पेगाससः सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल से पूछा, दो साल बाद जागे? कहा- जासूसी गंभीर मामला

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिका की कॉपी भारत सरकार को देने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में मंगलवार को सुनवाई तय की गई है।

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सुप्रीम कोर्ट में पेगासस मामले की हुई सुनवाई। (एक्सप्रेस फोटो- अमित मेहरा)

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पेगासस मामले पर दायर याचिकाओं को लेकर सुनवाई की। सर्वोच्च न्यायालय ने विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी के मुद्दे को अहम बताते हुए कहा कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही हैं, तो आरोप काफी गंभीर हैं। गौरतलब है कि इस मामले में चीफ जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच सुनवाई कर रही है।

दोनों जजों की बेंच ने यह प्रतिक्रिया याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के उस बयान पर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पेगासस एक खराब तकनीक है, जो कि हमारे जाने बिना ही हमारे जीवन में प्रवेश कर जाती है और यह भारतीय लोकतंत्र के निजता, सम्मान और मूल्यों पर हमले की तरह है।

इस दौरान सीजेआई रमण ने सिब्बल को टोकते हुए कहा कि आखिर दो साल बाद अचानक यह मुद्दा क्यों उछल आया। तो वरिष्ठ वकील ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में आने से पहले उन्हें इस जासूसी मामले के इतने प्रभाव की जानकारी नहीं थी। इसके बाद कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिका की कॉपी भारत सरकार को देने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में मंगलवार को सुनवाई तय की गई है।

देश में पिछले कुछ समय से विवाद का मुद्दा बने पेगासस जासूसी केस में लगभग हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस केस में जिन लोगों की कथित तौर पर जासूसी हो रही थी, उसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, रजिस्ट्रार के साथ-साथ अरबों रुपए के बैंक लोन लेकर फरार नीरव मोदी, बोफोर्स घोटाले के आरोपी क्रिश्चन मिशेल जैसे हाईप्रोफाइल आरोपियों के वकीलों के भी फोन नंबर शामिल है। इससे यह विवाद गहराता जा रहा है।

इसके अलावा लिस्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर, कुछ पूर्व न्यायाधीशों और सोशल एक्टिविस्टों के नाम सामने आने के बाद से ही संसद में भी विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर हंगामा कर रहा है। विपक्षी पार्टियों ने मांग की थी कि इस पूरे मामले की जेपीसी या कोर्ट की निगरानी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। हालांकि, केंद्र लगातार इसे मुद्दा मानने से इनकार करते बहस के लिए तैयार नहीं हुआ है।

300 से ज्यादा मोबाइल पेगासस की निगरानी में रखने का आरोप: बता दें कि पेगासस कथित जासूसी मामले की स्वतंत्र जांच के अनुरोध वाली एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा दायर याचिकाओं सहित 9 याचिकाओं पर फिलहाल सुनवाई चल रही है। ये याचिकाएं इजराइली कंपनी एनएसओ के स्पाइवेयर पेगासस के जरिए प्रमुख हस्तियों की जासूसी से जुड़ी हैं। एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संघ ने हाल ही में खुलासा किया है कि 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल फोन नंबर पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके निगरानी के संभावित लक्ष्यों की सूची में थे।

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