ताज़ा खबर
 

भाजपा में चर्चा तेज, क्‍या मार्गदर्शक मंडल के सदस्‍य लड़ेंगे अगला चुनाव?

जब भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है, तब इस बात की चर्चाएं हो रही हैं कि क्या मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ नेता आगामी लोकसभा चुनाव में फिर से सक्रिय राजनीति का रुख कर सकते हैं?

Author Published on: December 2, 2018 11:22 AM
आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की मार्गदर्शक मंडल से क्या सक्रिय राजनीति में होगी वापसी? (express photo archive)

भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने हाल ही में आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। उसके बाद से ऐसी चर्चाएं हैं कि क्या भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और शांता कुमार आगामी लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे? राजनीति के जानकारों की मानें तो इसके आसार बेहद कम हैं। दरअसल हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर उनके घर जाकर मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली, लेकिन इन दौरान पीएम मोदी और लालकृष्ण आडवाणी के बीच बेहद कम बातचीत हुई। मुलाकात में पीएम मोदी, आडवाणी के परिजनों के साथ ही बातें करते रहे।

वहीं मुरली मनोहर जोशी की बात करें तो वह पार्लियामेंट्री एस्टिमेट कमेटी के चेयरमैन हैं। संसदीय एस्टिमेट कमेटी के कारण ही सरकार को बीते दिनों शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी, क्योंकि कमेटी द्वारा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की उस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसमें आरबीआई ने बड़े एनपीए वाले कॉरपोरेट हाउस की लिस्ट जारी की गई थी।

अहम बात ये है कि भाजपा की अपने इन वरिष्ठ नेताओं में कोई दिलचस्पी है, वो इसलिए भी नहीं दिखाई दे रहा क्योंकि बीते दिनों बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ इस मामले में साजिश रचने का अतिरिक्त मामला दर्ज किया गया था, और इस दौरान केन्द्र में सरकार भाजपा की थी और भाजपा द्वारा अपने वरिष्ठ नेताओं पर लगे मुकदमों का कोई विरोध भी नहीं किया गया था। इनके अलावा आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेता उम्र के उस पड़ाव पर भी पहुंच चुके हैं, जहां उनके लिए सक्रिय राजनीति में भाग लेना उनके लिए काफी मुश्किल है। आडवाणी जहां 91 साल के हैं, वहीं मुरली मनोहर जोशी की उम्र 84 साल है।

यदि उम्र और अन्य बातों को एक किनारे रख भी दिया जाए तो ये नेता अब अपना आकर्षण भी खो चुके हैं। पिछले काफी समय से दोनों नेता सक्रिय राजनीति से लगभग नदारद हैं और पार्टी के कार्यक्रमों में ही यदा-कदा दिखाई देते हैं। ऐसे में जब भाजपा को आगामी लोकसभा चुनावों में कड़ा टक्कर मिलने की संभावना जतायी जा रही है, तब भाजपा नेतृत्व अपने इन वरिष्ठ नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने के बारे में शायद ही विचार करे।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 मनमोहन सिंह को तमिलनाडु से राज्‍यसभा भेज सकती है कांग्रेस, पर स्‍टालिन उठा ही नहीं रहे फोन
2 पूर्व मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त बोले- नोटबंदी से काले धन पर नहीं लगी रोक, रिकॉर्ड रकम सीज
3 आरएसएस प्रचारक ने कहा- राम मंदिर सिर्फ संघ ही नहीं, पूरे भारत की जरूरत