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हिन्दी को संरा की आधिकारिक भाषा बनाने में अड़चन नहीं: सुषमा

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने में धन कोई अड़चन नहीं है बल्कि इसके लिए 129 देशों का समर्थन चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि...

Author नई दिल्ली | September 1, 2015 9:20 AM
सुषमा स्वराज ने आज कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने में धन कोई अड़चन नहीं है बल्कि इसके लिए 129 देशों का समर्थन चाहिए। (पीटीआई फाइल फोटो)

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने में धन कोई अड़चन नहीं है बल्कि इसके लिए 129 देशों का समर्थन चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत का कद जिस तरह लगातार बढ़ रहा है, उससे निकट भविष्य में उसे समर्थन हासिल हो जाएगा।

सुषमा ने दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन का ब्यौरा देते हुए यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ये कहना सही नहीं है कि आर्थिक बोझ के कारण हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने में अड़चन है।’’

उन्होंने ये धारणा गलत बतायी कि जिस देश की भाषा को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलता है, उस देश को उसका आने वाला पूरा खर्च वहन करना पड़ता है। सुषमा ने कहा कि अगर ऐसा होता भी तो भारत इतना बड़ा देश है और ये खर्च उठाने का उसमें माद्दा है।

उन्होंने कहा कि ये खर्च हालांकि किसी एक देश को नहीं उठाना पड़ता और जिस भाषा को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया जाता है, उस पर आने वाला खर्च सभी देशों में बंटता है।

सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर आर्थिक बोझ की ही बात होती तो जापान कब से अपनी भाषा को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषाओं में शामिल कराना चाहता है और वह खर्च उठाकर ऐसा कर चुका होता।

सुषमा ने कहा कि किसी भाषा को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने के लिए कम से कम 129 सदस्य देशों के समर्थन की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव को जिस तरह 177 सदस्य देशों ने समर्थन दिया, उससे उम्मीद बंधी है कि आने वाले दिनों में हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा का दर्जा हासिल होने में मुश्किल नहीं आएगी।

उनसे सवाल किया गया था कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए 2003 से प्रयास हो रहे हैं लेकिन सरकारें ये दुहाई देती आयी हैं कि इससे आर्थिक बोझ बहुत बढ़ जाएगा इसलिए ये मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य बनाये जाने की स्थिति में हिन्दी को इस विश्व संगठन की आधिकारिक भाषा बनाने का रास्ता आसान हो जाएगा।

विदेश मंत्री ने कहा कि जैसे जैसे भारत का महत्व बढ़ रहा है, उससे उम्मीद है कि वह दिन जल्द ही आएगा, जब हिन्दी संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषाओं में से एक होगी।

संयुक्त राष्ट्र की फिलहाल छह आधिकारिक भाषाएं हैं, जिनमें अरबी, अंग्रेजी, रूसी, चीनी, फ्रेंच और स्पेनिश शामिल हैं।

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