नवंबर 2005 के सोहराबुद्दीन शेख कथित एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को नोटिस जारी किया है जिसमें कि 21 पुलिसवाले शामिल हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
बता दें कि इस मामले के सभी 22 आरोपियों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मई 2026 में बरी कर दिया था। इसके बाद सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई रुबाबुद्दीन शेख ने आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की और सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है। इस मामले में 28 अक्टूबर को अब अगली सुनवाई होगी।
CJI की अगुवाई वाली बेंच कर रही सुनवाई
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच रुबाबुद्दीन शेख की अपील पर सुनवाई कर रही थी। रुबाबुद्दीन शेख की अपील पर सीनियर वकील डी एस नायडू सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर दलील दे रहे थे। उन्होंने कहा कि मैं 2010 से केस लड़ रहा हूं। मेरे कहने पर जांच भी ट्रांसफर कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कोर्ट समझता है कि बड़े पैमाने पर गवाह अपने बयान से पलट गए हैं। बता दें कि इस मामले में हाईकोर्ट में 92 गवाह अपने बयान से मुकर गए थे और यह एक गंभीर चिंता का विषय था।
2018 में सीबीआई अदालत ने किया था आरोपियों को बरी
इस मामले में सबसे पहले दिसंबर 2018 में विशेष सीबीआई अदालत ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाईयों ने बॉम्बे हाईकोर्ट ने में इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन 7 मई 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी सीबीआई अदालत के फैसले को बरकरार रखा था जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। उनके वकील ने बताया कि एक अन्य भाई नायबुद्दीन शेख ने भी याचिका दायर की है और दोनों मामलों को साथ सुनने का अनुरोध किया है।
अमित शाह के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अमित शाह को मामले से डिस्चार्ज किए जाने के फैसले पर भी दोबारा विचार करने का आग्रह किया था, लेकिन इस पर जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहले ही अंतिम रूप ले चुका है और इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता। बेंच ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के पैरा 43 को दोबारा खोलने से इनकार कर दिया। इसी हिस्से में अमित शाह के दिसंबर 2014 के डिस्चार्ज को चुनौती देने वाली अर्जी का जिक्र था।
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अगले साल की शुरुआत में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी प्रचार में जुट गई है। इसी कड़ी में सपा प्रमुख लगातार कोई न कोई घोषणा कर रहे हैं। अब अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि 2027 में अगर उनकी पार्टी जीतकर सरकार बनाती है तो वो राज्य के सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल करेंगे। यहां पढ़ें पूरी खबर…
