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मुंबई हमला: ‘जब तक पाक में बैठा 26/11 का मास्टरमाइंड फांसी नहीं चढ़ जाता, चैन नहीं मिलेगा’

लोग इस हमले की 9वीं बरसी पर भारत सरकार से यही मांग कर रहे हैं कि मास्टरमाइंड को भी फांसी पर लटकाया जाए।
मुंबई आतंकी हमला, ताज होटल (PTI फोटो)

मुंबई आतंकी हमले को आज पूरे 9 साल हो गए हैं, लेकिन इतने सालों बाद भी उस हमले की काली यादें आज भी उन लोगों को परेशान करती हैं, जिन्होंने 26 नवंबर 2008 का वो काला दिन अपनी आखों से देखा था। लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने वाले 10 आतंकियों ने उस दिन पाकिस्तान से आकर भारत की मायानगरी मुंबई को हिला दिया था। इस हमले में करीब 166 लोग मारे गए थे। ये भयानक और दुखद घटना आज भी लोगों के जहन में जिंदा है। इस हमले में शामिल आतंकी अजमल कसाब को तो फांसी दे दी गई है, लेकिन लोग इस पूरी वारदात के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को फांसी पर लटकते हुए देखना चाहते हैं।

उन लोगों ने जिन्होंने अपनी आंखों से मुंबई हमला देखा था, जिन लोगों ने आतंकियों की गोलियां झेली थीं, वे लोग इस हमले की 9वीं बरसी पर भारत सरकार से यही मांग कर रहे हैं कि मास्टरमाइंड को भी फांसी पर लटकाया जाए। देविका जो 2008 में महज 9 साल की थीं, कहती हैं कि जिस दिन उन्होंने कोर्ट में कसाब को देखा था उनका मन कर रहा था कि उसे गोली मार दें। डेक्कन क्रोनिकल के मुताबिक देविका को हमले के दौरान आतंकियों ने पैर पर गोली मारी थी, जिसके बाद उन्हें ठीक होने में पूरे 2 महीने लगे थे। देविका इस हमले की चश्मदीद गवाह हैं और वे उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने आतंकी कसाब की पहचान की थी।

इस हमले की 9वीं बरसी पर वे कहती हैं कि आज भी उनके जहन में उस काले दिन की याद कहीं दबी हुई है। उनका कहना है, ‘पूरी घटना आज भी मेरी आंखों के सामने आती है, कई बार। बहुत ही डरावनी और दर्दनाक यादें। मुझे आज भी उस दिन का हर क्षण याद है।’ देविका का कहना है कि भले ही कसाब को फांसी हो गई हो, लेकिन ये पूरा इंसाफ नहीं है और इंसाफ तब तक नहीं मिलेगा जब तक मुंबई में बैठा 26/11 का मास्टरमाइंड हाफिज सईद फांसी पर नहीं चढ़ जाता। उन्होंने कहा, ‘जब मैंने कोर्ट में कसाब को देखा था, मैं सहम गई थी। मैं चाहती थी कि उस वक्त मेरे हाथ में बंदूक होती तो मैं उसे मार देती। खैर, कसाब तो केवल एक मोहरा था। उम्मीद है कि किसी ना किसी दिन उस हमले के मास्टरमाइंड को भी पकड़ा जाएगा और फांसी दी जाएगी।’

इस हमले के एक और चश्मदीद गवाह मोहम्मद तौफीक के मन में भी इस काले दिन की यादें ताजा हैं। छत्रपति शिवाजी स्टेशन पर चाय बेचने वाले मोहम्मद तौफीक का कहना है कि इस घटना ने उनके दिमाग पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने 26 नवंबर 2008 का वो दिन याद करते हुए कहा, ‘मैं जब भी उस दिन को याद करता हूं मैं परेशान हो जाता हूं। मैंने उस दिन कई घायल लोगों को बचाया था। बहुत ही भयानक घटना थी। अब पूरे 9 साल हो गए हैं, लेकिन मैं बस उस दिन का इंतजार कर रहा हूं जब पाकिस्तान में बैठे मास्टरमाइंड को पकड़ा जाएगा।’

इस हमले में अपने परिवार के 6 सदस्यों को खोने वाले रहीम अंसारी का कहना है, ‘मेरे रिश्तेदारों के पास कोई मौका नहीं था कि वे वहां से बचकर भाग सकें। मैं इस बात से खुश हूं कि अपराधियों को या तो मार दिया गया या फिर सजा दे दी गई, लेकिन हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद अभी भी पाकिस्तान में है। ये बहुत ही अच्छा होगा कि भारत सरकार उसे पाकिस्तान से पकड़कर लाए और सजा दे।’

बता दें कि वह 26 नवंबर 2008 की काली रात थी जब पाकिस्तानी आतंकवादी समुद्र के रास्ते भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई घुस आए थे। इसके बाद इन आतंकियों जो किया वो मानव इतिहास में हिंसा का क्रूर अध्याय बन गया। आधुनिक हथियारों से लैस इन आतंकवादियों ने मुंबई के सीएसटी, नरीमन हाउस और ताज होटल में अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस घटना में कुल 166 लोग मारे गये थे। इनमें 18 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। मुंबई पुलिस ने आतंकियों को करारा जवाब देते हुए 9 हमलावरों को वहीं ढेर कर दिया था, जबकि आतंकी अजमल कसाब को तुकाराम ओम्बले ने जिंदा पकड़ा था, लेकिन इस दौरान आतंकियों की गोली से वह शहीद हो गये।

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