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सुशील मोदी ने गिफ्ट में मिला माइक्रोवेव अवन लौटाया, राबड़ी बोलीं- सिर्फ उन्हें ही परेशानी है

सुशील मोदी ने विधायकों को इस आधार पर महंगे उपहार देने की आलोचना की कि वे गरीब हैं या सरकारी स्कूलों में छात्रों को दिए जाने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता की वे जांच करेंगे।

Author पटना | Updated: March 21, 2016 6:01 PM
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी (इंडियन एक्सप्रेस फोटो)

बिहार विधानमंडल के बजटीय सत्र के दौरान विभिन्न विभागों से दोनों सदनों के सदस्यों को महंगे तोहफे यथा मोबाईल फोन, माईक्रोवेव ओवन, सूटकेस दिए जाने की आलोचना के बीच बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पाण्डेय ने प्रदेश के लाखों शिक्षकों को वेतन भुगतान नहीं होने के विरोध में इन तोहफों को सोमवार (21 मार्च) को वापस कर दिया।

सुशील ने इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सोमवार (21 मार्च) को एक पत्र लिखकर कहा है कि अनेक वर्षों से बिहार सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा विधायकों एवं पार्षदों को बिहार विधान मण्डल के सत्र के दौरान उपहार दिये जाने की परिपाटी रही है। वर्तमान सत्र में माइक्रोवेव ओवन सहित विभिन्न विभागों द्वारा करीब 6-7 सूटकेस दिये गये हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखा है कि बिहार जैसे गरीब प्रदेश में विधानमण्डल के सदस्यों को विभिन्न विभागों द्वारा उपहार दिये जाने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि इसमें सरकार की बड़ी राशि का व्यय होता है। उपहारों की संख्या अत्यधिक होने के कारण सदस्यों द्वारा उनका सम्यक उपयोग भी नहीं किया जाता है और उन्हें कार्यकर्ताओं एवं अन्य लोगों के बीच वितरित कर दिया जाता है।

बिहार की पिछली राजग सरकार में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री रहे सुशील ने नीतीश को लिखे पत्र में उनसे अनुरोध किया है कि बिहार विधानसभा के अध्यक्ष एवं बिहार विधान परिषद के सभापति के विमर्श से कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुलाकर विभिन्न विभागों द्वारा उपहार दिये जाने की परम्परा पर रोक लगाने सम्बंधी निर्णय लिया जाये ताकि इस मद में व्यय होने वाली राशि का उपयोग राज्य के विकास में हो सके।

बिहार विधानमंडल के वर्तमान बजटीय सत्र के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा दोनों सदनों के सदस्यों को महंगे तोहफे यथा मोबाइल फोन, माईक्रोवेव ओवन, सूटकेस दिए हैं, जिसमें से शिक्षा विभाग द्वारा उपहारस्वरूप माईक्रोवेव दिया गया था।

चाहे वह सत्ता पक्ष या विपक्ष हो बजट सत्र के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा विधायकों और विधान पार्षदों के बीच उपहार स्वरूप वितरित किए गए मंहगे ट्राली बैग को उन्हें खुशीपूर्वक खींचते हुए तथा माईक्रोवेव ओवेन, सूटकेस आदि को अपने-अपने वाहनों में रखते हुए देखा गया।

शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी से उनके विभाग द्वारा सदन के सदस्यों को माईक्रोवेव दिए जाने के पीछे तर्क के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने अजीबोगरीब तर्क देते हुए गत 18 मार्च को कहा था कि विधायकों को माईक्रोवेव अपने-अपने क्षेत्रों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच अपने घरों में उसे गर्म कर और चखकर करने के लिए दिया गया है।

जब उनसे पूछा गया कि सरकार एक तरफ आर्थिक तंगी के कारण शिक्षकों को उनका वेतन समय पर नहीं दे पा रही है, ऐसे में विभाग द्वारा विधायकों और पार्षदों को उपहारस्वरूप माईक्रोवेव ओवन दिया जाना कहां तक तर्कसंगत है, चौधरी ने कहा कि इस पर अधिक खर्च नहीं आता इसलिए इसे अन्य विषयों से जोडा जाना न्यायोचित नहीं है।

उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि यह पुरानी परंपरा है और विधायक आर्थिक रूप से उतने सामर्थ्यवान नहीं है। ऐसे में उन्हें माईक्रोवेव ओवन दिये जाने से उनकी मदद होगी।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं सहित अन्य समस्याओं से जूझने के बावजूद प्रदेश के 19 विभागों ने बिहार विधानमंडल बजट सत्र के दौरान विधायकों और विधान पार्षदों के बीच महंगे तोहफे यथा मोबाईल फोन, टेबलेट और घड़ियां बांटी थी।

गत वर्ष विधायकों और विधान पार्षदों के बीच बांटे गए उन तोहफों में पथ निर्माण विभाग द्वारा दिया गया दस हजार रूपये का सैमसंग मोबाईल फोन, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दिया गया टैबलेट, शिक्षा एवं पर्यटन विभाग द्वारा दी गयी मंहगी घड़ियां, उद्योग विभाग द्वारा साड़ी और शर्ट के साथ जूट का बैग शामिल था।

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