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रहस्यमयी नौका के मलबे की खोज जारी

अरब सागर में भारतीय तटरक्षक बल के पीछा किए जाने के बाद विस्फोट करने वाली रहस्यमयी नौका के मलबे और उस पर सवार चार लोगों के शव खोजने का काम चल रहा है। मलबा उन लोगों के इरादे के बारे में नतीजे पर पहुंचने में जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। तटरक्षक बल ने ‘प्रवासी […]

Author January 4, 2015 9:17 AM
अधिकारियों ने बताया कि दो घटनाओं के बीच बीते तीन माह में कराची और थाईलैंड में बैठे आकाओं के फोन नंबरों पर लगातार निगाह रखी जाती रही। इन नंबरों को लगतार इंटरसेप्शन मोड पर रखा गया था। (फाइल फ़ोटो-पीटीआई)

अरब सागर में भारतीय तटरक्षक बल के पीछा किए जाने के बाद विस्फोट करने वाली रहस्यमयी नौका के मलबे और उस पर सवार चार लोगों के शव खोजने का काम चल रहा है। मलबा उन लोगों के इरादे के बारे में नतीजे पर पहुंचने में जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। तटरक्षक बल ने ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ और ‘वाइब्रेंट गुजरात’ कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए गुजरात समुद्री सीमा पर गश्त और हवाई निगरानी बढ़ा दी है। अगले हफ्ते होने जा रहे इन कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई विदेशी नेता शामिल होंगे। तटरक्षक बल के कमांडर (उत्तर पश्चिम क्षेत्र) कुलदीप सिंह श्योराण ने पत्रकारों से कहा कि नौका के मलबे और इसके चालक दल के सदस्यों के शवों की खोज जारी है।

समुद्र में दो अन्य संदिग्ध नौकाओं से जुड़ी खबरों के बारे में उन्होंने कहा कि उनके पास इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने 31 दिसंबर और एक जनवरी की दरमियानी रात में चलाए गए अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि तटरक्षक बल ने नौका पर ध्यान केंद्रित किया क्योंकि उसे चालक दल के सदस्यों की पहचान के बारे में संदेह पैदा हुआ था क्योंकि वे अपने पहनावे से मछुआरे नहीं लग रहे थे और उनके पास मछली पकड़ने का जाल भी नहीं था।

श्योराण ने कहा-हमने नौका पर चार लोग देखे, वे कहीं से भी मछुआरे जैसे नहीं लग रहे थे, उन्होंने टी शर्ट और हाफ पैंट पहन रखी थी, और इससे हमें संदेह पैदा हुआ। आइसीजी ने कहा कि उन्होंने इस नौका को पकड़ने के लिए आदर्श अभियान प्रक्रिया (एसओपी) का पालन किया। खुफिया जानकारी मिली थी कि यह नौका कुछ गैरकानूनी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान के बंदरगाह शहर कराची से रवाना हुई थी।

नौका में उसी के चालक दल के सदस्यों ने आग लगा ली जिससे विस्फोट हुआ और बाद में नौका डूब गई। यह घटना 31 दिसंबर और एक जनवरी की दरमियानी रात को अरब सागर में पोरबंदर तट से करीब 365 किलोमीटर दूर तटरक्षक बल के पीछा किए जाने के बाद हुई। यह पूछे जाने पर कि क्या नौका पर सवार लोग आतंकवादी थे, उन्होंने कहा-भारत की कई खुफिया एजंसियां मिलकर इस घटना की जांच कर रही हैं। वे इसकी तह तक जाएंगी।

श्योराण ने कहा-हमें संदिग्ध नौका के बारे में (31 दिसंबर को) सुबह करीब साढ़े आठ बजे खुफिया सूचना मिली। हमने उस दिशा में अपना डोरनियर विमान और पोत रवाना किया और दोपहर एक बजे तक हमने नौका की सही तरह से पहचान कर ली। उन्होंने कहा-मध्यरात्रि के करीब, हमारा पोत ‘राजरतन’ नौका के पास पहुंचा और आदर्श अभियान प्रक्रिया का पालन करते हुए इसे रोकने का प्रयास किया। लेकिन आत्मसमर्पण करने के बजाय, नौका ने इधर-उधर जाना शुरू कर दिया और बत्तियां बंद कर लीं। हमने करीब डेढ़ घंटे तक उसका पीछा किया।

आइसीजी अधिकारी ने कहा कि बहुत देर पीछा करने के बाद, हमने चेतावनी के लिए गोलियां चलार्इं। लेकिन नौका नहीं रुकी। हमने चेतावनी के लिए और गोलियां चलार्इं। कुछ समय बाद, नौका के चालक दल के सदस्यों ने इसमें आग लगा ली और बाद में वे उसके साथ डूब गए। आइसीजी कमांडर ने कहा कि नौका घटना और ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ और ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने गुजरात तट पर सतर्कता बढ़ा दी है। प्रवासी भारतीय दिवस का सात से नौ जनवरी और ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ का 11 से 13 जनवरी तक आयोजन होना है। उन्होंने कहा-हम चौबीसों घंटे अलर्ट रहते हैं। लेकिन इन सम्मेलनों के कारण हम अतिरिक्त अलर्ट हैं। हमारे पोत और विमान समुद्र में गश्त करने के अपने काम में जुटे हैं।

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