राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। जस्टिस प्रशांत कुमार शर्मा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की अवकाशकालीन पीठ ने मामले को शुक्रवार (12 जून 2026) सुनने का आश्वासन दिया।

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की थी। सिंघवी ने मामले की तात्कालिकता का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई का अनुरोध किया जिस पर पीठ ने सहमति जताते हुए अगले दिन सुनवाई करने का भरोसा दिया।

मीनाक्षी की तरफ से सिंघवी ने कहा कि आज राज्यसभा चुनाव के नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है और अगर इसे जल्दी नहीं सुना गया तो छह साल इंतजार करना पड़ेगा। वहीं रिटर्निंग ऑफिसर की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने इसका विरोध किया।

अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। सुनवाई के दौरान अदालत याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी।

क्या है मामला

कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की तरफ से रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को गलत, पक्षपातपूर्ण और कानून के विरुद्ध बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है।

‘कांग्रेस के अंदर ही रची गई साजिश’

मध्य प्रदेश राज्य सभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को खारिज हो जाने के बाद भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि यह साजिश कांग्रेस के लोगों ने ही की है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीठासीन अधिकारी द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को खारिज करने को गैर-कानूनी बता रहे हैं। इसी बीच एक मीडिया रिपोर्ट में भाजपा के सूत्रों के हवाले से सनसनीखेज दावा किया गया है।

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भारतीय चुनावी लोकतंत्र में चुनावी हलफनामे को लंबे समय तक महज एक औपचारिक दस्तावेज माना जाता रहा है लेकिन पिछले दो दशकों में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों ने इसे मतदाताओं के ‘जानने के अधिकार’ का केंद्रीय आधार बना दिया है। उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामले, उसकी संपत्ति, देनदारियां और शैक्षणिक योग्यता जैसी जानकारियां अब केवल निजी विवरण नहीं रह गए हैं बल्कि लोकतांत्रिक पारदर्शिता का हिस्सा हैं। पढ़िए पूरी खबर…