सुप्रीम कोर्ट 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर यानी व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क) लगाने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।
केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से यूपीआई के जरिये व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला किया है। हालांकि, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले रोजमर्रा के लेनदेन और कम पैसे के भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
यूपीआई के जरिये 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज तथा शेयर ब्रोकर एवं डीलरों के जरिये किए जाने वाले भुगतान पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा और इसकी भी अधिकतम सीमा भी 300 रुपये होगी।
व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, भले ही पैसा कितना भी हो। P2P लेनदेन यूपीआई के कुल लेनदेन की संख्या का 37 प्रतिशत और कुल लेनदेन मूल्य का 70 प्रतिशत है।
क्या कहा है याचिका में?
एडवोकेट अंजन दत्ता की याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच सुनवाई करेगी। दत्ता की ओर से दायर जनहित याचिका में केंद्र की 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को घोषित की गई एमडीआर व्यवस्था को चुनौती दी गई है। याचिका में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है।
याचिका में कहा गया है कि यह धारा एग्जीक्यूटिव (कार्यपालिका) को बिना किसी स्पष्ट गाइडलाइन के यह तय करने का अधिकार देती है कि किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों को ‘नो-चार्ज प्रोटेक्शन’ (बिना शुल्क वाली सुरक्षा) मिलेगी।
याचिकाकर्ता ने यूपीआई ट्रांजेक्शन और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि नोटिफिकेशन में RuPay डेबिट कार्ड के लिए बिना किसी मौद्रिक सीमा (monetary ceiling) के ‘नो-चार्ज प्रोटेक्शन’ को जारी रखा गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह फ्रेमवर्क मनमाना और भेदभावपूर्ण है। इससे व्यापारियों, खासकर कम मार्जिन वाले व्यापारियों पर बुरा असर पड़ सकता है। याचिका में इस फ्रेमवर्क को रद्द करने या इस पर रोक लगाने की मांग की गई है क्योंकि यह 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजेक्शन पर एमडीआर लगाता है।
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गाजियाबाद के व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर “UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करेंगे” के नोटिस लगाने शुरू कर दिए हैं। व्यापारियों का यह विरोध 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
