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सुषमा स्वराज आज संसद में खोलेंगी कांग्रेस की पोल!

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस के एक नेता ने उनसे कोयला घोटाले के आरोपी संतोष बागरोड़िया को राजनयिक पासपोर्ट देने के लिए दबाव डाला था...

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (PTI Photo)

संसद के अंदर कांग्रेस की अगुआई में विपक्ष के वार झेल रही सरकार अब पलटवार की रणनीति बना रही है। विपक्ष के आरोपों पर रक्षात्मक होने के बजाए सरकार ने कांग्रेस की पोल खोलने की चेतावनी दी है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस के एक नेता ने उनसे कोयला घोटाले के आरोपी संतोष बागरोड़िया को राजनयिक पासपोर्ट देने के लिए दबाव डाला था। सुषमा ने कहा, ‘कांग्रेस का एक वरिष्ठ नेता कोयला घोटाले के आरोपी संतोष बागरोड़िया को राजनयिक पासपोर्ट देने के लिए मुझ पर जबर्दस्त दबाव बना रहा था मैं नेता के नाम का खुलासा सदन में करूंगी’।

कोयला घोटाले से संबंधित मामला देख रही विशेष अदालत ने पूर्व कोयला राज्य मंत्री बागरोड़िया को मंगलवार को आरोपी के रूप में समन जारी किया था। उन्हें यह समन एएमआर आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र में बांडेर कोयला ब्लॉक आबंटन से जुड़े मामले में जारी किया गया था। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और भाजपा शासित दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बचाव में मजबूती के साथ सामने आते हुए सरकार ने इनके खिलाफ जांच की विपक्ष की मांग को ठुकरा दिया और कहा कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा है। विपक्ष इन मुद्दों पर संसद को बाधित कर रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वह तर्कों पर कमजोर और हंगामे में अव्वल है।

कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के आक्रामक रुख के कारण बुधवार को संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। वे ललित मोदी मामले व व्यापमं घोटाले में सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे व शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफों की मांग कर रहे थे। दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और लोकसभा की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद और राज्यसभा की कार्यवाही चार बार के स्थगन के बाद अंतत: लगभग दो बजे दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इसके कारण न तो किसी सदन में प्रश्नकाल हो सका और न ही कोई अन्य विधायी कामकाज। सत्ता पक्ष इन सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए तैयार था। लेकिन विपक्ष का कहना था कि संबंधित मंत्री और मुख्यमंत्रियों के इस्तीफा दिए जाने के बाद ही चर्चा हो सकती है।

लोकसभा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सहित सभी पार्टी सदस्य काली पट्टी बांधकर आए थे। कांग्रेस, राजद, राकांपा और आप के सदस्यों ने आसन के पास आकर ‘नहीं चलेगी, नहीं चलेगी, भ्रष्ट सरकार नहीं चलेगी’ के नारे लगाए। वाम दल के सदस्य भी आसन के सामने आकर नारे लगा रहे थे। विपक्षी सदस्यों के आसन के समक्ष दिखाए जा रहे पोस्टकार्डों पर लिखा था कि बड़े मोदी मेहरबान तो छोटे मोदी पहलवान, पीएम चुप्पी तोड़ो और मोदीजी 56इंच दिखाओ, सुषमा, राजे को तुरंत हटाओ।

राज्यसभा में इस विषय पर सोमवार से ही हंगामा शुरू हो गया था जबकि लोकसभा में उसके वर्तमान सदस्य दिलीप सिंह भूरिया के निधन के कारण उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई थी। लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के खिलाफ अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बावजूद हंगामा जारी रहा। टीआरएस सदस्यों ने भी तेलंगाना के लिए अलग से हाई कोर्ट की मांग को लेकर आसन के समक्ष आकर पर्चे दिखाए। सुबह 11 बजे लोकसभा में विपक्ष के यह मुद्दा उठाए जाने के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में मौजूद थे। बाद में मोदी मौजूद नहीं थे लेकिन सुषमा स्वराज गृह मंत्री राजनाथ सिंह और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ सत्ता पक्ष की ओर अग्रिम पंक्ति में बैठी थीं। अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विपक्षी सदस्यों के इस आचरण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि वे सदस्यों के अमर्यादित व्यवहार से बेहद चिंतित हैं।

राज्यसभा में कुछ सदस्यों ने मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले को लेकर भी सरकार को घेरने का प्रयास किया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। लेकिन सरकार ने कहा कि यह राज्य से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए इस पर उच्च सदन में चर्चा नहीं हो सकती। सदन के नेता अरुण जेटली ने व्यापमं को राज्य का विषय बताते हुए कहा कि अगर सदन में किसी राज्य के विषय को उठाने की इजाजत दी जाती है तो हम केरल, हिमाचल प्रदेश, असम व गोवा जैसे राज्यों के विषयों को भी चर्चा के लिए उठाएंगे।

ललित मोदी मामले पर सोमवार को ही आसन की ओर से चर्चा की अनुमति दिए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सदन में सुषमा स्वराज के मुद्दे पर फौरन चर्चा कराई जानी चाहिए। हम चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं। लोकसभा में कई विपक्षी सदस्यों ने कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस दिए थे जिन्हें आसन ने खारिज कर दिया।

विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पहले उन सदस्यों को अपनी बात रखने की अनुमति दी जाए जिन्होंने कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस दिए हैं। इसके बाद उपसभापति पीजे कुरियन ने बसपा प्रमुख मायावती को अपनी बात रखने का मौका दिया। मायावती ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि इस मामले ने ‘न खाऊंगा और न खाने दूंगा’ जैसे दावे करने वालों को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने राजस्थान व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि इसके बाद ही निष्पक्ष जांच हो पाएगी।

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने व्यवस्था के सवाल के नाम पर व्यापमं का मामला उठाते हुए कहा कि इस घोटाले में मौतें केवल एक राज्य में नहीं हुई हैं। इसलिए इस मामले में केंद्र की भी जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा कि संसद का काम सरकार को जवाबदेह बनाना है।

जद(एकी) नेता शरद यादव ने कहा कि पहले भी नेताओं ने आरोप लगने पर इस्तीफा दिया है। हवाला मामले में नाम आने के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने भी इस्तीफा दिया था। कांग्रेस के आनंद शर्मा के ललित मोदी मामले में प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग किए जाने पर जेटली ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि आप अभी चर्चा कीजिए, हम अभी जवाब देंगे।

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