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गरीबों की तय राशि कहीं और खर्च होने पर सुप्रीम कोर्ट ने अचरज में

26000 करोड़ रुपए में से पांच हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। हमें नहीं मालूम यह धन कहां खर्च हुआ।
Author नई दिल्ली | April 13, 2017 01:16 am
रिक्शा चलाते गरीब बच्चें।

सुप्रीम कोर्ट ने देश में निर्माण क्षेत्र के श्रमिकों के कल्याण के लिए निर्धारित राशि कहीं और इस्तेमाल होने पर बुधवार को अचरज जताया। यह धनराशि देश के निर्धनतम लोगों के कल्याण के लिए थी। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि इस बारे में कोई रिकार्ड नहीं है कि करीब 26 हजार करोड़ रुपए की धनराशि में से पांच हजार करोड़ रुपए कैसे खर्च किए गए। अदालत ने इसके साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को इस मामले में दो हफ्ते के भीतर आडिट रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।  न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायूर्ति दीपक गुप्ता के पीठ ने अतिरिक्त महान्यायवादी मनिंदर सिंह से कहा-26000 करोड़ रुपए में से पांच हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। हमें नहीं मालूम यह धन कहां खर्च हुआ। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि यह धन चाय या भोजन पर खर्च नहीं हो। इसमें बहुत अधिक रकम शामिल है। यह धनराशि देश के गरीब से गरीब लोगों तक पहुंचनी थी। यह कहीं और ही जा रहा है। यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण मामला है। धन निर्धनतम लेगों तक पहुंचना चाहिए।

मनिंदर सिंह ने पीठ को बताया कि यह धन राज्य सरकारों के पास है और ऐसा नहीं है कि यह रकम गायब हो गई है। शीर्ष अदालत ने हालांकि टिप्पणी की कि जो कुछ बताया गया तो चौंकाने वाला है और केंद्र को इस स्थिति से निपटने के लिए समाधान खोजना चाहिए। पीठ ने कहा-जो कुछ भी हमें बताया गया वह बहुत ही चौंकाने वाला है। आपको समाधान खोजना होगा। यह 26 हजार करोड़ रुपए का मामला है।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील कोलिन गन्साल्वेज ने दावा किया कि इस धनराशि में से एक बड़ा हिस्सा हस्तांतरित किया जा चुका है और इसका इस्तेमाल दूसरे कामों में हो रहा है। पीठ ने अदालत में मौजूद नियंत्रक एवं महालेखा बाकी परीक्षक के एक अधिकारी से जानना चाहा, मोटे तौर पर कितनी रकम होगी। इस पर अधिकारी ने कहा कि यह करीब 28 हजार करोड़ रुपए होगा।

शीर्ष अदालत ने जब खर्च किए जा चुके पांच हजार करोड़ रुपए के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा-हम इस पर काम करेंगे और अपनी आडिट रिपोर्ट देंगे। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में अगली तारीख पांच मई निर्धारित कर दी। कैग ने इससे पहले अदालत को सूचित किया था कि वह निर्माण श्रमिकों के कल्याण के निमित्त धन के आडिट के बारे में ताजा स्थिति पर एक हलफनामा दाखिल करेगा। शीर्ष अदालत ने 2015 में केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा 27 हजार करोड़ रुपए की इस धनराशि का उपयोग नहीं करने पर अप्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा था कि इससे बुरा और कुछ नहीं हो सकता।

 

 

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