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जब हरीश साल्वे, फाली एस नरीमन हुए ट्विटर ट्रोल से तंग, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने याद दिलाया कानून

सुप्रीम कोर्ट में सांसदों और विधायकों द्वारा उन पर चलने वाले मामलों पर टिप्पणी करने के मामले में सुनवाई हो रही थी।

सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे (फाइल फोटो)

सोशल मीडिया पर ट्रोल और उनके द्वारा की जाने वाली गाली-गलौज और दुष्प्रचार कोई नई बात नहीं है लेकिन सुप्रीम कोर्ट में चल रही एक सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली तीन जजों की पीठ ने इस पर हैरानी जतायी। सुप्रीम कोर्ट सांसदों और विधायकों द्वारा उन पर चल रहे मामलों पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने से जुड़े मामले में सुनवाई कर रहा था। अदालत इस बात पर विचार कर रहा था कि सांसदों-विधायकों के ऐसे बयान क्या "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" तहत आते हैं जबकि उनसे मामले की जांच प्रभावित होने की आशंका रहती है। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने अदालत को बताया कि ट्विटर पर होने वाली गालीगलौज से परेशान होकर उन्होंने अपना अकाउंट डिलीट कर दिया है। वहीं न्यायविद् फाली एस नरीमन ट्विटर पर मौजूद नहीं हैं।

हरीश साल्वे में इस मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) हैं। साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ से कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब दूसरों की इज्जत तारतार करना नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ के एक जज डीवाई चंद्रचूड़ ने जब अदालत में पूछा कि न्यायविद् फाली एस नरीमन को ट्विटर पर अपशब्द कहे गये क्योंकि उन्होंने रोहिंग्या शरणार्थी मुसलमानों के लिए सुरक्षा की माँग की थी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने अदालत में कहा, “मैंने श्री नरीमन के खिलाफ किए जाने वाले कमेंट देखकर हैरान था। लोग कुछ भी कह रहे हैं। ये कैसे संभव है? आखिरकार वो इस अदालत के अधिकारी हैं और सम्मानित वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।” नरीमन भी सुप्रीम कोर्ट के एमिकस क्यूरी हैं।

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जस्टिस चंद्रचूड़ के सवाल के जवाब में हरीश साल्वे ने उन्हें बताया कि ट्विटर पर होने वाली गालीगलौज से तंग आकर उन्होंने अपना अकाउंट ही बंद कर दिया। साल्वे ने अदालत ने कहा, “ये परेशान कर देने वाला है। मैं किस्चियन कॉलेज के मुकदमे में पैरवी करके लौट रहा था। मैंने ढेर सारे अभद्र कमेंट देखे। मैंने अपना अकाउंट बंद कर दिया। वो निजी राय की आड़ में कुछ भी लिखते हैं और इसकी कोई जवाबदेही नहीं है।” साल्वे ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना कमेंट करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। सर्वोच्च अदालत साल्वे का जवाब सुनकर और परेशान हो गयी।

साल्वे का जवाब सुनकर फाली एस नरीमन ने कहा, “इसीलिए मैं इससे दूर ही रहता हूं। मेरे पास ट्विटर अकाउंट नहीं है इसलिए मैं काफी खुश रहता हूं।” इस पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने आपराधिक मानहानि और दूसरे की छवि बिगाड़ने से जुड़े अपने फैसले की याद दिलायी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हर कोई हर किसी को गाली दे रहा है और कई बार ये बर्दाश्त लायक लगता है। लेकिन जब आप पर हमला होता है तो आपको तकलीफ होती है। साल्वे जी कह रहे हैं कि उन्होंने ट्विट अकाउंट बंद कर दिया। नरीमन जी खुश हैं कि उनका अकाउंट नहीं है। लेकिन सम्मान की रक्षा अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता) का अंग है और मैंने अपने फैसले में यही कहा है।”

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