ताज़ा खबर
 

कर्ज पर ब्याज माफी संबंधी याचिका: केंद्र व आरबीआइ को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भेजा

’बैंकों ने कर्ज की अदायगी में छूट की अवधि को अब 31 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इस बाबत कर्ज की अदायगी में छूट की अवधि के लिए ब्याज पर लेवी की मांग को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को सात दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

Author नई दिल्ली | Published on: May 27, 2020 4:44 AM
रिजर्व बैंक ने कहा था कि ऐसे ऋण की वापसी के कार्यक्रम को इस अवधि के बाद तीन महीने आगे बढ़ाया जाएगा। लेकिन ऋण अदायगी से छूट की अवधि में बकाया राशि पर ब्याज यथावत लगता रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी की वजह से कर्ज की अदायगी में छूट की अवधि के लिए ब्याज पर लेवी की मांग को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक से जवाब मांगा। कोविड-19 की वजह से कर्ज की अदायगी में छूट की अवधि को अब 31 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। न्ययामूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एमआर शाह के पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र और आरबीआइ को नोटिस जारी किए और उन्हें एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने पीठ को सूचित किया कि सरकार ने पहली बार ऋण अदागयी में तीन महीने की छूट दी थी जो 31 मई तक थी। इस अवधि को अब तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि बैंकों से कर्ज लेने वालों को इस तरह से दंडित नहीं किया जाना चाहिए और इस अवधि के लिए बैंकों को कर्ज की राशि पर ब्याज नहीं जोड़ना चाहिए।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘रिजर्व बैंक के वकील ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया जो उन्हें दिया गया। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता भी इस बीच आवश्यक निर्देश प्राप्त करेंगे।’ यह मामला अब अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। कोरोना महामारी के मद्देनजर देशव्यापी पूर्णबंदी के अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पर अंकुश के इरादे से रिजर्व बैंक ने 27 मार्च को अनेक निर्देश जारी किए थे। रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को एक मार्च की स्थिति के अनुसार कर्जदारों पर बकाया राशि के भुगतान के लिए तीन महीने की ढील देने की छूट प्रदान की थी।

रिजर्व बैंक ने कहा था कि ऐसे ऋण की वापसी के कार्यक्रम को इस अवधि के बाद तीन महीने आगे बढ़ाया जाएगा। लेकिन ऋण अदायगी से छूट की अवधि में बकाया राशि पर ब्याज यथावत लगता रहेगा। यह याचिका आगरा निवासी गजेंद्र शर्मा ने दायर की है और इसमें रिजर्व बैंक की 27 मार्च की अधिसूचना के उस हिस्से को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया गया था जिसमें ऋण स्थगन की अवधि के दौरान कर्ज की राशि पर ब्याज वसूली का प्रावधान है।

याचिका के अनुसार, इस प्रावधान से कर्जदार के रूप में याचिकाकर्ता के लिए परेशानी पैदा होती है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीने के मौलिक अधिकार का अतिक्रमण करता है। शीर्ष अदालत ने 30 अप्रैल को रिजर्व बैंक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि उसके सर्कुलर में कर्ज भुगतान के संबंध में एक मार्च से 31 मई की अवधि के दौरान तीन महीने की ढील की व्यवस्था पर पूरी ईमानदारी से अमल किया जाए।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 संवेदनशील क्षेत्रों से पॉश इलाकों की ओर हुआ कोरोना का रुख
2 8 दिन में 11 साइकिल रिक्शा चालक 1,000 किमी की यात्रा कर गुरुग्राम से बिहार अपने घर पहुंचे
3 तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले 82 विदेशियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर