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मेहुल चोकसी ने नरेंद्र मोदी पर कर डाली पीएचडी

मेहुल ने अपनी रिसर्च के लिए 450 लोगों का इंटरव्यू किया। जिसमें सरकारी अफसर, किसान, छात्र और राजनेता शामिल हैं। इस दौरान मेहुल ने प्रधान मंत्री के नेतृत्व की गुणवत्ता के बारे में सवाल किए।

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गुजरात के सूरत के एक छात्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर अपनी थीसिस जमा की है। थीसिस जमा करने वाले छात्र का नाम मेहुल चौकसी है। राजनीतिक विज्ञान में मास्‍टर्स (एमए) सूरत के छात्र ने वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में उच्च अध्ययन करने के उद्देश्य से “नरेंद्र मोदी की केस स्टडी- सरकार में नेतृत्व ” विषय पर अपनी रिसर्च थीसिस प्रस्तुत की है। मेहुल ने 2010 से इस टॉपिक पर थीसिस लिखना शुरू किया। मेहुल के सुर्ख़ियों में आने की बड़ी वजह है उनका नाम। उनका नाम हीरा व्यापारी मेहुल चौकसी से मिलता है जो पंजाब नेशनल बैंक में लोन डिफॉल्टर हैं और देश छोड़कर भाग चुके हैं। मेहुल ने अपनी रिसर्च के लिए 450 लोगों का इंटरव्यू किया। जिसमें सरकारी अफसर, किसान, छात्र और राजनेता शामिल हैं। इस दौरान मेहुल ने प्रधान मंत्री के नेतृत्व की गुणवत्ता के बारे में सवाल किए।

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि प्रश्नावली में कुल 32 सवाल रखे गए हैं। 450 लोगों द्वारा दिए गए जवाबों के बाद पाया गया कि 25 प्रतिशत का मानना ​​था कि मोदी के भाषण सबसे अधिक आकर्षक हैं, जबकि 48 फीसदी लोग मानते हैं कि प्रधानमंत्री की राजनीतिक मार्केटिंग अच्छी कारते है। बता दें चोकसी वकील भी हैं। वे वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कला विभाग के नीलेश जोशी के मार्गदर्शन में अपनी पीएचडी कर रहे हैं। प्रोफेसर नीलेश जोशी ने कहा- ‘ये टॉपिक काफी इंट्रेस्टिंग था। हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जब कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर हो तो उनके बारे में निष्पक्ष होकर लिखना मुश्किल हो जाता है।’ प्रोफेसर ने कहा- ‘लोगों तक पहुंचना और उनसे जवाब पूछना भी चुनौती से कम नहीं था।’

पीएम मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब मेहुल ने अपनी रिसर्च शुरू की थी। मेहुल ने बताया तब उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी से जुड़े सवाल पूछे थे। जहां 51 प्रतिशत लोगों ने पॉजीटिव वहीं 34.25 प्रतिशत लोगों ने नेगेटिव फीडबेक दिए थे। 46.75 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि पॉपुलेरिटी के लिए लीडर को ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जो जनता के लिए सही हों। 81 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति ही प्रधानमंत्री होना चाहिए। 31 प्रतिशत लोगों ने प्रमाणिकता और 34 प्रतिशत लोगों ने पारदर्शिता को अहमियत दी।

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