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अनिश्चितकाल के लिए नहीं कब्जा सकते पब्लिक प्लेस, शाहीन बाग प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में फरवरी में ही एक याचिका दायर हुई थी, जिसमें शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की मांग की गई थी।

supreme court, slums, railway lineसुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया। (पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शाहीन बाग प्रदर्शनों के खिलाफ दर्ज याचिकाओं पर सुनवाई की। सर्वोच्च न्यायालय ने इस दौरान कहा कि प्रदर्शनों के लिए सड़कों और सार्वजनिक स्थानों का घेराव अनिश्चितकाल के लिए नहीं किया जा सकता और ऐसे आंदोलनों को सिर्फ तय जगहों पर ही करने की इजाजत होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा, “सार्वजनिक बैठकों पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती, लेकिन इन्हें तय स्थानों पर ही आयोजित किया जाना चाहिए। लोगों के आने-जाने के अधिकार पर अनिश्चितकालीन रोक नहीं लगनी चाहिए।” जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रदर्शन के अधिकार का संतुलन आवाजाही के अधिकार के साथ होना चाहिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वकील अमित साहनी ने सुप्रीम कोर्ट में फरवरी में एक याचिका दायर की थी, इसमें मांग की गई थी कि शाहीन बाग और कालिंदी कुंज के बीच की जो सड़क प्रदर्शन की वजह से बंद है, उन्हें खुलवाया जाए। प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाया जाए या फिर कहीं और प्रदर्शन के लिए उन्हें जगह देकर वहां शिफ्ट किया जाए। तब भी कोर्ट ने कहा था कि लोग प्रदर्शन के लिए स्वतंत्र हैं, पर इन्हें पहले से तय स्थान पर किया जाना चाहिए, न कि सड़कों और पार्कों पर। इसके साथ ही कोर्ट ने शाहीन बाग में एक नवजात की मौत के मुद्दे को भी उठाया था।

प्रदर्शनकारियों ने क्यों जाम की थी सड़कें: केंद्र सरकार ने जब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को मंजूरी दिलाई थी, तब हजारों की संख्या में लोग देशभर में प्रदर्शन के लिए उतर आए थे। इस दौरान दिल्ली के शाहीन बाग, लखनऊ के घंटाघर और कई अन्य शहरों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। शाहीन बाग में सबसे लंबे समय तक प्रदर्शन जारी रहे। इस दौरान लंबे समय तक दिल्ली को नोए़डा से जोड़ने वाली सड़क बंद रही। हालांकि, कोरोना महामारी के फैलाव के साथ प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर होना पड़ गया था।

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