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संथारा पर हाईकोर्ट की रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटाई

धार्मिक प्रक्रिया संथारा को गैरकानूनी करार देने के राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले पर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।

धार्मिक प्रक्रिया संथारा को गैरकानूनी करार देने के राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले पर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।

राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से जैन धर्म में प्रचलित संथारा को दंडनीय अपराध घोषित करने के फैसले पर रोक लगा दी है। इस प्रथा के तहत कोई व्यक्ति संथारा की प्रतिज्ञा लेने के बाद खाना-पीना छोड़कर मौत का इंतजार करता है। इस फैसले पर जैन समाज ने खुशी जताई है। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जैन समाज के लोग देशभर में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे।

मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू के अध्यक्षता वाले एक पीठ ने सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले पर स्थगनादेश देते हुए राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। पीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इससे जुड़ी अन्य लंबित मामलों की सुनवाई के बाद यह याचिका सुनवाई के लिए आएगी।

राजस्थान हाई कोर्ट ने 10 अगस्त को संथारा पर प्रतिबंध लगा दिया था। हाई कोर्ट ने इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 309 (आत्महत्या का प्रयास) के तहत अपराध घोषित कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि संथारा जैन समुदाय का मूलभूत धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, जिसे धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकारी देने वाली संविधान की धारा 25 के तहत रक्षित किया जाए।

हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन परिषद की याचिका में कहा गया है कि संथारा किसी का जीवन खत्म करने का प्रयास नहीं है बल्कि यह एक ऐसी प्रतिज्ञा है, जिसका मकसद कर्मों के जरिए आत्मा की शुद्धता है। इसे आत्महत्या के बराबर नहीं ठहराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से जैन समाज ने राहत महसूस की है। जैन समाज संथारा को धार्मिक प्रक्रिया मानता है।

हाईकोर्ट के फैसले से जैन समाज में भारी नाराजगी थी। इस फैसले के खिलाफ जैन समाज के दोनों पंथ दिगंबर और श्वेताबंर एकजुट हो गए थे। जैन समाज ने संथारा को आत्महत्या की श्रेणी में मानने पर एतराज जताते हुए इसे अपनी धार्मिक प्रथा बताया था। जैन समाज में इसके खिलाफ देश भर में प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया था।

सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद जैन समाज के कई प्रमुख नेताओं ने खुशी जताई है। आंदोलन की अपील करने वाले सकल जैन समाज के समन्वयक राजेंद्र के गोधा ने यहां कहा कि सुप्रीम कोर्ट में धर्म से जुड़े तथ्य पेश किए जाएंगे। संथारा और संलेखना जैन धर्म की सदियों से चली आ रही प्रथा है। संथारा और संलेखना जैन धर्म की सबसे पुरानी प्रथा है।

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