संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। हालांकि एनसीपी (शरद पवार) दो धड़ों में बंटती हुई दिखाई दे रही है। एक तरफ जहां शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है कि अगर परिसीमन बिल में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने का जिक्र होता है तो उनकी पार्टी समर्थन पर विचार कर सकती है। वहीं अब पार्टी के विधायक रोहित पवार ने समर्थन से इनकार किया है।
रोहित पवार ने परिसीमन बिल का किया विरोध
रोहित पवार ने कहा, “कल से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में रूलिंग पार्टी का पहला मकसद ‘परिसीमन बिल’ को पास कराना पक्का करना है। इसे हासिल करने के लिए वे मीठी-मीठी बातों से सीटों में 50 परसेंट बढ़ोतरी का वादा करके राज्यों को लुभा सकते हैं। हालांकि, अगर हम नंबरों के इस जाल में फंस जाते हैं और बिल का समर्थन करते हैं, तो लोकसभा और विधानसभा के चुनाव क्षेत्रों को राजनीतिक फ़ायदे के लिए मैनिपुलेट किया जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे म्युनिसिपल चुनावों में वार्ड रीस्ट्रक्चरिंग होती है।”
संसद के मॉनसून सेशन से पहले विपक्ष में एक और फूट का संकेत देते हुए शरद पवार की पार्टी NCP(SP) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन बिल का समर्थन करने पर विचार करेगी, अगर यह सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी पक्का करता है।
सुप्रिया सुले की यह बात उन खबरों के बीच आई है कि NCP(SP) के सांसदों और विधायकों का एक ग्रुप सत्ताधारी बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के साथ गठजोड़ के लिए तेज़ी से दबाव डाल रहा है।
‘बीजेपी कर सकती है हेरफेर’
रोहित पवार ने कहा कि यह रीस्ट्रक्चरिंग सिर्फ़ सत्ता बनाए रखने के लिए की जाएगी, भौगोलिक सीमाओं या संवैधानिक ढांचे की परवाह किए बिना, और असम में चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने दावा किया, “2016 से BJP ने अपने पावर इक्वेशन को अलाइन करने के लिए चुनाव क्षेत्रों में हेरफेर करने के तरीके पर अनुभवी पूर्व अधिकारियों की मदद से पहले ही एक स्ट्रैटेजी बना ली है। वे अब सिर्फ़ इस बिल के पास होने का इंतज़ार कर रहे हैं।”
रोहित पवार ने कहा कि जब तक ऐसा नहीं होता, BJP विपक्ष के साथ मेल-जोल का दिखावा करेगी, अलग-अलग वादों का लालच देगी, विपक्ष को भरोसे में लेने का दिखावा करेगी और डेमोक्रेसी की बात करेगी, लेकिन एक बार बिल पास हो जाने के बाद, वे विपक्ष को उतनी ही आसानी से हटा देंगे, जितनी आसानी से शरीर से मक्खी उड़ाई जाती है, और उनकी तानाशाही वाली सोच फिर से सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा, “इसी सोच से प्रेरित होकर, वे संविधान पर हमला करने की ज़ोरदार तैयारी कर रहे हैं- एक तरफ परिसीमन और दूसरी तरफ SIR। सभी को ध्यान से सोचने की ज़रूरत है कि इस साज़िश को नाकाम करना है या बिल का सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करके इसे कामयाब होने देना है।”
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संजय राउत ने कहा है कि उन्होंने सांसद सुप्रिया सुले से बात की है और वह भी मीडिया रिपोर्ट्स में जो खबरें छप रही है, उससे हैरान हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
