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पाक को सैन्य मदद देते समय भारत से संबंधों का ध्यान रखे अमेरिका: सुषमा

भारत सरकार ने पाकिस्तान को अमेरिका के सैन्य हथियारों की ब्रिकी पर अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत करा दिया है। सरकार ने इस विषय में उससे भारत-अमेरिका

Author July 23, 2015 10:47 AM
सुषमा स्वराज (पीटीआई फोटो)

भारत सरकार ने पाकिस्तान को अमेरिका के सैन्य हथियारों की ब्रिकी पर अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत करा दिया है। सरकार ने इस विषय में उससे भारत-अमेरिका संबंधों और भारत की सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखने को कहा है।

लोकसभा में अनंत कुमार हेगड़े के सवाल के लिखित जवाब में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, ‘सरकार भारत के राष्ट्रीय हितों से जुड़ी सभी गतिविधियों पर लगातार नजर रखती है और हमारी सुरक्षा व संरक्षा के लिए भी सभी जरूरी उपाय करती है’। विदेश मंत्री ने कहा कि अभी हाल ही में हमने नोट किया है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने 95.2 करोड़ डॉलर की अनुमानित लागत पर पाकिस्तान को एएस। जेड वाइपर अटैक हेलिकॉप्टर और एजीएम 114 आर हेलफायर मिसाइलों की संभावित विदेशी सैन्य हथियारों, उनसे जुड़े उपकरणों, उनके पुर्जों की ब्रिकी करने और जरूरी प्रशिक्षण व अन्य सहयोग देने के फैसले का अनुमोदन किया है।

सुषमा ने कहा, ‘भारत सरकार ने पाकिस्तान को अमेरिका के सैन्य हथियारों की ब्रिकी पर अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत करा दिया है। सरकार ने अमेरिका को लगातार यह सूचित किया है कि अमेरिका, पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने का फैसला लेने में भारत-अमेरिका संबंधों और भारत की सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले प्रभावों को अवश्य ध्यान में रखे’।

वहीं लोकसभा में चिराग पासवान और सुनील कुमार सिंह के सवाल के लिखित जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि राष्ट्रीय सरक्षरता मिशन के तहत तय लक्ष्यों का उद्देश्य 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक साक्षरता दर को 80 फीसद तक बढ़ाना और साक्षरता में बालक-बालिका अंतराल को दस फीसद तक कम करना है। उन्होंने कहा कि 2011 की पिछली जनगणना में साक्षरता दर 72.98 फीसद और बालक-बालिका अंतराल 16.25 फीसद बताया गया।

मंत्री ने कहा, ‘14 राज्यों व संघ शासित प्रदेशों ने 80 फीसद साक्षरता दर का लक्ष्य प्राप्त किया या पार किया है। इन राज्यों व संघ शासित प्रदेशों में केरल, लक्ष्द्वीप, मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, दमन दीव, अंडमन निकोबार द्वीप समूह, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, चंडीगढ़, पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम और तमिलनाडु शामिल हैं’। उन्होंने बताया कि दस राज्य और संघ शासित प्रदेश बालक-बालिका अंतराल को 10 फीसद तक लाने या उससे कम करने में सफल रहे हैं।

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