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आय से अधिक संपत्ति: वीरभद्र का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट में

सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित याचिका गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित..

Author नई दिल्ली | November 6, 2015 12:48 AM
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित याचिका गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दी। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका को अनावश्यक ‘शर्मिंदगी’ से बचाने के लिए यह फैसला जरूरी था। न्यायमूर्ति एफएमआइ कलीफुल्ला और न्यायमूर्ति उदय यू ललित के पीठ ने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट स्थानांतरित करने के निर्णय को लेकर सिंह की प्रारंभिक आपत्तियों को दरकिनार कर दिया। सिंह का तर्क था कि ऐसा करने से राज्य के हाई कोर्ट पर आक्षेप लगेगा।

पीठ ने कहा – हम मामले के गुणदोष पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे हैं परंतु न्याय और पक्षकारों के हित व संस्थान (न्यायपालिका) को शर्मसार होने से बचाने के लिए ही याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर रहे हैं। सीबीआइ की ओर से पेश अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मुख्यमंत्री को राहत देने के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस प्रकरण की सुनवाई करने वाले पीठ के जजों में से एक न्यायाधीश इस नेता से संबंधित एक मामले की सुनवाई से हट गए थे क्योंकि वे एक बार उनके मुवक्किल रह चुके हैं।

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राज्य सरकार के विरोध के बीच दोनों पक्षों की सहमति दर्ज करने के बाद अदालत ने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट स्थानांतरित कर दिया। पीठ ने इस मामले में हाई कोर्ट के न्यायाधीश और सीबीआइ का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील के खिलाफ लगाए गए आरोप-प्रत्यारोपों को हटाने का आदेश दिया। पीठ ने सीबीआइ को दिल्ली हाई कोर्ट में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश में संशोधन का अनुरोध करने की अनुमति प्रदान कर दी। सीबीआइ ने सिंह की याचिका हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से दिल्ली स्थानांतरित करने और राज्य के हाई कोर्ट का आदेश निरस्त करने का अनुरोध करते हुए स्थानांतरण याचिका और विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसा करने से राज्य के हाई कोर्ट की छवि खराब होगी और वादी को अपना मामला स्थानांतरित कराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस पर पीठ ने कहा – हम किसी के लिए भी किसी प्रकार की शर्मिंदगी नहीं चाहते हैं। हम अपने आदेश में ऐसा कुछ भी नहीं कहने जा रहे हैं। सिब्बल ने बाद में याचिका स्थानांतरित करने के लिए अपनी सहमति दे दी।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित मामले की स्थिति और तथ्यों को लेकर रोहतगी और सिब्बल के बीच तीखी झड़प हुई। सिब्बल का दावा था कि इस मामले में सिंह को कोई नोटिस नहीं दिया गया है। रोहतगी ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि औपचारिक रूप से नोटिस की अनिवार्यता खत्म कर दी गई थी क्योंकि मुख्यमंत्री के वकील पहले से ही इस मामले में पेश हो रहे थे।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को इस मामले में गिरफ्तारी से संरक्षण और अन्य राहत प्रदान करने के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआइ की दो याचिकाओं पर सिंह और अन्य को नोटिस जारी किए थे। हाई कोर्ट ने सीबीआइ को यह निर्देश भी दिया था कि इस दंपति से पूछताछ करने से पहले उसे इसकी सूचना दी जानी चाहिए।

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