Parliament Session: संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन में एक बड़ी फूट के संकेत मिलने लगे हैं। ये संकेत महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर सरकार ये सुनिश्चित करती है, कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समानता के साथ 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, तो उनकी पार्टी केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का समर्थन करने पर विचार करेगी
सुप्रिया सुले का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब एनसीपी (एसपी) के सांसदों और विधायकों के कुछ गुट केंद्र और महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।
बीजेपी और एनडीए के कई नेताओं से बातचीत
पिछले कई दिनों से एनसीपी (एसपी) के नेताओं और वरिष्ठ बीजेपी नेताओं की अहम बैठकें हुई है, जिसके चलते एनसीपी (एसपी) के अगले कदमों को लेकर मीडिया और राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हो रही है। संसद का सत्र 20 जुलाई से शुरू होने के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने दो-तिहाई बहुमत जुटाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
इसके जरिए महिलाओं के लिए आरक्षण को 2029 तक आगे बढ़ाने वाले नए संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराए जाने की तैयारियां की जा रही है। इसके साथ ही लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए परिसीमन विधेयक भी काफी चर्चा में है। मोदी सरकार दो तिहाई विधेयक के जरिए महिला आरक्षण और परिसीमन वाले विधेयकों को पारित कराने की कोशिश कर सकती है। ये दोनों ही वो बिल हैं, जो कि पिछले बजट सत्र के दौरान विपक्षी एकता के चलते पारित नहीं हो पाए थे। विपक्षी गुट में शामिल एनसीपी (SP) ने भी उस समय संविधान संशोधन वाले बिलों के विरोध मतदान किया था।
सुप्रिया सुले ने क्या-क्या कहा?
बुधवार को सुप्रिया सुले ने बताया, “अगर केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक में संशोधन करके सीटों की संख्या में 50% की वृद्धि करती है, तो हम इसका समर्थन करेंगे। मैं जो कह रही हूं, वह कोई नई बात नहीं है। हम हमेशा से यही कहते आए हैं कि अगर ये संशोधन लाए जाते हैं तो हम विधेयक का समर्थन करेंगे। हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।”
हालांकि, बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सुप्रिया सुले ने अपने रुख में नरमी दिखाई। उन्होंने कहा, “हमें अभी तक परिसीमन पर कोई विधेयक प्राप्त नहीं हुआ है। पहले जब विधेयक पेश किया गया था, तब विपक्ष ने सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि का संशोधन उठाया था। जब भी विधेयक हमारे सामने पेश किया जाएगा, हम इंडिया ब्लॉक की पार्टियों के साथ इस पर चर्चा करेंगे। हम सामूहिक निर्णय लेंगे। यह महत्वपूर्ण है कि परिसीमन का फार्मूला भी हमारे सामने पेश किया जाए और हमें बताया जाए कि नया सीमांकन कैसे किया जाएगा।”
कुछ घंटों बाद सुप्रिया सुले ने अपने रुख को और स्पष्ट किया। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “परिसीमन के मुद्दे पर एनसीपी (एसपी) के रुख के बारे में मीडिया के कुछ हिस्सों में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट गलत और अटकलबाजी पर आधारित हैं। मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि न तो मैंने और न ही पार्टी ने इस विषय पर किसी भी मीडिया संगठन के साथ कोई आधिकारिक चर्चा की है।”
50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की मांग
महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कहा, “संवैधानिक महत्व के हर मुद्दे की तरह हमारी पार्टी का रुख पार्टी के भीतर और हमारे सहयोगी दलों, इंडिया गठबंधन के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही तय होता है, चूंकि अभी तक ऐसा कोई विधेयक उपलब्ध नहीं कराया गया है, इसलिए इस में कोई अटकलबाजी नहीं होनी चाहिए।”
सुप्रिया सुले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया कि जब यह विधेयक पहली बार संसद में पेश किया गया था, तब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), समाजवादी पार्टी (एसपी) और डीएमके सहित कई विपक्षी दलों ने सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि की मांग उठाई थी। उन्होंने कहा, “टीएमसी, एसपी और डीएमके समेत हम सभी ने यही रुख अपनाया था। यह कोई ऐसी बात नहीं है जो पहली बार कही जा रही हो।”
एनसीपी में अटकलों पर क्या कहा?
एनसीपी (एसपी) के विधायकों द्वारा एनडीए में शामिल होने या एनसीपी में विलय करने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर सुप्रिया सुले ने कहा कि पार्टी के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा, “किसी ने भी इस बारे में नहीं पूछा है, न ही हमारे किसी नेता ने दल-बदल की इच्छा व्यक्त की है। हम सभी शरद पवार के साथ एकजुट हैं और शरद पवार द्वारा लिए जाने वाले हर निर्णय का पालन करेंगे।”
सुप्रिया सुले ने बीजेपी के साथ एनसीपी (एसपी) की करीबी और मंगलवार देर रात पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ हुई मुलाकात की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, “जब मैं संसदीय समिति की बैठक के लिए लखनऊ में थी, तब मैंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से खुलेआम मुलाकात की। अगर हमारी पार्टी वाकई बीजेपी के साथ गठबंधन करना चाहती, तो हम खुलेआम मुलाकात नहीं करते।”
दिग्गजों की सीक्रेट मीटिंग की चर्चा
शरद पवार के मुंबई स्थित आवास पर उनसे मुलाकात करने के कुछ घंटों बाद जयंत पाटिल ने सीएम देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात की थी। बीजेपी की सहयोगी एनसीपी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल पटेल ने भी उसी रात मुख्यमंत्री फडणवीस से अलग-अलग मुलाकात की, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बदलाव को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गईं।
सूत्रों ने बताया कि ये बैठकें एनसीपी (एसपी) के भीतर मंथन को लेकर हुई है, क्योंकि पार्टी के 10 विधायकों में से कम से कम आधे विधायक एनडीए में शामिल होने के पक्ष में हैं। इसके साथ ही यह तर्क दे रहे हैं कि विपक्ष में रहने से उनके निर्वाचन क्षेत्रों के लिए विकास निधि और प्रशासनिक स्वीकृति काफी मुश्किल मानी जा रही है।
एनसीपी के मर्जर की चर्चा
हालांकि जयंत पाटिल ने देवेंद्र फड़नवीस के साथ अपनी मुलाकात को कम महत्व देने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री से इस्लामपुर नगर परिषद के अध्यक्ष को अयोग्य घोषित करने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मिला था। मुझे तटकरे, पटेल और मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं है।” उन्होंने एनसीपी के साथ विलय की बातचीत की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “विलय की किसी भी योजना के संबंध में मेरी सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल से कोई मुलाकात नहीं हुई है। अजीत पवार के निधन के बाद ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है।”
एनसीपी (एसपी) के एनडीए में शामिल होने की संभावना को लेकर राजनीतिक चर्चा तब और तेज हो गई जब हाल ही में छह शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा सांसदों ने सरकारी काम की स्वीकृति और फंडिंग सहज बनाने के लिए शिवसेना एकनाथ शिंदे का गुट जॉइन कर लिया था। सूत्रों के अनुसार, इससे एनसीपी (एसपी) के अंदर भी कई विधायकों और सांसदों के मन में भी एनडीए में जाने की इच्छा जगने लगी थी, और इसीलिए पार्टी में एक बार फिर से एनसीपी के मर्जर या उसके एनडीए में जाने की चर्चा होने लगी।
हालांकि महाराष्ट्र की छह प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में सबसे छोटी पार्टी एनसीपी (एसपी) है, जिसके पास 10 विधायक और आठ लोकसभा सांसद हैं, लेकिन इसकी संसदीय शक्ति महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि एनडीए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रहा है, जिससे दो तिहाई बहुमत की जरूरत वाले बिलों को आसानी से पारित किया गया।
यह भी पढ़ें: परिसीमन बिल के समर्थन के लिए तैयार शरद पवार की पार्टी लेकिन रख दी एक शर्त, बीजेपी संग गठबंधन के सवाल पर भी बोलीं सुप्रिया सुले
महाराष्ट्र की सियासत में शरद पवार की पार्टी एनसीपी (एसपी) के भविष्य को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है। मीडिया में इस तरह की रिपोर्ट आई हैं कि शरद पवार की पार्टी के कई विधायक बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होना चाहते हैं। पढ़िए पूरी खबरें…
