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मीट व्यापार पर नए नियमों के खिलाफ सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार द्वारा मवेशियों के कारोबार नियमों परिवर्तन को लेकर जारी अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका पर 15 जून को सुनवाई करेगा।

Author नई दिल्ली | June 7, 2017 14:35 pm
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार द्वारा मवेशियों के कारोबार नियमों परिवर्तन को लेकर जारी अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका पर 15 जून को सुनवाई करेगा। सुनवाई इस आधार पर की जाएगी कि क्या यह अधिसूचना मुक्त व्यापार के अधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल फहीम कुरैशी के वकील सनोबर अली कुरैशी द्वारा मामले पर जल्द सुनवाई की मांग किए जाने पर 15 जून को सुनवाई का फैसला किया। वकील कुरैशी ने 23 मई को केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती देते हुए कहा कि आधिकारिक घोषणा कानून के उस प्रावधान के विपरित है, जो धार्मिक बलिदानों के लिए पशुओं की बिक्री की अनुमति देता है।

बता दें कि इन दिनों देशभर में बीफ पर राजनीति चरम पर है। राज्यों में बीजेपी सरकारें गोहत्या पर कानून सख्त करती जा रही है तो वहीं केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा लाया गया बुचड़खाने में पशु बिक्री पर रोक लगाने संबंधि नोटिफिकेशन का भी देश के कई हिस्सों में विरोध हो रहा है। दक्षिण के कई शहरों में बीफ पार्टी का आयोजन करके कई राजनीतिक दल सरकार के इस नोटिफिकेशन पर विरोध जता चुके हैं। ऐसे ही एक बीफ पार्टी तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित की गई है। तमिलनाडु का राजनीतिक दल थनथाई पेरियार द्रविड़ कड़गम पार्टी  ने सरकार के नोटिफिकेश के खिलाफ ये बीफ पार्टी दी।

सरकार अब इस सारे मसले पर अपने रुख में नरमी लाती दिख रही है। केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने साफ कह है कि कुछ लोग ये कह रहे हैं कि बीजेपी लोगों को शाकाहारी बनाने की कोशिश कर रही है। ये लोगों की इच्छा है कि वो क्या खाना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैं स्वयं मांसाहारी हूं। भोजन व्यक्तिगत इच्छा की पर निर्भर करता है। इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए। सरकार के इस नोटिफिकेशन के विरोध का स्वर पार्टी के अंदर भी उठने लगा है। इस नोटिफिकेश के खिलाफ बीजेपी की मेघालय युनिट के एक और नेता ने मंगलवार को इस्तिफा दे दिया है।  तो वहीं नोटिफिकेशन का असर सिर्फ भारत पर ही नहीं पूरे विश्व पर भी पड़ सकता है। वैश्विक व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि अगर कटान के लिए पशुओं की ब्रिकी पर फर्क पड़ा तो दुनिया में मांस की इसकी कीमतों में भारी इजाफा हो सकता है। वाल जर्नल स्ट्रीट की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सबसे बड़े मांस निर्यातक भारत में इस तरह के प्रतिबंध से मांस की कीमतें बढ़ेंगी।

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