सूरत पुलिस ने टेक्सटाइल वर्कर्स के विरोध प्रदर्शन को भड़काने के आरोप में 26 लोगों को हिरासत में लिया। कपड़ा कारखानों के सैकड़ों श्रमिकों द्वारा बंद के आह्वान के बाद हुई झड़प के दो दिन बाद पुलिस ने मंगलवार को अशांति भड़काने के आरोप में 26 लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए अधिकांश लोग व्हाट्सएप ग्रुप चलाते थे जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को भड़काने के लिए किया गया था।
रविवार दोपहर को सूरत के अमरोली उपनगर में स्थित इंडस्ट्रियल एरिया वेदांत इको पार्क-2 में दो कढ़ाई कारखानों पर सैकड़ों श्रमिकों ने धावा बोल दिया। जब मालिक ने उनकी बात नहीं मानी तो उन्होंने बिजली काट दी जिससे पावरलूम इकाइयां ठप हो गईं। उन्होंने रविवार को साप्ताहिक अवकाश, काम के घंटे 12 से घटाकर 8 करने और वेतन वृद्धि की मांग की। सोमवार तक यह अशांति सचिन, उधना और पांदेसरा के दक्षिणी उपनगरों तक फैल गई जिसके बाद पुलिस से मदद मांगी गई।
अमरोली पुलिस स्टेशन में कार्यकर्ताओं के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गईं जिनमें उन पर दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, अतिक्रमण और भारतीय न्याय संहिता की अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।
श्रमिकों ने श्रम विभाग के अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं
अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद एलपीजी संकट से प्रभावित होकर श्रमिक अपने गृह राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा लौट गए जिसके चलते मार्च में सूरत का कपड़ा उद्योग लगभग ठप हो गया। मई तक ही कारखाने पूरी क्षमता से काम पर लौट पाए। मंगलवार दोपहर को आंदोलनकारी श्रमिकों ने अमरोली में पुलिस द्वारा बुलाई गई एक बैठक में श्रम विभाग के अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर जल्द ही कपड़ा कारखाने के मालिकों के साथ चर्चा की जाएगी।
जबरन फैक्ट्री बंद कर दी
रविवार दोपहर को जब प्रदर्शनकारी वेदांता इको पार्क की इकाइयों पर पहुंचे तो उन्होंने कथित तौर पर वहां के कर्मचारियों को परिसर खाली करने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। मालिक विशाल गोटी ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों से वहां से चले जाने का अनुरोध किया। इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने मेन बिजली आपूर्ति लाइन काट दी जिससे सभी मशीनें ठप हो गईं। गोटी ने अमरोली पुलिस स्टेशन में उन 250 से अधिक व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जिन्होंने रविवार और सोमवार को जबरन उनकी फैक्ट्री बंद कर दी थी।
अमरोली में घटना तब हिंसक हो गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारी श्रमिकों को रोकने की कोशिश की, जिन्होंने कथित तौर पर पत्थरबाजी का सहारा लिया। सूरत अपराध शाखा के एक पुलिस कांस्टेबल अतुलकुमार दुबे जिन्हें सिर में चोट आई जिसके बाद उन्होंने अमरोली पुलिस स्टेशन में 400-500 कपड़ा श्रमिकों की भीड़ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश फैलाने का आरोप
सोमवार दोपहर को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और सचिन के होजीवाला औद्योगिक क्षेत्र में चल रही फैक्ट्रियों को जबरन बंद करा दिया। फैक्ट्री मालिकों ने पुलिस को बुलाया जिसके बाद भीड़ तितर-बितर हो गई। पुलिस उपायुक्त (जोन 5) लखधीरसिंह ज़ाला ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हालात अब नियंत्रण में हैं और अमरोली तथा शहर के अन्य इलाकों में सभी कारखाने चालू हैं। पुलिस की एक टीम उद्योग मालिकों के संपर्क में है और हमने गश्त बढ़ा दी है। हमने उद्योग मालिकों से यह भी कहा है कि अगर उन्हें किसी तरह की परेशानी हो तो वे हमसे संपर्क करें।”
डीसीपी ज़ाला ने आगे कहा, “हमने पाया कि कार्यकर्ताओं के पास अपनी समस्याओं को उठाने के लिए कोई मंच नहीं था। कुछ लोगों ने इसका फायदा उठाया और सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश फैलाए। पुलिस पर पत्थरबाजी की घटना और एक पुलिस कांस्टेबल के घायल होने के मामले में हमने 26 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें से ज्यादातर व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन हैं जो भड़काऊ संदेश फैलाते हैं।”
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मध्य प्रदेश में स्कूली बच्चे अपनी क्लास से बाहर निकलकर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे। इनमें से कोई भी विरोध प्रदर्शन किसी छात्र संघ, शिक्षक संगठन या राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आयोजित नहीं किया था। इन सभी की अगुवाई स्कूली बच्चों ने की। वे सीधे अधिकारियों से संवाद करना चाहते थे। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
