंदु अधिकारी के करीब आने का एकमात्र तरीका है। जांच में पाया गया कि नवंबर 2025 में किसी समय उसने कथित तौर पर दूसरे लोगों के नाम पर फ़ोन और SIM कार्ड खरीदने के लिए अपने भाई साहेब को शामिल किया।

इसके बाद सागर कथित तौर पर अपने स्कूल के दोस्त विकास मिश्रा को लाया, जो विनय राय को जानता था। CBI का दावा है कि WhatsApp कॉल रिकॉर्ड से पता चलता है कि सागर और विकास मिश्रा, जो देवरिया के सलेमपुर का रहने वाला है, वह 20 जनवरी, 2026 से लगातार संपर्क में थे। दोनों कथित तौर पर “lकॉन्ट्रैक्ट किलर को हायर करने के इरादे से एक साथ आए थे।

जांच में पाया गया कि इस साल 30 जनवरी को, विकास मिश्रा ने विनय राय को WhatsApp पर कॉल किया था। CBI के मुताबिक विनय राय का क्रिमिनल रिकॉर्ड है। उसके खिलाफ मर्डर समेत पांच क्रिमिनल केस दर्ज हैं या लंबित हैं। सीबीआई ने कहा कि सागर, विकास मिश्रा और विनय राय के बीच और भी कॉल आए। सीबीआई का आरोप है कि 6 फरवरी को शूटर्स का इंतज़ाम करने के लिए विनय राय ने अपने जान-पहचान वाले संजय राय से कॉन्टैक्ट किया, जो सूरत में था और उसे तुरंत धनबाद आने को कहा गया।

झारखंड और यूपी से जुड़े तार

CBI के मुताबिक संजय राय के धनबाद आने के बाद विकास मिश्रा ने अपने, विनय राय और सागर के बीच एक मीटिंग तय की, जहां हत्या करने के तरीकों पर कथित तौर पर चर्चा हुई। जांच करने वालों का कहना है कि इसके बाद धनबाद, कोलकाता, बलिया, गाज़ीपुर और दूसरी जगहों के बीच बार-बार चक्कर लगाए गए।

सागर से अपनी मीटिंग के कुछ समय बाद संजय राय कथित तौर पर कोलकाता पहुंचा और एक होटल में चेक इन किया, जिसका मालिक पंकज सिंह है। CBI का कहना है कि सागर ने उनके होटल में रुकने का और बाद में साल्ट लेक में रहने का खर्चा उठाया।

जांच एजेंसी का कहना है कि 18 फरवरी को सागर कथित तौर पर संजय राय को मध्यमग्राम और चंद्रनाथ रथ के ऑफिस, विधानसभा और हाई कोर्ट इलाकों की रेकी पर ले गया। एक उबर ड्राइवर ने कथित तौर पर दोनों की पहचान की। संजय राय उसी दिन धनबाद वापस चला गया, लेकिन खबर है कि वो मार्च और अप्रैल में जासूसी के लिए वापस आया।

खरीदी गई कार

CBI को मिले CCTV फुटेज के मुताबिक, 7 अप्रैल को संजय राय, ज्ञानेंद्र सिंह और राज कुमार सिंह पटुली (कोलकाता) में एक गाड़ी डीलर के पास गए और एक मारुति स्विफ्ट की जांच की। 18 अप्रैल को गाड़ी 3.80 लाख रुपये में खरीदी गई, CCTV फुटेज और रोड टोल रिकॉर्ड से कथित तौर पर पता चला कि इसमें धनबाद तक की ट्रिप की गई थीं। CBI का कहना है कि आरोपियों ने एक निसान माइक्रा और एक हीरो सुपर स्प्लेंडर मोटरसाइकिल भी खरीदी, जिनके इंजन और चेसिस नंबर मिटा दिए गए थे। एजेंसी के मुताबिक बाद में सभी गाड़ियों पर नकली रजिस्ट्रेशन प्लेट लगा दी गईं।

3 मई को CCTV फुटेज और FASTag रिकॉर्ड से कथित तौर पर पता चला कि आरोपी धनबाद से कोलकाता 275 किमी की दूरी तय करते हैं और फिर बिराती के रास्ते वापस जाते हैं। अगले दो दिनों में, कथित तौर पर आगे की व्यवस्था की गई, जिसमें निसान माइक्रा के लिए एक और नंबर प्लेट तैयार करना भी शामिल था। शूटर्स कथित तौर पर उसी दिन, यानी 6 मई को धनबाद से कोलकाता गए थे। कॉल-डिटेल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और उन लोगों के बीच कथित बातचीत के आधार पर रिकंस्ट्रक्शन के अनुसार, धनबाद छोड़ने से पहले वे अलग हो गए थे।

फेसटाइम पर बताई गई चंद्रनाथ रथ की लोकेशन

जांच में कहा गया है, “कृष्ण कुमार सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह और संजय राय एक स्विफ्ट कार में कोलकाता के लिए निकले, जबकि मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य, गोलू सिंह और राज कुमार सिंह निसान माइक्रा में निकले, रास्ते में एक टोल टैक्स पेमेंट रिकॉर्ड करते हुए।” CBI का दावा है कि सागर ने संजय राय को फेसटाइम पर चंद्रनाथ रथ की लोकेशन बताई थी और संजय राय ने यह जानकारी ज्ञानेंद्र और कृष्णा को दी थी।

जैसे ही चंद्रनाथ रथ की कार स्कॉर्पियो, मध्यमग्राम में दोहरिया लेन में घुसी, राज ने कथित तौर पर उसे ब्लॉक करने के लिए निसान माइक्रा को दूसरी तरफ पार्क कर दिया। फिर जांच एजेंसी का आरोप है कि कृष्णा और ज्ञानेंद्र ने चंद्रनाथ रथ की हत्या की और बुद्धदेव बेरा की हत्या की कोशिश की।

शूटिंग के बाद राज, कृष्णा और ज्ञानेंद्र कथित तौर पर पास में खड़ी हीरो होंडा स्प्लेंडर में सवार होकर भाग गए। मोटरसाइकिल गौरी काली बाड़ी बस स्टैंड के पास लावारिस मिली थी। CBI का मानना है कि उन लोगों ने बलिया वापस जाने के लिए स्विफ्ट का इस्तेमाल किया, रास्ते में फोन और सिम कार्ड को नष्ट कर दिया या फेंक दिया।

CBI का दावा है कि उसके पास धनबाद, बिराती, जेसोर रोड, डोहरिया लेन और बारासात रेलवे जंक्शन जैसी कई जगहों से मोबाइल टावर-डंप डेटा है, जिससे आरोपियों का पता चलता है। उसका यह भी दावा है कि कई सिम कार्ड दूसरे लोगों के नाम पर खरीदे गए थे और बार-बार हैंडसेट के बीच बदले गए थे। CBI के अनुसार एक अहम बात यह थी कि चंद्रनाथ रथ की एक तस्वीर iCloud अकाउंट पर थी जो एक नंबर से जुड़ा था, जिसे 18 मार्च को क्लाउड पर लोड किया गया था, जब फोन मध्यमग्राम में था।

CBI का दावा है कि हत्या के तुरंत बाद 6 मई को रात 10.16 बजे सागर और संजय राय द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे फोन के बीच कम से कम एक फेसटाइम बातचीत मिली है। इसके तुरंत बाद एक और कॉल आया। CBI का मानना है कि सागर ने चंद्रनाथ रथ की हालत जानने के लिए यह कॉल किया था।

30 लाख का पेमेंट किसे किया गया?

जांच से पता चला कि नवीन से मिली दो पिस्तौलों का इस्तेमाल कथित तौर पर चंद्रनाथ रथ और बेरा को गोली मारने के लिए किया गया था। चंद्रनाथ रथ के शरीर पर बंदूक के आठ घाव और दो गोलियां मिलीं। एजेंसी का यह भी दावा है कि उसे एक फाइनेंशियल ट्रेल मिला है, जिसमें साहेब और उसके एक दोस्त राजा दास ने कथित तौर पर 24 फरवरी को झारखंड के जामताड़ा में संजय राय को 30 लाख रुपये दिए थे। CBI के अनुसार इसे कथित तौर पर आरोपियों के बीच बांटा गया था और गाड़ियों और लॉजिस्टिक्स के लिए और पेमेंट किए गए थे।

हत्या के बाद 6 मई की रात करीब 10.30 बजे सीबीआई का दावा है, “सागर सोनकर ने अपने चचेरे भाई ऋषभ सोनकर को एक iPhone दिया, और उसे हुगली नदी में फेंकने के लिए कहा। हावड़ा ब्रिज के CCTV फुटेज में ऋषभ सोनकर रात 11.53 बजे ब्रिज से कुछ फेंकता हुआ दिख रहा है।” CBI का कहना है कि उसने iPhone निकालने के लिए गोताखोरों का इस्तेमाल किया लेकिन सफल नहीं हुई। एजेंसी के मुताबिक, मर्डर के बाद राज, ज्ञानेंद्र, गोलू, कृष्णा और संजय राय स्विफ्ट में UP के गाज़ीपुर के ताजपुर मांझा गांव में मनोज राय के घर गए और कृष्णा रास्ते में बक्सर में उतर गया।

किसे कितने रुपये मिले?

सीबीआई का कहना है, “मनोज राय के घर पर, ज्ञानेंद्र सिंह ने बाकी रकम ली, जिसे 13.03.2026 को सेफ कस्टडी में रखा गया था और आगे कहा कि मनोज को साजिश में उसके कथित हिस्से के लिए 50,000 रुपये मिले थे। इसके बाद CBI का दावा है कि ज्ञानेंद्र, राज और गोलू बलिया में नवीन के घर गए और जुर्म में इस्तेमाल हथियारों से भरा एक बैग सौंप दिया। 30 लाख रुपये में से, मन्नू सिंह (ज्ञानेंद्र) ने 5 लाख रुपये राज कुमार सिंह को नवीन कुमार सिंह के घर पर दिए और उन्हें वहीं छोड़ दिया। बाद में राज के पिता त्रिभुवन नारायण सिंह से 2.85 लाख रुपये ज़ब्त किए गए।”

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों को खुशखबरी दी है। उन्होंने सोमवार को कहा कि CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले 2.3 लाख लोगों में से अब तक 23,000 (यानी 10 प्रतिशत) लोगों को नागरिकता प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं। शुभेंदु अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि आवेदनों पर सुनवाई जल्द ही पूरी हो जाएगी। पढ़ें पूरी खबर