राज्यसभा और टीएमसी की प्राथमिकता से सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देब ने मीडिया से बात की है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कौन क्या कर रहा है? मेरा बंगाल की राजनीति में सीधे तौर पर कोई लेना देना नहीं है। मैं असम से हूं।”

बीजेपी में शामिल होने की संभावनाओं के सवाल पर उन्होंने कहा, “आज के दिन मैं एक मुक्त महिला हूं। हिमंत बिस्व सरमा के साथ मैंने कांग्रेस के दिनों से काम किया है। यह मुलाकात एक शिष्टाचार भेंट थी। मुझे दो-तीन दिन फ्री रहने दो।”

इस दौरान सुष्मिता देव ने कहा कि वो व्यक्तिगत और राजनैतिक दोनों कारणों से इस्तीफा दे रही हैं। वक्त आने पर इस बारे में बताएंगी। भविष्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि कल वो अपनी बहन और मां से मिलने असम जा रही हैं।

‘असम में ही काम करना है’

सुष्मिता देव ने कहा, “मेरी राजनीति असम में है। मैं बंगाल की जनता का आभार व्यक्त करती हूं। मुझे असम में ही काम करना है। यह ध्यान में रखकर मैंने निर्णय लिया है।”

विरोधियों द्वारा अवसरवादी करार दिए जाने के सवा पर उन्होंने कहा, “कौनअवसरवादी है, कौन नहीं, राजनीति में किसी को ये टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। आज आप किसी पर टिप्पणी कर रहे हैं, कल आप भी उसी स्थिति में हो सकते हैं।”

कौन हैं सुष्मिता देव?

सुष्मिता देव बहुत लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी में रही हैं। वह साल 2021 में टीएमसी में शामिल हुईं। टीएमसी ने सुष्मिता देव को साल 2021 में और फिर साल 2024 में राज्यसभा भेजा।

असम की बराक घाटी से आने वाली सुष्मिता देव कांग्रेस के नेता रहे संतोष मोहन देव की बेटी हैं। संतोष मोहन देव केंद्र सरकार में कई बार मंत्री रहे थे। सुष्मिता देव साल 2014 में कांग्रेस के टिकट पर असम की सिल्चर लोकसभा सीट से चुनाव जीती थीं। हालांकि वह साल 2019 में चुनाव हार गईं।

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ममता बनर्जी की सोनिया गांधी से मुलाकात के एक दिन बाद टीएमसी के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें