'नेताओं को अपमानित करना नीतीश के राजनीति डीएनए का हिस्सा है' - Jansatta
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‘नेताओं को अपमानित करना नीतीश के राजनीति डीएनए का हिस्सा है’

सुशील कुमार मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधानसभा चुनाव में हारने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2010 में भोज रद्द कर नरेंद्र मोदी..

Author पटना | September 24, 2015 6:30 AM

भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधानसभा चुनाव में हारने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2010 में भोज रद्द कर नरेंद्र मोदी को अपमानित करने के मामले में नीतीश सरासर झूठ बोलने पर आमादा है।

नीतीश ने वर्ष 2010 में भाजपा की पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समय भाजपा और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मान में दिए गए भोज को रद्द कर देने के बारे में सोमवार को कहा था, ‘उनके मंत्रिमंडल में शामिल रहे सुशील कुमार मोदी ने उनसे कहा था कि नरेंद्र मोदी खाने के लिए नहीं आयेंगे। मैं अपने सहयोगी सुशील कुमार मोदी के चक्कर में फंस गया।’

नीतीश कुमार के उस बयान पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सुशील ने नीतीश के विधानसभा चुनाव में अपनी हार तय जान कर सहमने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2010 में भोज रद्द कर नरेंद्र मोदी को अपमानित करने के मामले में नीतीश सरासर झूठ बोलने पर आमादा है। अहंकार में अंधे होकर नेताओं को अपमानित करना उनके राजनीति डीएनए का हिस्सा बन गया है।

बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता सुशील ने कहा, ‘नीतीश का यह आरोप सरासर झूठा है कि उन्होंने ही उनसे भोज रद्द करने को कहा था। मैंने तो अंतिम क्षण तक उन्हें यह समझाने का प्रयास किया था कि जिन नेताओं के साथ उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रुप में काम किया है, उनका अपमान न करें। यह व्यवहार अतिथि सत्कार करने वाले बिहार के डीएनए में नहीं है। उनकी अहंकारी राजनीति के चलते राज्य में विकास ठप हुआ और राजनीतिक अस्थिरता पैदा हुई।’

उन्होंने आरोप लगाया कि सम्मान भोज को अचानक रद कर नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व का अपमान करने के कारण देश भर में नीतीश की निंदा हुई थी। इस मुद्दे की याद उन्हें पांच साल बाद चुनाव के समय आई है। हताश होकर वे अपने अहंकारी बर्ताव पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

सुशील ने आरोप लगाया कि भाजपा को अपमानित करने के लिए नीतीश ने नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने की एक फोटो अखबारों में छपने की मामूली बात पर तूफान खडा किया था। अब उन्हें बिहार को जंगलराज के हवाले करने वाले लालू प्रसाद के साथ फोटो छपने पर कोई एतराज नहीं। फोटो छपना तो एक बहाना था।

उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश अपनी महत्वाकांक्षा के लिए उसी समय गठबंधन तोडना चाहते थे लेकिन विकास को जारी रखने और जंगलराज की वापसी रोकने के लिए भाजपा ने अपमान का घूंट पी लिया। 2010 में जनता ने गठबंधन को बचाये रखने के कठिन फैसले का सम्मान किया था। 2015 में लोग नीतीश-लालू से बिहार को मुक्त करके भाजपा की सरकार बनाने के हमारे मिशन का भी समर्थन करेंगे।

सुशील ने आरोप लगाया कि नीतीश ने नरेंद्र मोदी ही नहीं उस मुलायम सिंह यादव को भी अपमानित किया जिन्होंने उन्हें महागठबंधन का नेता बनवाया। उनकी पार्टी सपा को मात्र 5 सीट देकर अपमानित किया गया। जब सपा और राकांपा को साथ लेकर महागठबंधन से अलग हो गए तब नीतीश सपा प्रमुख के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं। जार्ज फर्नांडीस, शिवानंद तिवारी और जीतन राम मांझी का अपमान कर नीतीश ने पत्तल में छेद करने की ही राजनीति की।

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